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ईरान में सत्ता परिवर्तन की राह मुश्किल, अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने ट्रंप की बढ़ाई चिंता

दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की है। उन्होंने मुजतबा खामेनेई को अक्षम बताते हुए संकेत दिया है कि ईरान का अगला नेता चुनने में उनकी भूमिका होनी चाहिए।

Sun, 8 March 2026 09:10 AMHimanshu Jha लाइव हिन्दुस्तान
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ईरान में सत्ता परिवर्तन की राह मुश्किल, अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट ने ट्रंप की बढ़ाई चिंता

ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल के संयुक्त सैन्य अभियान ऑपरेशन एपिक फ्यूरी (Operation Epic Fury) ने तेहरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई को खत्म कर एक बड़ा लक्ष्य तो हासिल कर लिया है, लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का सत्ता परिवर्तन का सपना अभी भी अधर में लटका नजर आ रहा है। वॉशिंगटन पोस्ट की एक ताजा रिपोर्ट और अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने इस अभियान की सफलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अमेरिकी खुफिया रिपोर्टों के अनुसार, भले ही अमेरिका ने बड़े पैमाने पर हवाई और नौसैनिक हमले किए हों लेकिन ईरान का सैन्य और धार्मिक ढांचा इतना गहरा और संस्थागत है कि उसे केवल हमलों से ढहाना असंभव प्रतीत होता है। नेशनल इंटेलिजेंस काउंसिल (NIC) द्वारा तैयार इस रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान की व्यवस्था में सत्ता के हस्तांतरण की प्रक्रियाएं पहले से ही तय हैं, जो सर्वोच्च नेता की अनुपस्थिति में भी काम करती रहेंगी।

ब्रूकिंग्स इंस्टीट्यूशन की विशेषज्ञ सुजैन मलोनी के अनुसार, "ईरानी संस्थान और उनकी प्रक्रियाएं कई दशकों से स्थापित हैं। यह तंत्र अमेरिकी दबाव के बावजूद अपनी आंतरिक पकड़ बनाए रखने में सक्षम है।"

उत्तराधिकार की जंग

सर्वोच्च नेता की मौत के बाद ईरान में उत्तराधिकार की प्रक्रिया शुरू हो गई है। असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स (धार्मिक परिषद) अगले नेता का चुनाव करेगी, जिसमें इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) की भूमिका निर्णायक होगी। चर्चा है कि दिवंगत नेता के बेटे मुजतबा खामेनेई सत्ता संभाल सकते हैं, हालांकि अली लारीजानी जैसे वरिष्ठ नेता इसका विरोध कर रहे हैं।

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दूसरी ओर, राष्ट्रपति ट्रंप ने सोशल मीडिया पर ईरान से बिना शर्त आत्मसमर्पण की मांग की है। उन्होंने मुजतबा खामेनेई को अक्षम बताते हुए संकेत दिया है कि ईरान का अगला नेता चुनने में उनकी भूमिका होनी चाहिए। ट्रंप के इस बयान पर ईरान की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकिर कलीबाफ ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ईरान का भाग्य केवल ईरानी जनता तय करेगी, कोई बाहरी गैंग नहीं।

युद्ध का विस्तार

युद्ध अब दूसरे हफ्ते में प्रवेश कर चुका है और इसका दायरा हिंद महासागर से लेकर नाटो सदस्य तुर्की की सीमाओं तक फैल गया है। वाइट हाउस की प्रवक्ता अन्ना केली ने दावा किया है कि ईरानी शासन को कुचला जा रहा है और उनके बैलिस्टिक मिसाइल तथा परमाणु कार्यक्रम को तबाह करना ही प्राथमिक लक्ष्य है। हालांकि, जमीनी हकीकत कुछ अलग कहानी बयां करती है।

अब तक ईरान के भीतर किसी बड़े जनविद्रोह या सुरक्षा बलों में फूट के संकेत नहीं मिले हैं। खुफिया रिपोर्टों का मानना है कि ईरान का बिखरा हुआ विपक्ष फिलहाल सत्ता संभालने की स्थिति में नहीं है। विशेषज्ञों का कहना है कि ईरानी नेतृत्व के लिए ट्रंप के सामने झुकना उनकी विचारधारा के पूरी तरह खिलाफ है।

अमेरिकी खुफिया समुदाय की 18 एजेंसियों का सामूहिक निष्कर्ष यह है कि केवल बमबारी से सत्ता परिवर्तन नहीं होगा। यदि ईरानी शासन पूरी तरह ध्वस्त नहीं होता तो राष्ट्रपति ट्रंप के पास वहां के राजनीतिक भविष्य को प्रभावित करने के सीमित विकल्प होंगे। फिलहाल, पूरी दुनिया की नजरें ईरान की असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स पर टिकी हैं कि वे इस संकट की घड़ी में किसे देश की कमान सौंपते हैं।

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