झुकने को राजी नहीं ईरान, ट्रंप के शांति प्रस्ताव पर रखीं बहुत बड़ी शर्तें; तंज भी कसा
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। डोनाल्ड ट्रंप के 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव के जवाब में ईरान ने प्रतिबंध हटाने और अमेरिकी सैन्य बेस बंद करने जैसी कड़ी शर्तें रखी हैं। इस पूरी जियोपॉलिटिकल हलचल की विस्तार से जानकारी पढ़ें।

मध्य पूर्व में चल रहे भीषण युद्ध के बीच संभावित युद्धविराम को लेकर ईरान ने बहुत ऊंची और सख्त शर्तें रख दी हैं। अमेरिका और इजरायल के साथ चल रहे इस सीधे और अभूतपूर्व टकराव में, तेहरान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि वह पश्चिमी देशों के दबाव में आकर आत्मसमर्पण नहीं करेगा।
तेहरान की प्रमुख मांगें
'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' (WSJ) की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान की सबसे प्राथमिक मांग यह है कि अमेरिका और इजरायल द्वारा उसके सैन्य ठिकानों, ऊर्जा बुनियादी ढांचे और परमाणु संयंत्रों पर किए जा रहे सभी हवाई और मिसाइल हमले तुरंत रोके जाएं। इसके अलावा, ईरानी अधिकारियों को यह डर सता रहा है कि आमने-सामने की शांति वार्ता एक 'जाल' हो सकती है। उन्हें आशंका है कि इस वार्ता का इस्तेमाल इजरायल और अमेरिका उनके बचे हुए शीर्ष नेताओं (जैसे संसद अध्यक्ष मोहम्मद-बागर गालिबाफ) को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। इसलिए, ईरान वार्ता की मेज पर आने से पहले अपने नेताओं की सुरक्षा की ठोस गारंटी चाहता है।
रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने ट्रंप प्रशासन को साफ कर दिया है कि किसी भी तरह की बातचीत की मेज पर लौटने के लिए अमेरिका को बड़ी रियायतें देनी होंगी। ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) ने सत्ता पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है और कई कड़ी मांगें रखी हैं।
- खाड़ी देशों में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य ठिकानों को बंद किया जाए।
- युद्ध के हर्जाने का भुगतान किया जाए।
- ईरान पर लगे सभी अंतरराष्ट्रीय और अमेरिकी प्रतिबंध पूरी तरह से हटाए जाएं।
- ईरान को बिना किसी प्रतिबंध के अपना मिसाइल कार्यक्रम जारी रखने की अनुमति दी जाए।
परमाणु कार्यक्रम और 'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' पर कोई समझौता नहीं
युद्ध और लगातार प्रतिबंधों के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था इस समय भारी दबाव में है। तेहरान चाहता है कि किसी भी समझौते के तहत अमेरिकी प्रशासन उनके तेल निर्यात और ऊर्जा क्षेत्र पर लगाए गए 'अधिकतम दबाव' वाले कड़े प्रतिबंधों को हटाए या उनमें ढील दे। अमेरिका लगातार यह मांग कर रहा है कि ईरान अपना परमाणु संवर्धन कार्यक्रम पूरी तरह से खत्म करे और अपने क्षेत्रीय 'प्रॉक्सी गुटों' (जैसे हिजबुल्लाह, हमास आदि) को समर्थन देना बंद करे। इसके विपरीत, ईरान इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा का मुख्य स्तंभ मानता है और वह इन पर पूर्ण प्रतिबंध स्वीकार करने को तैयार नहीं है।
वर्तमान कूटनीतिक स्थिति
ईरान ने सार्वजनिक रूप से बहुत कड़ा रुख अपना रखा है। हाल ही में ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने यह भी स्पष्ट किया था कि ईरान ने कभी युद्धविराम की भीख नहीं मांगी है और वह अपनी रक्षा के लिए तब तक लड़ने को तैयार है जब तक जरूरी हो। कुल मिलाकर, दोनों पक्षों की मांगों में जमीन-आसमान का अंतर है, जिससे फिलहाल किसी भी त्वरित शांति समझौते की संभावना बहुत कम नजर आ रही है।
ट्रंप का 15-सूत्रीय शांति प्रस्ताव
'द न्यूयॉर्क टाइम्स' के अनुसार, ट्रंप प्रशासन ने मध्यस्थों (कथित तौर पर पाकिस्तान) के जरिए 15-सूत्रीय संघर्ष विराम प्रस्ताव भेजा है। पाकिस्तान ने इस बातचीत की मेजबानी करने की पेशकश भी की है। हालांकि, एक तरफ अमेरिका शांति का प्रस्ताव दे रहा है, तो दूसरी तरफ वह अपनी सैन्य ताकत भी बढ़ा रहा है। वाशिंगटन इस क्षेत्र में पहले से तैनात 50,000 सैनिकों के साथ अतिरिक्त मरीन यूनिट्स और सैनिकों को भेजकर अपनी मौजूदगी मजबूत कर रहा है।
ईरान का तंज: आप खुद से बातचीत कर रहे हैं
ईरान ने डोनाल्ड ट्रंप के उन दावों का मजाक उड़ाया है जिनमें कहा गया था कि अमेरिका युद्ध खत्म करने के लिए ईरान से बातचीत कर रहा है। 'खतम अल-अंबिया मुख्यालय' के प्रवक्ता ने 'फार्स न्यूज एजेंसी' के एक वीडियो में कहा कि अमेरिका अपनी "रणनीतिक हार" को कूटनीतिक जीत के रूप में पेश करने की कोशिश कर रहा है और ऐसा लगता है कि वे "खुद से ही बातचीत कर रहे हैं।" प्रवक्ता ने साफ किया कि जब तक अमेरिका और इजरायल के सैन्य अभियान नहीं रुकते, तब तक कोई शांति संभव नहीं है। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि वैश्विक ऊर्जा बाजार तब तक अस्थिर रहेगा जब तक कि ईरान की सैन्य ताकत की सच्चाई को स्वीकार नहीं कर लिया जाता।
इजरायल और अमेरिका पर ईरानी मिसाइल हमले जारी
भले ही ट्रंप यह दावा कर रहे हों कि ईरान की सैन्य क्षमता काफी हद तक खत्म हो चुकी है और वे समझौता चाहते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके उलट है। ईरान ने बुधवार को अपने "ऑपरेशन ट्रू प्रॉमिस 4" के 80वें चरण का फुटेज जारी किया, जिसमें अमेरिका और इजरायली ठिकानों पर मिसाइलें दागी जा रही हैं। IRGC का दावा है कि उनके पिछले हमलों ने इजरायल के एयर डिफेंस को भेदते हुए तेल अवीव, बीयरशेबा और आसपास के सैन्य और खुफिया ठिकानों को निशाना बनाया।
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