हम तो डूबे हैं सनम...कैसे एक हमले से ईरान ने बदल दिया युद्ध का चेहरा! इजरायल पर 'सख्त' ट्रंप
इजरायल द्वारा 'साउथ पार्स' गैस फील्ड पर हमले से बौखलाए ईरान ने कतर और यूएई के गैस प्लांट को निशाना बनाया है। इस 'एनर्जी वॉर' पर डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। युद्ध के इस नए और खतरनाक मोड़ की पूरी इनसाइड स्टोरी पढ़ें।
मिडिल ईस्ट की जंग अब सिर्फ मिसाइलों और ड्रोनों की नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे बड़ी गैस फील्ड की भी बन गई है। 18 मार्च को इजरायल ने ईरान के साउथ पार्स गैस फील्ड पर हमला कर दिया। यहां दुनिया का सबसे बड़ा प्राकृतिक गैस भंडार है जो ईरान और कतर दोनों के बीच बंटा हुआ है। इस एक हमले ने पूरे युद्ध का चेहरा बदल दिया। दरअसल 28 फरवरी से शुरू हुए इस भीषण संघर्ष में अब तक सैन्य और सामरिक ठिकानों को निशाना बनाया जा रहा था, लेकिन अब यह युद्ध सीधे तौर पर वैश्विक ऊर्जा की जीवनरेखा यानी 'गैस और तेल इंफ्रास्ट्रक्चर' तक पहुंच गया है। 'साउथ पार्स गैस फील्ड' पर इजरायल के हमले के बाद, ईरान ने 'हम तो डूबे हैं सनम, तुम्हें भी ले डूबेंगे' की तर्ज पर अपने पड़ोसी देशों- खासकर कतर और यूएई के गैस संयंत्रों पर मिसाइलें दाग दी हैं। इस पूरे घटनाक्रम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को भी कड़ा रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है। आइए समझते हैं पूरा मामला।
कैसे शुरू हुआ यह खेल?
18 मार्च को इजरायली एयर फोर्स ने ईरान के साउथ पार्स फील्ड (असलूये के पास) के पेट्रोकेमिकल और गैस प्रोडक्शन फैसिलिटीज पर स्ट्राइक की। ईरानी स्टेट मीडिया ने आग और नुकसान की तस्वीरें जारी कीं। ईरान ने इसे अमेरिका-इजरायल की साजिश बताया, जबकि इजरायल ने आधिकारिक तौर पर दावा नहीं किया, लेकिन इजरायली मीडिया में इसे ईरान की एनर्जी बैकबोन पर पहला हमला बताया गया। हमले से बौखलाए ईरान ने यह मान लिया कि इस हमले में अमेरिका या कतर की मौन सहमति हो सकती है। इसके जवाब में ईरान ने सीधे खाड़ी देशों के ऊर्जा संयंत्रों को निशाना बनाना शुरू कर दिया।
कतर पर भीषण हमला: ईरान ने कतर स्थित दुनिया के सबसे बड़े LNG एक्सपोर्ट हब 'रास लफान इंडस्ट्रियल सिटी' पर बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इससे वहां भीषण आग लग गई और गैस प्रोसेसिंग यूनिट्स को भारी नुकसान हुआ। कतर की सबसे बड़ी एनर्जी कंपनी कतरएनर्जी ने इस बात की पुष्टि की है कि रास लफान में LNG फैसिलिटी के अलावा, पर्ल गैस-टू-लिक्विड्स (GTL) प्लांट पर ईरानी मिसाइलों से हमला किया गया। सुविधाओं को भारी नुकसान पहुंचा है।
राजनयिक तनाव: इस हमले के तुरंत बाद कतर ने सख्त कदम उठाते हुए ईरानी दूतावास के सैन्य और सुरक्षा अधिकारियों को 24 घंटे के भीतर देश छोड़ने का आदेश दे दिया।
यूएई भी निशाने पर: ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के हबशान गैस प्लांट और बाब फील्ड पर भी हमले किए, जिसे यूएई ने खतरनाक उकसावा करार दिया है।
साउथ पार्स क्यों इतना महत्वपूर्ण?
यह दुनिया का सबसे बड़ा गैस फील्ड है, जो ईरान को उसका 70% घरेलू गैस सप्लाई करता है। कतर के नॉर्थ फील्ड के साथ शेयर होने के कारण कतर भी प्रभावित हुआ। ईरानी रेवोल्यूशनरी गार्ड्स ने तुरंत चेतावनी दी- सऊदी अरब, यूएई और कतर के एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर अब वैध टारगेट हैं। कुछ घंटों बाद ईरान ने ऐक्शन लिया। कतर के रास लफान में भारी डैमेज हुआ, आग लग गई, प्रोडक्शन रुक गया।
ट्रंप का 'सख्त' रुख: इजरायल को रोका, ईरान को धमकी
ईरान द्वारा कतर के बुनियादी ढांचे को निशाना बनाए जाने के बाद, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'ट्रुथ सोशल' पर एक बेहद सख्त बयान जारी किया। ट्रंप ने कहा कि इजरायली हमले में अमेरिका और कतर की कोई भूमिका नहीं थी। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि इजरायल ने यह हमला गुस्से में और अपने दम पर किया है। अमेरिका को इस विशिष्ट हमले की कोई पूर्व जानकारी नहीं थी और कतर पूरी तरह से निर्दोष है। ट्रंप ने कहा कि इजरायल अब साउथ पार्स फील्ड पर कोई और हमला नहीं करेगा, बशर्ते ईरान कतर पर हमले बंद कर दे। ट्रंप ने सबसे बड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर ईरान ने दोबारा कतर के LNG इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमला करने की बेवकूफी की, तो अमेरिका (इजरायल की मदद के बिना भी) पूरे के पूरे साउथ पार्स गैस फील्ड को उस ताकत से उड़ा देगा, जो ईरान ने कभी नहीं देखी होगी।
क्यों बदला युद्ध का चेहरा?
पहले युद्ध सैन्य ठिकानों, इंटेलिजेंस हेड्स (जैसे ईरानी इंटेलिजेंस मिनिस्टर इस्माइल खतीब की हत्या) तक सीमित था। अब यह एनर्जी वॉर बन गया है। साउथ पार्स और रास लफान पर हमले से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का खतरा बढ़ गया- दुनिया का 20% तेल यहां से गुजरता है। ईरान की अर्थव्यवस्था की रीढ़ टूटी, दुनिया का सबसे बड़ा LNG एक्सपोर्टर कतर प्रभावित हुआ। भारत जैसे देशों पर असर पड़ा जो कतर से गैस आयात पर निर्भर है। वहीं ईरान ने दिखा दिया कि वह अब सिर्फ डिफेंस नहीं कर रहा- वह पड़ोसियों को भी निशाना बना सकता है। कतर और सऊदी जैसे अमेरिकी सहयोगी अब दोनों तरफ से फंस गए।
वैश्विक ऊर्जा बाजार में हड़कंप
इस 'एनर्जी वॉर' का सीधा असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्ती करने और इन हमलों के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार दहशत में है। ब्रेंट क्रूड ऑयल (कच्चा तेल) की कीमतें युद्ध शुरू होने के बाद से अब तक लगभग 50% तक बढ़ चुकी हैं और 110 डॉलर प्रति बैरल के करीब पहुंच गई हैं। कतर दुनिया का लगभग 20% LNG सप्लाई करता है। अगर वहां उत्पादन लंबे समय तक बाधित रहा तो पूरी दुनिया को भीषण ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ सकता है।
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