धमाकों से दहला दोहा, आग की लपटों में होर्मुज; दुनिया पर मंडराया अब तक का सबसे बड़ा गैस संकट
मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर। दोहा में लगातार धमाकों और होर्मुज स्ट्रेट में कार्गो जहाज पर हमले ने वैश्विक गैस और तेल संकट का खतरा बढ़ा दिया है। युद्ध के ताज़ा हालात और इसके असर की पूरी जानकारी पढ़ें।

मध्य पूर्व में तनाव अपने चरम पर है। अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए हमलों के बाद, ईरान की जवाबी कार्रवाई ने पूरे खाड़ी क्षेत्र को युद्ध की आग में धकेल दिया है। कतर की राजधानी दोहा में लगातार धमाकों की आवाजें और होर्मुज स्ट्रेट में मालवाहक जहाजों पर हो रहे हमलों ने दुनिया भर में ऊर्जा और गैस संकट की चिंताओं को कई गुना बढ़ा दिया है।
दोहा (कतर) में एक के बाद एक धमाके
आज यानी बुधवार 11 मार्च को कतर की राजधानी दोहा में कई बड़े धमाकों की आवाजें सुनी गईं। यह ईरान द्वारा खाड़ी देशों पर किए जा रहे लगातार हवाई हमलों का हिस्सा है। कतर के रक्षा मंत्रालय और एयर डिफेंस सिस्टम ने ईरान की ओर से दागी गई कई बैलिस्टिक मिसाइलों को हवा में ही नष्ट कर दिया है, जिसके कारण आसमान में ये तेज धमाके सुने गए। अधिकारियों के अनुसार अभी तक कतर में किसी भी नागरिक की जान जाने या संपत्ति के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन देश में 'सिक्योरिटी थ्रेट लेवल' बहुत बढ़ा दिया गया है। लोगों को घरों में रहने और खिड़कियों से दूर रहने की हिदायत दी गई है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, हाल के दिनों में ईरान ने कतर की एलएनजी सुविधाओं पर ड्रोन हमले किए, जिसमें रास लफान और मेसाईद प्लांट प्रभावित हुए। इससे कतर एनर्जी ने उत्पादन बंद कर दिया और फोर्स मेज्योर घोषित कर दिया, जिसका मतलब है कि अनुबंधित आपूर्ति रद्द हो गई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य में हमला
वैश्विक व्यापार की सबसे अहम कड़ी माने जाने वाले 'होर्मुज जलडमरूमध्य' में स्थिति बेहद खतरनाक हो चुकी है। यूनाइटेड किंगडम मैरीटाइम ट्रेड ऑपरेशंस (UKMTO) की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, होर्मुज स्ट्रेट में एक कार्गो जहाज पर किसी अज्ञात प्रोजेक्टाइल (मिसाइल/ड्रोन) से हमला किया गया है। जहाज पर आग लग गई है और क्रू मेंबर्स को जहाज खाली करना पड़ा है।
ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने इस अहम समुद्री रास्ते को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है और चेतावनी दी है कि वहां से गुजरने वाले किसी भी पश्चिमी या सहयोगी देश के जहाज को निशाना बनाया जाएगा। कुछ दिन पहले ही इसी क्षेत्र में एक क्षतिग्रस्त जहाज की मदद कर रहे UAE के एक टगबोट पर मिसाइल से हमला हुआ था, जिसमें 4 नाविकों की जान चली गई थी।
क्या गैस और तेल का संकट और बढ़ेगा?
इस युद्ध का सबसे बड़ा और सीधा असर वैश्विक अर्थव्यवस्था और आम आदमी की जेब पर पड़ने वाला है। गैस और तेल का संकट निश्चित रूप से और गहराने की आशंका है। कतर दुनिया के सबसे बड़े लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) सप्लायर्स में से एक है। हाल ही में रास लफान औद्योगिक क्षेत्र पर हुए ड्रोन हमले के बाद, 'कतर-एनर्जी' ने अपने एक बहुत बड़े LNG विस्तार प्रोजेक्ट को कम से कम 2027 तक के लिए टाल दिया है। इससे भविष्य की गैस सप्लाई पर सीधा असर पड़ेगा।
दुनिया का लगभग 20% तेल और भारी मात्रा में LNG इसी रास्ते से होकर गुजरता है। इस समय होर्मुज स्ट्रेट के बाहर सैकड़ों तेल टैंकर और मालवाहक जहाजों की मीलों लंबी लाइन लगी हुई है। बीमा कंपनियों ने इस रास्ते के लिए प्रीमियम कई गुना बढ़ा दिया है या कवर देना बंद कर दिया है। जहाजों की आवाजाही रुकने से सप्लाई चेन टूट गई है। अगर यह गतिरोध कुछ और हफ्तों तक चला, तो अंतरराष्ट्रीय बाजार में पेट्रोल, डीजल और गैस की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि देखने को मिल सकती है।
कतर का LNG निर्यात 5 दिनों से ठप, वैश्विक बाजार में गैस की कीमतें बढ़ने का खतरा
कतर में स्थित दुनिया के सबसे बड़े तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) निर्यात संयंत्र ने पिछले पांच दिनों से कोई भी शिपमेंट नहीं भेजा है। 2008 के बाद के उपलब्ध आंकड़ों में यह सबसे लंबा अंतराल है, जिससे इस ईंधन की कीमतों में और अधिक वृद्धि होने की आशंका पैदा हो गई है। केप्लर शिप-ट्रैकिंग डेटा के अनुसार, पिछले पांच दिनों से कोई भी गैस से भरा टैंकर रास लफान सुविधा से नहीं निकला है। 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हमले शुरू करने के बाद से किसी भी LNG जहाज ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार नहीं किया है।
दुनिया की लगभग 20% LNG की आपूर्ति करने वाले इस संयंत्र का इस तरह से बंद होना एक अभूतपूर्व घटना है। यह बंदी पिछले सप्ताह की शुरुआत में हुए एक ईरानी ड्रोन हमले के बाद हुई है, जिसके परिणामस्वरूप यूरोप और एशिया में गैस की कीमतों में भारी उछाल आया है। उत्पादन रुकने के बाद रास लफान ने कुछ ही शिपमेंट लोड किए थे (संभवतः अपने भंडारण टैंकों में जमा ईंधन का उपयोग करके), जिनमें से आखिरी शिपमेंट शुक्रवार को भेजा गया था।
कतर की अधिकांश गैस आपूर्ति एशिया के आयातकों को जाती है। अब ये आयातक या तो इसके विकल्प तलाश रहे हैं या उर्वरक संयंत्रों और उद्योगों जैसे अंतिम-यूजर्स को अपनी आपूर्ति में कटौती कर रहे हैं। अगर यह बंदी लंबे समय तक चलती है, तो इससे वैश्विक LNG बाजार में भारी दबाव आ जाएगा और नकदी संकट से जूझ रहे विकासशील व उभरते देशों में गैस की भारी किल्लत हो सकती है।
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