ईरान का 'डबल गेम'! भारत और चीन के लिए खोला सेफ कॉरिडोर, धड़ल्ले से बेच रहा अपना तेल
ईरान युद्ध के बावजूद होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल निर्यात जारी है। जानें कैसे कूटनीति से भारत-चीन के जहाज सुरक्षित गुजर रहे हैं, कच्चे तेल की कीमतें $100 के पार क्यों गईं और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का इस पर क्या रुख है।

मध्य पूर्व में अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला कर रख दिया है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल शिपिंग रूट यानी स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर ईरान की ओर से लगभग पूर्ण रोक के बावजूद, तेहरान एक 'डबल गेम' खेल रहा है। एक तरफ वह अमेरिका-इजरायल गठबंधन के खिलाफ सख्त रुख अपनाए हुए है और जलमार्ग को ज्यादातर जहाजों के लिए बंद कर रखा है, तो दूसरी तरफ वह अपने प्रमुख खरीदार चीन के लिए अपना खुद का कच्चा तेल धड़ल्ले से निर्यात कर रहा है। इतना ही नहीं, ईरान ने भारत के लिए भी 'सेफ कॉरिडोर' खोला है और कई भारतीय झंडे वाले जहाज पहले ही तेल और गैस लेकर सुरक्षित भारत आ चुके हैं।
भारत के लिए ईरान ने विशेष छूट दी है। कूटनीतिक बातचीत के बाद ईरान ने भारतीय फ्लैग वाले कई तेल टैंकरों को स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से सुरक्षित गुजरने दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में 20 से ज्यादा भारत-बाउंड जहाज इस रूट से गुजर चुके हैं या गुजरने वाले हैं। भारत के लिए यह राहत इसलिए अहम है क्योंकि भारत का 40-50% कच्चे तेल आयात होर्मुज से होकर आता है। हाल ही में एक सऊदी क्रूड से लदा भारतीय क्रू वाला टैंकर मुंबई पहुंचा, जो इस सेफ पैसेज का सबूत है। पाकिस्तान का भी एक जहाज ईरान के पास से होते हुए गुजरा है।
90 जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया
ईरान के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से तेल टैंकरों सहित लगभग 90 जहाजों ने होर्मुज जलडमरूमध्य को पार किया है। समुद्री और व्यापार डेटा प्लेटफार्मों के अनुसार, यह महत्वपूर्ण जलमार्ग प्रभावी रूप से बंद होने के बावजूद ईरान एक ही समय में लाखों बैरल तेल का निर्यात कर रहा है। लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के अनुसार, इस जलडमरूमध्य से गुजरने वाले कई जहाज पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों और निगरानी से बचने के लिए तथाकथित 'डार्क' ट्रांजिट कर रहे हैं। इन जहाजों के ईरान से जुड़े होने की संभावना है।
कच्चे तेल की कीमतें और अमेरिका का रुख
युद्ध शुरू होने के बाद से कच्चे तेल की कीमतें 40% से अधिक उछलकर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई हैं। ईरान ने धमकी दी है कि वह अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगियों के लिए 'एक लीटर तेल' भी यहां से नहीं गुजरने देगा। वहीं तेल कीमतों को कम करने की उम्मीद में, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सहयोगियों और व्यापारिक भागीदारों पर युद्धपोत भेजने और जलडमरूमध्य को फिर से खोलने का दबाव डाला है।
कीमतें स्थिर करने का प्रयास
तेल की कीमतों को स्थिर करने के लिए अमेरिका ईरानी तेल टैंकरों को भी वहां से गुजरने दे रहा है। ट्रेजरी सचिव स्कॉट बेसेंट ने कहा कि ईरानी जहाज पहले से ही बाहर निकल रहे हैं और हमने दुनिया के बाकी हिस्सों में आपूर्ति बनाए रखने के लिए ऐसा होने दिया है। अमेरिका ने ईरान के तेल नेटवर्क और निर्यात के लिए महत्वपूर्ण खार्ग द्वीप पर सैन्य ठिकानों पर बमबारी की है, लेकिन राष्ट्रपति ट्रंप ने कहा है कि उन्होंने फिलहाल ईरान के तेल बुनियादी ढांचे को छोड़ दिया है।
ईरान का तेल निर्यात और चीन की भूमिका
मार्च की शुरुआत में युद्ध शुरू होने के बाद से इस जलमार्ग पर अधिकांश शिपिंग यातायात ठप है। यह रास्ता दुनिया के लगभग पांचवें हिस्से के कच्चे तेल की आपूर्ति करता है। इस क्षेत्र में करीब 20 जहाजों पर हमले हो चुके हैं। इसके बावजूद, ट्रेड डेटा प्लेटफॉर्म केप्लर (Kpler) के अनुसार, ईरान मार्च की शुरुआत से 1.6 करोड़ बैरल से अधिक तेल का निर्यात करने में सफल रहा है।
चीन सबसे बड़ा खरीदार
पश्चिमी प्रतिबंधों और इससे जुड़े जोखिमों के कारण, चीन ईरानी तेल का सबसे बड़ा खरीदार बन गया है। मरीनट्रैफिक के विश्लेषण के अनुसार, हमले के जोखिम को कम करने के लिए जलडमरूमध्य के पास या उसके अंदर कुछ जहाजों ने खुद को 'चीन से जुड़ा' या पूरी तरह से चीनी चालक दल वाला घोषित किया है, ताकि वे चीन और ईरान के करीबी संबंधों का फायदा उठा सकें।
भारत और पाकिस्तान के जहाजों की सुरक्षित निकासी
हाल ही में सरकारों द्वारा बातचीत तेज किए जाने के बाद भारत और पाकिस्तान से जुड़े जहाजों ने भी सफलतापूर्वक इस जलडमरूमध्य को पार किया है। लॉयड्स लिस्ट के अनुसार, भारत के स्वामित्व वाले एलपीजी (LPG) कैरियर 'शिवालिक' और 'नंदा देवी' ने 13 या 14 मार्च के आसपास इस मार्ग से यात्रा की। भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने बताया कि ईरान के साथ बातचीत के बाद ही ये दोनों जहाज वहां से गुजर सके।
इसके अलावा, पाकिस्तान के झंडे वाला और पाकिस्तान नेशनल शिपिंग कॉर्प द्वारा नियंत्रित कच्चे तेल का टैंकर 'कराची' भी रविवार को जलडमरूमध्य से गुजरा। इराक की सरकारी समाचार एजेंसी के अनुसार, इराक भी अपने तेल टैंकरों को होर्मुज से गुजरने की अनुमति देने के लिए ईरान के साथ बातचीत कर रहा है।
क्या होर्मुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद है?
रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध से पहले यहां से प्रतिदिन 100 से 135 जहाज गुजरते थे। लेकिन 1 से 15 मार्च के बीच यह संख्या गिरकर केवल 89 रह गई (जिसमें 16 तेल टैंकर थे)। इनमें से 20% से अधिक जहाज ईरान से जुड़े माने गए, जबकि बाकी में चीन और ग्रीस से जुड़े जहाज शामिल थे। विशेषज्ञों का मानना है कि यह जलमार्ग पूरी तरह से बंद नहीं है। कंसल्टिंग फर्म रेडल के कुन काओ ने कहा कि इसे इस तरह से समझा जाना चाहिए कि यह कुछ विशिष्ट ट्रैफिक के लिए चुनिंदा रूप से बंद है, जबकि ईरानी निर्यात और मुट्ठी भर गैर-ईरानी आवाजाही के लिए यह अभी भी काम कर रहा है।
ऐसा प्रतीत होता है कि ईरान ने राजनयिक हस्तक्षेप के बाद कुछ जहाजों के गुजरने के लिए अपने तट के करीब एक सुरक्षित गलियारा बना लिया है। हालांकि, अगर ईरान की योजना उच्च ऊर्जा कीमतों के माध्यम से दुनिया को आर्थिक दर्द देने की है, तो वह बहुत ही सीमित संख्या में टैंकरों को गुजरने की अनुमति देगा।
(इनपुट एजेंसी)
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