भगवान पर की आपत्तिजनक टिप्पणी; भीड़ ने महिला को पीटा, कपड़े उतारे और चप्पलों की माला पहनाकर घुमाया
पुलिस के अनुसार, यह पूरी घटना मात्र कुछ मिनटों में घटित हुई, लेकिन इसकी क्रूरता ने पूरे महाराष्ट्र में हड़कंप मचा दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि महिला पहले भी विवादास्पद बयान देती रही है, लेकिन इस बार भीड़ का गुस्सा फूट पड़ा।

ठाणे जिले के उल्हासनगर इलाके में चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जिसमें एक महिला को देवी-देवताओं के बारे में आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप में भीड़ ने बुरी तरह पीटा। उसके कपड़े उतार दिए और चप्पलों की माला पहनाकर घुमाया। यह घटना गुरुवार को हुई, जिसका सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। पुलिस ने बताया कि इस मामले में अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है, जबकि चार अन्य आरोपी फरार हैं और उनकी तलाश जारी है।
घटना का वीडियो देखकर लोगों में आक्रोश फैल गया है और यह सवाल उठने लगा है कि धार्मिक भावनाओं के नाम पर किस हद तक हिंसा को बर्दाश्त किया जाए। इस घटना का आरंभ मंदिर दर्शन के दौरान हुआ। महिला ने कथित तौर पर देवताओं के संबंध में कुछ ऐसी बातें कहीं, जिनसे आसपास मौजूद लोगों की धार्मिक भावनाएं आहत हुईं। गुस्साई भीड़ ने महिला पर हमला बोल दिया। उन्होंने उसे बुरी तरह मारा-पीटा, कपड़े उतार दिए और चप्पलों की माला गले में डालकर पूरे इलाके में घुमाया। इस दौरान महिला की दुर्दशा का वीडियो कई लोगों ने रिकॉर्ड कर लिया, जो बाद में वायरल हो गया।
पुलिस के अनुसार, यह पूरी घटना मात्र कुछ मिनटों में घटित हुई, लेकिन इसकी क्रूरता ने पूरे महाराष्ट्र में हड़कंप मचा दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि महिला पहले भी विवादास्पद बयान देती रही है, लेकिन इस बार भीड़ का गुस्सा फूट पड़ा। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तुरंत कार्रवाई शुरू कर दी। सीसीटीवी फुटेज की जांच की जा रहा है और फरार आरोपियों की पहचान के लिए छापेमारी जारी है। गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों से पूछताछ में कई खुलासे हो सकते हैं। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता के तहत स्वेच्छा से चोट पहुंचाने, आपराधिक धमकी देने, शांति भंग करने वाली जानबूझकर अपमान करने और अन्य धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है।
पुलिस अधिकारी अवताडे ने बताया कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जा रही है और किसी भी तरह की धार्मिक उन्माद को बढ़ावा देने वाले तत्वों पर सख्त नजर रखी जा रही है। इस घटना ने एक बार फिर धार्मिक सहिष्णुता और कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कई सामाजिक संगठनों और महिला अधिकारों की संस्थाओं ने इसकी निंदा की है और मांग की है कि दोषियों को कड़ी सजा दी जाए। उल्हासनगर जैसे संवेदनशील इलाके में ऐसी घटनाएं साम्प्रदायिक तनाव को बढ़ावा दे सकती हैं। पुलिस ने अपील की है कि लोग शांति बनाए रखें और कानून अपने हाथ में न लें।




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