Shashikant Shinde says Ajit Pawar was forced to leave undivided NCP merger to taken place 'अजित पवार को अदृश्य शक्तियों की चालों से NCP छोड़ने के लिए मजबूर किया', चौंकाने वाला दावा, Maharashtra Hindi News - Hindustan
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'अजित पवार को अदृश्य शक्तियों की चालों से NCP छोड़ने के लिए मजबूर किया', चौंकाने वाला दावा

विधान पार्षद ने कहा कि उन्हें अपनी मौलिक इच्छा के विपरीत एक अलग धड़ा बनाने के लिए मजबूर किया गया था। शशिकांत शिंदे ने लेख में लिखा है कि पिछले चार से पांच महीनों से पिछली गलतियों को सुधारने की एक शांत प्रक्रिया चल रही थी।

Fri, 13 Feb 2026 07:50 PMNiteesh Kumar भाषा
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'अजित पवार को अदृश्य शक्तियों की चालों से NCP छोड़ने के लिए मजबूर किया', चौंकाने वाला दावा

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष शशिकांत शिंदे ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने दावा किया कि अजित पवार को अदृश्य शक्तियों की चालों, धमकियों और झूठे आरोपों से उत्पन्न परिस्थितियों की वजह से अविभाजित NCP से अलग होने के लिए मजबूर होना पड़ा। पार्टी की पत्रिका राष्ट्रवादी के फरवरी 2026 अंक में श्रद्धांजलि संदेश में प्रकाशित है। इसमें शिंदे ने दावा किया कि पिछली गलतियों को सुधारने की प्रक्रिया चल रही थी और अजित पवार को दोनों गुटों के विलय के बाद राकांपा का नेतृत्व करना था। अजित पवार की 28 जनवरी को बारामती हवाई पट्टी के नजदीक विमान हादसे में मौत हो गई थी।

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अजित पवार के जुलाई 2023 में तत्कालीन एकनाथ शिंदे सरकार में शामिल होने के बाद एनसीपी में फूट पड़ गई। अजित पवार के गुट को निर्वाचन आयोग से राकांपा का नाम और घड़ी का चिह्न मिला, जबकि शरद पवार के नेतृत्व वाले गुट को राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरदचंद्र पवार) नाम दिया गया। अजित पवार के निधन के बाद दोनों धड़ों के विलय की प्रक्रिया को लेकर अटकलें लगाई जा रही हैं। हालांकि, दोनों पक्षों के नेताओं ने इस मुद्दे पर अलग-अलग बयान दिए हैं। शिंदे ने लेख में कहा, 'हम सभी जानते हैं कि अदृश्य शक्तियों की चालों, धमकियों और झूठे आरोपों के जाल ने ऐसी स्थिति पैदा कर दी कि अजित पवार को मूल संगठन से बाहर निकलने के लिए मजबूर होना पड़ा।'

शशिकांत शिंदे का क्या दावा

एनसीपी (एसपी) के विधान पार्षद ने कहा कि उन्हें अपनी मौलिक इच्छा के विपरीत एक अलग धड़ा बनाने के लिए मजबूर किया गया था। शशिकांत शिंदे ने लेख में लिखा है कि पिछले चार से पांच महीनों से पिछली गलतियों को सुधारने की एक शांत प्रक्रिया चल रही थी। उन्होंने बताया कि अजित पवार दोनों गुटों को एकजुट करने के लिए शरद पवार और जयंत पाटिल के साथ बातचीत कर रहे थे। राकांपा (एसपी) ने कहा कि दिवंगत नेता ने हाल ही में हुए नगर निकाय और जिला परिषद चुनाव अभियानों में अग्रणी भूमिका निभाकर अपनी घर वापसी का संकेत दिया था। शिंदे ने लिखा कि राकांपा के दोनों धड़ों के विलय का औपचारिक निर्णय 12 फरवरी को पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद पवार की उपस्थिति में लिया जाना था।

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शशिकांत शिंदे ने कहा कि विलय के बाद एकीकृत एनसीपी का नेतृत्व आधिकारिक तौर पर अजित पवार को सौंपा जाना था, लेकिन इस दुखद दुर्घटना के कारण यह हस्तांतरण संभव नहीं हो सका। शिंदे ने पार्टी कार्यकर्ताओं से एकीकरण प्रक्रिया को पूरा करके अजित दादा की स्मृति का सम्मान करने का आह्वान करते हुए कहा, 'दुर्भाग्य से अजित दादा के नेतृत्व में पार्टी के दोनों धड़ों को एक साथ देखने का सपना अधूरा रह गया।' उन्होंने लेख के आखिर में लिखा कि अजित पवार को दी जाने वाली सबसे सच्ची श्रद्धांजलि NCP का सफल विलय और सुदृढ़ीकरण होगा, जिसे दिवंगत नेता ने आकार देने में दशकों तक परिश्रम किया था।

शिंदे के शब्दों पर जताई आपत्ति

इस बीच, एनसीपी की महाराष्ट्र इकाई के अध्यक्ष सुनील तटकरे ने अजित पवार के अविभाजित पार्टी से बाहर निकलने के कारणों को बयान करने के लिए शिंदे के शब्दों पर आपत्ति जताई। तटकरे ने कहा, 'अजित दादा 2014 से ही भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन करना चाहते थे क्योंकि उन्हें लगता था कि भाजपा और एनसीपी मिलकर राजनीतिक स्थिरता और सुशासन प्रदान कर सकते हैं। उन्होंने कई मौकों पर राकांपा नेतृत्व को यह बात स्पष्ट भी कर दी थी। मुझे नहीं पता कि शिंदे ने यह सब क्यों लिखा है और इसे लिखने के पीछे उनका क्या उद्देश्य है।'

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रायगढ़ से लोकसभा सदस्य ने कहा कि भाजपा राकांपा के प्रति प्रतिबद्ध है और अजित पवार की मृत्यु के बाद पार्टी को मजबूती प्रदान करेगी। उन्होंने दोहराया, 'राकांपा, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) का घटक है और बनी रहेगी।' राकांपा नेता सूरज चव्हाण ने कहा कि उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार को दोनों गुटों के विलय पर निर्णय लेने के लिए अधिकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि हमारी प्राथमिकता पार्टी और राज्य को मजबूत करने की है।