Amid LPG Crisis Dining Services Thrown into Chaos Hotels Across Maharashtra Down Shutters रसोई गैस की भारी किल्लत से बेपटरी हुई खान-पान व्यवस्था; महाराष्ट्र के होटलों पर लटके ताले, Maharashtra Hindi News - Hindustan
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रसोई गैस की भारी किल्लत से बेपटरी हुई खान-पान व्यवस्था; महाराष्ट्र के होटलों पर लटके ताले

सबसे बुरा असर ठाणे जिले में देखने को मिल रहा है, जहाँ रिपोर्टों के अनुसार लगभग 60 प्रतिशत होटल गैस की अनुपलब्धता के कारण बंद हो गए हैं। पारंपरिक मालवणी और सिंधुदुर्ग व्यंजन परोसने वाले ढाबों ने लकड़ी के चूल्हे जलाना शुरू कर दिया है।

Tue, 17 March 2026 05:51 PMPramod Praveen वार्ता, मुंबई/पुणे
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रसोई गैस की भारी किल्लत से बेपटरी हुई खान-पान व्यवस्था; महाराष्ट्र के होटलों पर लटके ताले

LPG Gas Cylinder Shortage: महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों में रसोई गैस की भारी किल्लत ने खाद्य उद्योग और आम आदमी की जेब पर गहरा प्रहार किया है। मुंबई, पुणे, ठाणे और सोलापुर जैसे शहरों में कॉमर्शियल सिलेंडरों की कमी के कारण न केवल खाने-पीने की वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं, बल्कि कई छोटे-बड़े होटल बंद होने की कगार पर पहुँच गए हैं। राजधानी मुंबई में स्थिति काफी चिंताजनक है। 'करी रोड' जैसे व्यस्त इलाकों में नाश्ते के स्टाल मालिकों ने एलपीजी सिलेंडर खत्म होने के बाद केरोसिन स्टोव और कोयले की भट्टियों का सहारा लेना शुरू कर दिया है। वैकल्पिक साधनों के उपयोग से लागत बढ़ गई है, जिसका सीधा असर ग्राहकों पर पड़ा है। वेंडर बताते हैं कि जो नाश्ता पहले किफायती था, अब उसके दाम बढ़ा दिए गए हैं।

सबसे बुरा असर ठाणे जिले में देखने को मिल रहा है, जहाँ रिपोर्टों के अनुसार लगभग 60 प्रतिशत होटल गैस की अनुपलब्धता के कारण बंद हो गए हैं। पारंपरिक मालवणी और सिंधुदुर्ग व्यंजन परोसने वाले कई ढाबों ने होटलों के बाहर लकड़ी के चूल्हे जलाकर खाना बनाना शुरू कर दिया है। होटल मालिकों ने आरोप लगाया है कि बाजार में सिलेंडरों की कालाबाजारी चरम पर है और एक सिलेंडर 5,000 से 6,000 रुपये तक में बेचा जा रहा है।

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बड़े पैमाने पर छंटनी का खतरा

पुणे में मेस सर्विस और 'रोटी-सब्जी' केंद्रों पर संकट मंडरा रहा है। आईटी कंपनियों और अस्पतालों में भोजन की आपूर्ति करने वाले बड़े वेंडर इस किल्लत से प्रभावित हुए हैं, जिससे हजारों कर्मचारियों का दैनिक भोजन बाधित हो रहा है। सोलापुर में कई प्रसिद्ध होटलों ने अपने मेन्यू से मुख्य व्यंजनों को हटा दिया है क्योंकि उनके पास पर्याप्त ईंधन नहीं है। व्यवसायियों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी, तो उन्हें बड़े पैमाने पर छंटनी करनी पड़ सकती है।

तत्काल हस्तक्षेप की मांग

होटल एसोसिएशन और छोटे व्यापारियों ने सरकार और गैस एजेंसियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनकी मुख्य मांगें आपूर्ति को स्थिर करना और कालाबाजारी पर नकेल कसना है। फिलहाल, वैकल्पिक ईंधन के बढ़ते इस्तेमाल और बढ़ती महंगाई ने राज्य की खाद्य अर्थव्यवस्था को संकट में डाल दिया है।