मासूम बच्चों के साथ 'चिता' पर लेट गईं महिलाएं, MP में क्यों रहा है यह आंदोलन
मध्य प्रदेश के छतरपुर में महिलाएं केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट का विरोध कर रही हैं। विरोध में महिलाएं मासूम बच्चों को लेकर 'चिता' पर लेट गई हैं। महिलाओं का कहना है कि इस प्रोजेक्ट के विरोध में वो आखिरी सांस तक लडती रहेंगी।

मध्य प्रदेस के छतरपुर में केतना-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट का विरोध हो रहा है। इसके विरोध में आदिवासी किसान महिलाएं 'चिता' पर लेटकर इस परियोजना का विरोध कर रही हैं। महिलाओं का कहना है कि वो अपनी आखिरी सांस तक इस प्रोजेक्ट का विरोध करती रहेंगी। वायरल हो रही तस्वीरों में कई आदिवासी महिलाएं अपने गोद में मासूम बच्चों को लेकर चिताओं पर लेटी हुई दिखा दे रही हैं। ये इसे चिता आंदोलन का नाम दे रही हैं और रिवर लिंक परियोजना के विरोध में न्याय की मांग कर रही हैं।
चिता आंदोलन कर रही महिलाओं की पुलिस से झड़प
बता दें कि इस रिवर लिंक प्रोजेक्ट का विरोध करने के लिए धरने के लिए चिताओं पर लेटी महिलाओं को जब पुलिस ने हटाने की कोशिश की तो तनाव पैदा हो गया। इस दौरान प्रदर्शनकारी महिलाओं और पुलिस में झड़प भी हो गई। झड़प के बाद पुलिस को पीछे हटना पड़ा। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि प्रशासन उन्हें लगातार परेशान कर रहा है। महिलाओं ने कहा कि उन्होंने कसम खाई है कि वो अपनी मांगों के पूरे होने तक डटे रहेंगे और अपनी लड़ाई जारी रखेंगे।
क्या है केन-बेतवा रिवर लिंक प्रोजेक्ट
मध्य प्रदेश के कुछ इलाकों में पानी की समस्या को दूर करने के लिए इस प्रोजेक्ट की शुरुआत की गई है। इस प्रोजेक्ट में केन नदी बेसिन से पानी को बेतवा बेसिन में ले जाना है, जिससे कम पानी वाले इलाकों में पानी की समस्या को दूर किया जा सके। इस प्रोजेक्ट में डैम बनाने, 200 किलोमीटर से ज्यादा लंबी नगर नेटवर्क और सिंचाई के साथ बिजली बनाने वाले इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाने की योजना है। इस प्रोजेक्ट को लेकर अधिकारियों ने बताया कि प्रोजेक्ट से बिजली पैदा होगी और 10 लाख हेक्टेयर से ज्यादा जमीन की सिंचाई जरूरतों को भी पूरा किया जाएगा। इस योजना से 62 लाख लोगों को पीने के लिए साफ पानी भी उपलब्ध करवाया जाएगा।
क्यों विरोध कर रहे हैं आदिवासी
बता दें कि यह प्रोजेक्ट मध्य प्रदेश के सूखाग्रस्त जिलों और यूपी के कुछ इलाकों के लिए बनाया जा रहा है। इस प्रोजेक्ट को कई सालों से अलग-अलग चरणों में पूरा करने की योजना है। इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे गांववालों का कहना है जमीन और जंगल के अधिकारों और उनके बार-बार होने वाले विस्थापन पर कोई ध्यान नहीं दे रहा है, इसलिए वो इस प्रोजेक्ट का विरोध कर रहे हैं। इस आंदोलन की अगुवाई आदिवासी महिलाएं, जय किसान संगठन के नेता अमित भटनागर के साथ मिलकर कर रही हैं। अमित भटनागर ने कहा कि ये महिलाएं शुक्रवार को भी 'चिता आंदोलन' जारी रखेंगी।
प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि इससे पहले, जब वे अपनी मांगों को लेकर दिल्ली जाना चाहते थे, तो उन्हें रोक दिया गया था। उन्होंने दावा किया कि सड़कें बंद कर दी गई थीं और उनकी बस्तियों में खाने-पीने की चीजों की सप्लाई रोक दी गई थी। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि उन्हें धमकियां भी दी जा रही थीं।




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