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ट्विशा शर्मा मौत; चोटों का पूरा जिक्र क्यों नहीं? कोर्ट में पुलिस जांच पर 5 सवाल

ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस जांच और पोस्टमॉर्टम पर गंभीर सवाल उठे हैं। मृतका के परिवार के वकील ने पोस्टमॉर्टम में बेल्ट न भेजने, चोटों का विवरण छिपाने और सीसीटीवी और एफआईआर के समय में तीन घंटे के अंतर जैसी विसंगतियां उजागर की हैं। 

Wed, 20 May 2026 10:47 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, भोपाल
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ट्विशा शर्मा मौत; चोटों का पूरा जिक्र क्यों नहीं? कोर्ट में पुलिस जांच पर 5 सवाल

भोपाल में 33 वर्षीय ट्विशा शर्मा की संदिग्ध मौत के मामले में पुलिस जांच और पोस्टमॉर्टम प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठे हैं। ट्विशा के माता-पिता का आरोप है कि शुरुआती पोस्टमॉर्टम के समय फंदे के लिए इस्तेमाल बेल्ट डॉक्टरों को नहीं भेजी गई और शरीर की चोटों को भी रिपोर्ट में सही से दर्ज नहीं किया गया। सीसीटीवी फुटेज और एफआईआर में दर्ज मौत के समय में करीब तीन घंटे का बड़ा अंतर है। इस मामले में ट्विशा के परिजनों के वकील ने 5 बड़े सवाल खड़े किए हैं।

1- डॉक्टरों को फंदे वाली बेल्ट क्यों नहीं दी गई?

न्यूज 18 की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत में सुनवाई के दौरान ट्विशा शर्मा के परिवार के वकील ने पुलिस जांच, पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और सरकारी रिकॉर्ड में कई खामियां गिनाई हैं। फांसी लगाने के लिए इस्तेमाल बेल्ट भी एक बड़ा सवाल बनकर उभरी है। ट्विशा शर्मा के परिजनों के वकील ने सवाल किया कि शुरुआती पोस्टमॉर्टम के दौरान AIIMS के डॉक्टरों को वह बेल्ट क्यों नहीं दी गई?

2- बिना बेल्ट गर्दन पर मिले निशानों का कैसे होगा मिलान?

ट्विशा के परिजनों के वकील ने कहा कि बेल्ट के बिना डॉक्टर गर्दन पर मिले फंदे के निशानों का ठीक से मिलान नहीं कर सकते हैं। वहीं भोपाल के पुलिस कमिश्नर ने माना कि बेल्ट को फोरेंसिक साइंस लेबोरेटरी की टीम ने जब्त कर लिया था लेकिन उसे समय पर अस्पताल नहीं भेजा गया। वहीं पुलिस ने बताया कि बेल्ट बाद में भेज दी गई थी। इस देरी से जांच पर कोई असर नहीं पड़ा।

3- चोटों का पूरा जिक्र क्यों नहीं?

ट्विशा के परिजनों के वकील ने यह भी सवाल उठाया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कथित तौर पर उनके शरीर पर मिली चोटों का पूरा विस्तार से जिक्र क्यों नहीं है। ट्विशा के परिजनों के पक्ष से यह भी कहा गया कि जांच प्रक्रिया के दौरान महत्वपूर्ण मेडिकल टिप्पणियों को पूरी तरह रिकॉर्ड नहीं लिया गया। ट्विशा के परिजनों ने डेड बॉडी को सुरक्षित रखने और फोरेंसिक जांच की मांग की है।

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4- CCTV फुटेज के समय, FIR की टाइमिंग में बड़ा अंतर

अदालत में पेश किए गए CCTV फुटेज के अनुसार, ट्विशा शर्मा को शाम करीब 7:20 बजे सीढ़ियों से ऊपर छत की ओर जाते हुए देखा जा सकता है। वहीं करीब 8:20 बजे तीन लोगों को बॉडी को नीचे लाते हुए देखा जा सकता है। हैरान करने वाली बात यहै कि FIR में मौत का समय रात 10:50 बजे दर्ज किया गया है। अब टाइम में यही लंबा गैप पुलिस जांच पर संदेह खड़ा करने वाला बड़ा सवाल बन गया है।

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5- ट्विशा शर्मा की उम्र भी अलग-अलग दिखाई

सवाल उठ रहे हैं कि क्या CCTV में सेट किया समय गलत था या FIR में ही गलत समय दर्ज किया गया था। ट्विशा शर्मा की उम्र भी अलग-अलग दिखाई गई है। एक जगह ट्विशा की जन्मतिथि 16 अप्रैल, 1987 दर्ज है। वहीं अन्य हिस्सों में उनकी उम्र 33 और 31 बताई गई है। यही नहीं FIR में कहा गया है कि शव परिवार को सौंप दिया गया था लेकिन ट्विशा के परिजनों ने कहा कि उन्होंने शव पर दावा नहीं किया है। आलम यह है कि 13 मई से ही डेड बॉडी मुर्दाघर में रखी है।

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