No VIP Treatment Why Datia Collector and SP Slept Under the Open Sky in a Remote Village दतिया कलेक्टर और एसपी ने एसी कमरा छोड़ गांव में खाट पर बिताई रात, मगर क्यों?, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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दतिया कलेक्टर और एसपी ने एसी कमरा छोड़ गांव में खाट पर बिताई रात, मगर क्यों?

कलेक्टर और एसपी ने ग्रामीणों से पानी, बिजली, सड़क, राशन और आवास जैसी आवश्यक सुविधाओं के बारे में विस्तार से जानकारी ली। ग्रामीणों ने भी खुलकर अपनी समस्याएं रखीं।

Sat, 25 April 2026 05:14 PMMohit लाइव हिन्दुस्तान, दतिया
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दतिया कलेक्टर और एसपी ने एसी कमरा छोड़ गांव में खाट पर बिताई रात, मगर क्यों?

जिले के बीकर गांव में प्रशासन का एक अनोखा और संवेदनशील चेहरा देखने को मिला, जब कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े और एसपी सूरज कुमार वर्मा ने गांव में रुककर न केवल जन-चौपाल लगाई, बल्कि खाट पर रात बिताकर ग्रामीण जीवन को करीब से समझने का प्रयास किया।अधिकारियों की इस पहल ने गांव में चर्चा का माहौल बना दिया और लोगों के बीच प्रशासन के प्रति भरोसा भी मजबूत हुआ।

बीकर गांव पहुंचने पर कलेक्टर और एसपी ने सबसे पहले जन-चौपाल के माध्यम से ग्रामीणों से सीधा संवाद किया। इस दौरान उन्होंने शासकीय योजनाओं की जमीनी स्थिति जानी और लोगों से पूछा कि उन्हें योजनाओं का लाभ मिल रहा है या नहीं। ग्रामीणों ने भी खुलकर अपनी समस्याएं अधिकारियों के सामने रखीं। गांव में पेयजल, सड़क, बिजली, राशन वितरण और आवास जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर कई शिकायतें सामने आईं।

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आम लोगों की समस्याओं का तत्काल समाधान

खास बात यह रही कि दोनों अधिकारियों ने सिर्फ शिकायतें सुनकर औपचारिकता नहीं निभाई, बल्कि कई मामलों में मौके पर ही समाधान के निर्देश दिए। संबंधित अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करने के लिए कहा गया, जिससे कई समस्याओं का मौके पर ही निराकरण भी हुआ। यह दृश्य किसी फिल्मी कहानी जैसा लगा, जहां आम लोगों की समस्याओं का तत्काल समाधान किया जाता है। दौरे के दौरान कलेक्टर और एसपी ने गांव के बच्चों से भी आत्मीय संवाद किया। उन्होंने बच्चों से पढ़ाई के बारे में बात की और उन्हें शिक्षा के महत्व को समझाया।

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ग्रामीणों को पसंद आया ये अंदाज

कलेक्टर स्वप्निल वानखड़े ने बच्चों को मन लगाकर पढ़ाई करने और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। वहीं एसपी सूरज कुमार वर्मा ने अनुशासन, लक्ष्य निर्धारण और मेहनत के महत्व पर जोर दिया। बच्चों ने भी अधिकारियों से खुलकर बातचीत की, जिससे माहौल आत्मीय और सकारात्मक बन गया। रात के समय दोनों अधिकारियों ने गांव में ही खाट पर आराम किया। यह दृश्य ग्रामीणों के लिए खास था, क्योंकि आमतौर पर बड़े अधिकारी गांव में रुकने से बचते हैं। अधिकारियों का यह जमीन से जुड़ा अंदाज लोगों को काफी पसंद आया। ग्रामीणों का कहना था कि पहली बार उन्होंने किसी कलेक्टर और एसपी को इस तरह उनके बीच रहकर उनकी समस्याएं समझते देखा है।

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दौरा एक सकारात्मक संदेश देता है

ग्रामीणों ने कलेक्टर और एसपी की कार्यशैली की खुलकर प्रशंसा की। उनका मानना है कि इस तरह के प्रयासों से न केवल समस्याओं का समाधान जल्दी होता है, बल्कि प्रशासन और जनता के बीच दूरी भी कम होती है। बीकर गांव में हुआ यह दौरा एक सकारात्मक संदेश देता है कि अगर अधिकारी जमीनी स्तर पर जाकर काम करें, तो शासन की योजनाएं सही मायनों में आम लोगों तक पहुंच सकती हैं। कुल मिलाकर, बीकर गांव में कलेक्टर और एसपी का यह दौरा प्रशासनिक संवेदनशीलता, जिम्मेदारी और जनसेवा का बेहतरीन उदाहरण बनकर सामने आया है, जिसने ग्रामीणों के दिल में एक नई उम्मीद जगा दी है।

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