mp satna malnutrition death 4 month old infant twin critical system failure एमपी में 4 महीने की बच्ची की कुपोषण से मौत, जुड़वां भाई की हालत नाजुक; सिस्टम पर उठे सवाल, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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एमपी में 4 महीने की बच्ची की कुपोषण से मौत, जुड़वां भाई की हालत नाजुक; सिस्टम पर उठे सवाल

यह मामला न सिर्फ परिवार की लापरवाही बल्कि स्वास्थ्य तंत्र की खामियों को भी उजागर करता है। मृत बच्ची सुप्रियंशी (उर्फ प्रियंशी) और उसका भाई नैतिक का जन्म 21 दिसंबर 2025 को मजगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ था।

Thu, 23 April 2026 03:32 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, सतना
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एमपी में 4 महीने की बच्ची की कुपोषण से मौत, जुड़वां भाई की हालत नाजुक; सिस्टम पर उठे सवाल

मध्य प्रदेश के सतना जिले से कुपोषण की एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। यहां चार महीने की एक बच्ची की मौत हो गई, जबकि उसका जुड़वां भाई जिंदगी के लिए जूझ रहा है। यह मामला न सिर्फ परिवार की लापरवाही बल्कि स्वास्थ्य तंत्र की खामियों को भी उजागर करता है। मृत बच्ची सुप्रियंशी (उर्फ प्रियंशी) और उसका भाई नैतिक का जन्म 21 दिसंबर 2025 को मजगवां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में हुआ था।

जन्म के समय से बच्चों का वजन था कम

जन्म के समय ही दोनों का वजन कम था, करीब 2 किलो के आसपास। चार महीने की उम्र में जहां बच्चों का वजन 4-5 किलो होना चाहिए, वहीं सुप्रियंशी का वजन महज 2.86 किलो और नैतिक का 2.93 किलो था। डॉक्टरों ने उन्हें गंभीर कुपोषण (Severe Acute Malnutrition) की श्रेणी में रखा।

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झोलाछाप डॉक्टरों से इलाज कराता रहा परिवार

एनडीटीवी की रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों बच्चे करीब 15 दिनों से बुखार, दस्त और उल्टी से पीड़ित थे, लेकिन परिवार ने सरकारी अस्पताल की बजाय गांव के एक झोलाछाप डॉक्टर से इलाज कराया। हालत बिगड़ने पर 21 अप्रैल को बच्चों को अस्पताल लाया गया, जहां से उन्हें जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। इलाज के दौरान सुप्रियंशी की हालत बिगड़ती गई और उसे रीवा रेफर करने से पहले ही उसकी मौत हो गई। नैतिक की हालत अब भी गंभीर बनी हुई है।

आशा वर्कर ने बताई परिवार की लापरवाही

जांच में सामने आया कि मां की शारीरिक कमजोरी के कारण बच्चों को स्तनपान नहीं मिल सका और उन्हें गाय-भैंस का दूध पिलाया गया, जिसे डॉक्टर खतरनाक मानते हैं। वहीं, परिवार का आरोप है कि आंगनवाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं ने नियमित निगरानी नहीं की, जिससे समय पर मदद नहीं मिल सकी।

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सिस्टम पर उठे सवाल, जांच के आदेश जारी

मामले ने प्रशासनिक लापरवाही को भी उजागर किया है। कलेक्टर ने जांच के आदेश दिए, जिसमें आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सुपरवाइजर और एएनएम की भूमिका में लापरवाही पाई गई। संबंधित कर्मचारियों को नोटिस जारी किए गए हैं और अवैध चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की गई है।

एमपी में 10 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित हैं

यह घटना अकेली नहीं है। पिछले छह महीनों में जिले में कुपोषण से बच्चों की मौत के कई मामले सामने आ चुके हैं। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, मध्य प्रदेश में 10 लाख से ज्यादा बच्चे कुपोषित हैं, जिनमें बड़ी संख्या गंभीर श्रेणी में आती है। यह घटना एक बार फिर राज्य के पोषण और स्वास्थ्य तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है।

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