MP High Court sends back Bhojshala dispute case to Indore bench for hearing MP HC ने धार भोजशाला विवाद मामला वापस इंदौर बेंच को भेजा, अब वहीं होगी सभी याचिकाओं पर सुनवाई, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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MP HC ने धार भोजशाला विवाद मामला वापस इंदौर बेंच को भेजा, अब वहीं होगी सभी याचिकाओं पर सुनवाई

हिंदू समुदाय के लोग भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय का मानना है कि यह 11वीं सदी की कमल मौला मस्जिद है। फिलहाल यह स्मारक भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) के अधीन है।

Thu, 19 Feb 2026 12:04 AMSourabh Jain पीटीआई
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MP HC ने धार भोजशाला विवाद मामला वापस इंदौर बेंच को भेजा, अब वहीं होगी सभी याचिकाओं पर सुनवाई

मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की जबलपुर स्थित मुख्य पीठ ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए धार के विवादित भोजशाला मंदिर-कमल मौला मस्जिद परिसर से जुड़ी सभी याचिकाओं को सुनवाई के लिए इंदौर खंडपीठ को स्थानांतरित कर दिया। मुख्य न्यायाधीश संजीव सचदेवा और जस्टिस विनय सराफ की डिवीजन बेंच ने कहा कि विवादित ढांचा धार जिले में मौजूद है, जो कि इंदौर बेंच के अधिकार क्षेत्र में आता है। अदालत ने कहा कि चूंकि इस मामले से जुड़े पक्षकार भी इसी क्षेत्र के हैं, इसलिए सुविधा की दृष्टि से इन याचिकाओं की सुनवाई इंदौर में ही होनी चाहिए। अब इस मामले की अगली सुनवाई अब 23 फरवरी को इंदौर खंडपीठ में होगी।

याचिकाकर्ताओं में से एक हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस के वकील विनय जोशी, जो कि सुनवाई में इंदौर से ऑनलाइन शामिल हुए थे, ने PTI को बताया कि हाई कोर्ट का निर्देश सभी पक्षों की सुविधा के लिए जारी किया गया है। उन्होंने बताया कि अब इस मामले की सुनवाई इंदौर बेंच के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश करेंगे। इससे पहले, 16 फरवरी को इंदौर खंडपीठ ने भी याचिकाओं को मुख्य न्यायाधीश के सामनेष रखने का सुझाव दिया था, जिसके बाद अब इसे औपचारिक रूप से इंदौर स्थानांतरित कर दिया गया है।

बता दें कि हिंदू समुदाय के लोग भोजशाला को वाग्देवी (देवी सरस्वती) का मंदिर मानते हैं, जबकि मुस्लिम समुदाय का मानना है कि यह 11वीं सदी की कमल मौला मस्जिद है। फिलहाल यह स्मारक भारतीय पुरातत्व विभाग (ASI) के अधीन है और उसी के द्वारा अप्रैल 2023 में दिए गए एक आदेश के अनुसार हिंदुओं को हर मंगलवार को वहां पूजा करने की अनुमति है, जबकि मुसलमानों को हर शुक्रवार को नमाज पढ़ने की इजाजत है।

इससे पहले 16 फरवरी को इंदौर बेंच ने 22 जनवरी, 2026 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए निर्देश दिया था कि उसके सामने पेंडिंग रिट पिटीशन को तीन हफ्ते के अंदर चीफ जस्टिस या हाई कोर्ट के सीनियर जज की अगुवाई वाली डिवीजन बेंच के सामने रखा जाए। इंदौर बेंच ने यह भी कहा था कि विवाद से जुड़ी लंबित याचिका को सही आदेश के लिए जबलपुर की प्रिंसिपल बेंच में मुख्य न्यायाधीश के सामने, एक पेंडिंग रिट अपील के साथ रखा जाए।

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दरअसल उच्चतम न्यायालय ने 22 जनवरी को उच्च न्यायालय को निर्देश दिया था कि वह विवादित परिसर के बारे में ASI की तरफ से सीलबंद लिफाफे में जमा की गई वैज्ञानिक सर्वे रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में सार्वजनिक करे और पार्टियों को आपत्ति दर्ज कराने के लिए उपलब्ध कराए। इस आदेश के बाद उच्च न्यायालय में सोमवार को पहली बार यह मामला सूचीबद्ध हुआ था। SC ने कहा कि सभी पक्षों की तरफ से आपत्तियां दर्ज होने के बाद मामले की अंतिम सुनवाई शुरू होगी। ऐसे में सर्वोच्च न्यायालय ने सभी पक्षों को विवादित परिसर में यथास्थिति बनाए रखने और अंतिम फैसला होने तक ASI के अप्रैल 2023 के आदेश का पालन करने का निर्देश दिया।

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