इंदौर में हुई मौतों पर पूछे सवाल से झल्लाए मंत्री विजयवर्गीय, गलत शब्द के साथ बोले- फोकट सवाल मत करो
भागीरथपुरा विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र 'इंदौर-1' में आता है। अधिकारियों ने बताया कि बीते एक हफ्ते के दौरान भागीरथपुरा क्षेत्र में उल्टी-दस्त के प्रकोप से 1,100 से ज्यादा लोग किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए हैं जिनमें से 111 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया गया है।

मध्यप्रदेश के नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय बुधवार को एक मीडियाकर्मी से उस वक्त बदतमीजी कर बैठे, जब उसने उनके विधानसभा क्षेत्र में गंदे पानी से हुए मौतों से जुड़ा सवाल पूछा लिया। सवाल सुनने के बाद विजयवर्गीय ना केवल झल्ला गए, बल्कि उन्होंने एक आपत्तिजनक शब्द का इस्तेमाल करते हुए कह दिया कि 'फोकट के प्रश्न मत पूछो'। हालांकि इसके बाद उस पत्रकार ने भी मंत्रीजी को ठीक से बात करने की नसीहत देते हुए अपना लहजा सुधारने की सलाह दे डाली और कहा कि इतने सीनियर लीडर होने के बाद भी उन्हें बात करने की तमीज नहीं है। वहीं इस घटना के थोड़ी देर बाद विजयवर्गीय को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट करते हुए खेद जता दिया।
रिपोर्टर ने कहा था- मैं खुद वहां होकर आया हूं
दरअसल उस मीडिया कर्मी ने विजयवर्गीय से इंदौर के भागीरथपुरा में गंदा पानी पीने से हुई करीब मौतों और इसी वजह से अस्पताल में भर्ती करीब 150 लोगों के परिजनों को इलाज में लग रहे पैसों का रिफंड और वहां रहने वाले लोगों के लिए पीने के पानी की ठीके से व्यवस्था नहीं होने से जुड़ा सवाल पूछा था। इस सवाल को सुनकर मंत्री नाराज हो गए और बोले- अरे छोड़ो यार, तुम फोकट प्रश्न मत पूछो।
बैठक से बाहर निकलते वक्त की मीडिया से बात
इसके बाद रिपोर्टर ने कहा कि यह फोकट का सवाल नहीं है, मैं तो वहां होकर आया हूं, इसके बाद तो तमतमाए विजयवर्गीय एक गलत शब्द का इस्तेमाल करते हुए कह दिया कि, क्या होकर आए हो तुम वहां। इतना कहने के बाद वो वहां से चले गए। दरअसल विजयवर्गीय ने यह बात उस बैठक से बाहर निकलते हुए कहीं, जो इंदौर में हुई इस दुखद घटना के बाद अधिकारियों के साथ रखी गई थी, और इस बैठक में प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव भी शामिल हुए थे।
'नैतिकता के आधार पर इस्तीफा लीजिए'
इस घटना का वीडियो शेयर करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने राज्य सरकार पर निशाना साधा और मुख्यमंत्री मोहन यादव से अपने मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का इस्तीफा लेने को कहा। पटवारी ने लिखा, ‘इंदौर में ज़हरीला पानी पीने से मौतों की संख्या 8 से बढ़कर 10 हो गई है, लेकिन भाजपा नेताओं की बदतमीज़ी, बेशर्मी और अहंकार जस का तस बना हुआ है। और इस जहरीले पानी की ज़िम्मेदारी पर सवाल किया जाए तो मंत्री जी पत्रकार पर अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। डॉ मोहन यादव जी यह क्या तमाशा कर रही है आपकी सरकार और आपके मंत्री। न पीड़ितों को मुफ़्त इलाज मिल रहा है, न संवेदना, ऊपर से आपके अहंकारी मंत्री अपशब्दों का इस्तेमाल कर रहे हैं। थोड़ी सी भी शर्म बची है तो ऐसे बदतमीज़ मंत्रियों से नैतिकता के आधार पर तत्काल इस्तीफा लीजिए।’
सिंघार बोले- मंत्री की संवेदनशीलता देखिए
उधर इसी वीडियो को शेयर करते हुए राज्य विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने लिखा, ‘ये मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन मंत्री है इनकी भाषा देखिये एक वरिष्ठ पत्रकार के साथ बदतमीज़ी और खुद के क्षेत्र में दूषित पानी से कई लोगों की मृत्यु हो गयी हो उस मामले की संवेदनशीलता देखिये!’
विजयवर्गीय बोले- मेरे कुछ गलत शब्द निकल गए
मीडियाकर्मी से विवाद के थोड़ी देर बाद विजयवर्गीय को अपनी गलती का अहसास हुआ और उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, ‘मैं और मेरी टीम पिछले दो दिनों से बिना सोए प्रभावित क्षेत्र में लगातार स्थिति सुधारने में जुटी हुई है। दूषित पानी से मेरे लोग पीड़ित हैं और कुछ हमें छोड़कर चले गए, इस गहरे दु:ख की अवस्था में मीडिया के एक प्रश्न पर मेरे शब्द गलत निकल गए। इसके लिए मैं खेद प्रकट करता हूं। लेकिन जब तक मेरे लोग पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ नहीं हो जाते, मैं शांत नहीं बैठूंगा।’
विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र में हुई घटना
बता दें कि भागीरथपुरा, विजयवर्गीय के विधानसभा क्षेत्र 'इंदौर-1' में आता है। अधिकारियों ने बताया कि बीते एक हफ्ते के दौरान भागीरथपुरा क्षेत्र में उल्टी-दस्त के प्रकोप से 1,100 से ज्यादा लोग किसी न किसी रूप में प्रभावित हुए हैं जिनमें से 111 मरीजों को अस्पतालों में भर्ती किया गया है।
इससे पहले दिन में इस कांड के बारे में पूछे जाने पर विजयवर्गीय ने संवाददाताओं से कहा था, ‘मुझे लगता है कि चूक तो हुई है, लेकिन अभी इस बारे में चर्चा करने से अच्छा है कि हम पहले सभी मरीजों को स्वस्थ करें और सकारात्मक वातावरण बनाएं।’ उन्होंने कहा कि दूषित पेयजल कांड के किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा, भले ही वह कितने भी बड़े स्तर का अधिकारी हो।




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