Madhya Pradesh Illegal felling of 1,242 trees in Narmadapuram NGT seeks report within four weeks नर्मदापुरम में 1,242 पेड़ों की अवैध कटाई, NGT ने 4 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट; अधिकारियों पर भी सख्ती, Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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नर्मदापुरम में 1,242 पेड़ों की अवैध कटाई, NGT ने 4 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट; अधिकारियों पर भी सख्ती

पेड़ों की कटाई ऐसे इलाके में हुई जो कि संरक्षित क्षेत्र में आता है। यानी ऐसा इलाका जहां आम व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं होती। आरोप है कि कार्रवाई के डर से पेड़ों की संख्या में फेरबदल किया गया ताकि बड़े अधिकारी बच सकें।

Mon, 19 Jan 2026 08:00 PMMohit लाइव हिन्दुस्तान
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नर्मदापुरम में 1,242 पेड़ों की अवैध कटाई, NGT ने 4 हफ्ते में मांगी रिपोर्ट; अधिकारियों पर भी सख्ती

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (एनजीटी) ने नर्मदापुरम वन मंडल के अंतर्गत 1,242 पेड़ों की कथित अवैध कटाई के मामले की जांच के लिए एक पैनल का गठन किया है जो कि 4 हफ्ते के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट पेश करेगा। पैनल एनजीटी को 'दोषी अधिकारियों' के खिलाफ की गई कार्रवाई के बारे में एक रिपोर्ट पेश करेगा। दअरसल एनजीटी नर्मदापुरम फॉरेस्ट डिविजन में 1,242 सागौन और टिक के पेड़ों की अवैध कटाई के मामले से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई कर रहा था। याचिका में कहा गया है कि अवैध तरीके से काटे गए पेड़ों की कीमत 2.4 करोड़ रुपये से ज्यादा थी।

न्यायिक सदस्य शिव कुमार सिंह और विशेषज्ञ सदस्य ए सेंथिल वेल की पीठ ने 17 जनवरी को जारी एक आदेश में कहा है कि पिछले साल 14 सितंबर को एक इंस्पेक्शन रिपोर्ट से पता चला है कि पेड़ों की अवैध रूप से कटाई की गई थी, जिससे राज्य को लगभग 2.4 करोड़ रुपये से ज्यादा का नुकसान झेलना पड़ा। इस दौरान अवैध कटाई की पुष्टि होने के बावजूद स्थानीय वन अधिकारियों ने जानकारी दबाई और उचित कार्रवाई भी नहीं की। ट्रिब्यूनल ने अधिकारियों के इस रवैये को कर्तव्य में घोर लापरवाही माना।

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चार हफ्ते में कार्रवाई रिपोर्ट पेश होगी

मामले में सामने आई लापरवाही को देखते हुए एनजीटी पैनल गठन कर दिया। पैनल में प्रधान मुख्य वन संरक्षक, पर्यावरण विभाग के प्रमुख सचिन, केंद्रीय प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, मध्य प्रदेश प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड आदि शामिल हैं। पैनल नर्मदापुरम फॉरेस्ट डिविजन का निरीक्षण कर चार हफ्ते में कार्रवाई रिपोर्ट पेश करेगा।

पेड़ों की संख्या में फेरबदल

आपको बता दें कि पेड़ों की कटाई ऐसे इलाके में हुई जो कि संरक्षित क्षेत्र में आता है। यानी ऐसा इलाका जहां आम व्यक्ति को प्रवेश की अनुमति नहीं होती। आरोप है कि कार्रवाई के डर से पेड़ों की संख्या में फेरबदल किया गया ताकि बड़े अधिकारी बच सकें।

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