MP High Court Quashes FIR Against Teacher Over Urdu Poem WhatsApp Post व्हाट्सएप पर उर्दू कविता पोस्ट करने पर बुरे फंसे थे टीचर, कोर्ट ने रद्द की FIR; क्या मामला?, Jabalpur Hindi News - Hindustan
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व्हाट्सएप पर उर्दू कविता पोस्ट करने पर बुरे फंसे थे टीचर, कोर्ट ने रद्द की FIR; क्या मामला?

बैतूल जिले के चिचोली टाउन के रहने वाले फैजान अंसारी पर बीएनएस की धारा 353(2)के तहत मामला दर्ज किया गया था। उनपर एक शिक्षक की गरिमा के खिलाफ व्यवहार करने का आरोप लगाया गया था।

Sat, 9 May 2026 09:46 AMMohit लाइव हिन्दुस्तान, जललपुर
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व्हाट्सएप पर उर्दू कविता पोस्ट करने पर बुरे फंसे थे टीचर, कोर्ट ने रद्द की FIR; क्या मामला?

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट की जबलपुर बेंच ने व्हाट्सएप वीडियो पोस्ट को लेकर एक स्कूल टीचर पर दर्ज एफआईआर को रद्द कर दिया है। टीचर पर धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का आरोप लगाया गया था। पुलिस ने टीचर की व्हाट्सएप पोस्ट को "स्त्री-विरोधी" कहा था। वे व्हाट्सएप वीडियो पोस्ट में "बे-हया" (बेशर्म) शीर्षक वाली उर्दू कविता को पढ़ते नजर आए थे।

बैतूल जिले के चिचोली टाउन के रहने वाले फैजान अंसारी पर बीएनएस की धारा 353(2)के तहत मामला दर्ज किया गया था। उनपर "एक शिक्षक की गरिमा के खिलाफ" व्यवहार करने का आरोप लगाया गया था। हालांकि फैजान ने अपने व्हाट्सएप वीडियो पोस्ट में किसी भी धर्म विशेष के खिलाफ प्रत्यक्ष तौर पर कोई बात नहीं कही थी।

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कोर्ट में चुनौती दी

फैजान ने अपने खिलाफ दर्ज हुई इस एफआईआर को कोर्ट में चुनौती दी। कोर्ट में सुनवाई के दौरान तर्क दिया गया कि उन्होंने बीते साल 22 जुलाई को वीडियो पोस्ट की थी और उसी शाम को चिचोली पुलिस स्टेशन में उन्हें तलब कर लिया गया था। याचिकाकर्ता ने कहा कि इस दौरान उनका मोबाइल जब्त कर लिया गया और उन्हें कथित तौर पर प्रताड़ित किया गया।

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कविता पढ़ी जरूर लेकिन…

अंसारी के वकील ने कहा कि याचिकाकर्ता ने एक मशहूर कविता पढ़ी जरूर लेकिन बिना किसी निजी टिप्पणी या उकसावे के ऐसा किया। ऐसे स्थिती में 'आपराधिक मंशा' मान लेना सही नहीं। इसके साथ ही याचिकाकर्ता ने अपने वीडियो पोस्ट से भड़काऊ या सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने वाली कोई हरकत नहीं की। वकील ने सुनवाई के दौरान कहा कि एफआईआर 'अस्पष्ट, बिना किसी खास सबूत और व्यक्तिगत राय' के आधार दर्ज की लगती है।

वहीं सरकारी वकील ने कहा कि याचिका "समय से पहले" दायर की गई है और इस स्तर पर स्वीकार्य नहीं है। वकील ने कहा कि पुलिस को कोर्ट की दखलअंदाजी के बिना कानून के अनुसार जांच पूरी करने की अनुमति दी जानी चाहिए।

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दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने क्या कहा?

दलीलें सुनने के बाद जज ने कहा कि 'कविता में किसी भी धर्म, समुदाय या संप्रदाय का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से कोई उल्लेख नहीं है जिससे धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने या सार्वजनिक व्यवस्था को बिगाड़ने को बढ़ावा देने के आरोप लग सकें।'

वहीं याचिकाकर्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि वीडियो पोस्ट करने और एफआईआर के बाद से ही उसे जान से मारने की धमकियां मिल रही हैं तो कोर्ट ने जिला एसपी को याचिकाकर्ता को सुरक्षा प्रदान करने का निर्देश भी दिया।

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