मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है या तालिबान की…ऐसा क्यों बोले जीतू पटवारी?
जीतू पटवारी गोविंदपुरा विधानसभा के आनंद नगर क्षेत्र में दुकानों को तोड़ने के मोहन यादव सरकार के निर्देश पर खासा नाराज दिखे। कांग्रेस नेता ने मांग की दुकानों के मुआवजे आज के बाजार मूल्य के हिसाब से दिए जाए या फिर नई दुकानों के लिए जगह दी जाए।

मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष जीतू पटवारी ने शनिवार को भाजपा सरकार की तुलना तालिबानी से कर डाली। जीतू पटवारी गोविंदपुरा विधानसभा के आनंद नगर क्षेत्र में दुकानों को तोड़ने के मोहन यादव सरकार के निर्देश पर खासा नाराज दिखे। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने जिन दुकानों को तोड़ने के निर्देश जारी किए हैं वह 40–50 साल पुरानी हैं। उन्होंने कहा कि अब तथाकथित विकास के नाम पर मोहन सरकार उनकी दुकानों पर बुलडोजर चला रही है।
जीतू पटवारी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को टैग करते हुए एक्स पर लिखा 'प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नए भारत में छोटे व्यापारियों की दुकानों पर बुलडोज़र चलाया जा रहा है। आखिर मध्य प्रदेश में भाजपा की सरकार है या तालिबान की? अगर बेगुनाह लोगों की दुकानों पर मोहन यादव जी का बुलडोजर चलेगा, तो कांग्रेस मजबूती से सामने खड़ी रहेगी।' एक अन्य पोस्ट में उन्होंने कहा कि बिना संवाद, बिना पुनर्वास और बिना संवेदनशीलता के किसी भी परिवार की रोजी रोटी छीनना अन्याय है।

जनता को घात पहुंचा रही है
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने इस मुद्दे पर शनिवार को आनंद नगर के व्यापारी मंडल और निवासियों के प्रतिनिधि मंडल से निवास पर मुलाकात भी की। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बातचीत में कहा ‘देश में किसी भी तरह के नए रोजगार पैदा नहीं किए जा रहे हैं। मध्य प्रदेश में 25 साल से बीजेपी की सरकार है। शहरी क्षेत्रों में लगातार देखने को मिल रहा है कि जो लोग 30-40 साल से रहे हैं उनकी दुकानों को तोड़कर उनका रोजगार छीना जा रहा है। दुकानदार कर्ज में हैं फिर भी उनकी सुनवाई नहीं हो रही है। धोखे से उनके कागज लेकर 10, 20 और 50 हजार रुपये मुआवजा डाला जा रहा है। धोखेबाजों की ये टोली लगातार मध्य प्रदेश की जनता को घात पहुंचा रही है।’
मुआवजा आज के बाजार मूल्य के हिसाब से हो
उन्होंने आगे कहा कि 'गोविंदपुरा में पिछले 40 साल से बीजेपी का विधायक है। यहां के दुकानदार 30-40 साल से काबिज हैं और सभी कर्ज में हैं कोई सुनने वाला नहीं है तो आखिर सरकार किसकी बनी है, कोई बांग्लादेश और पाकिस्तान से आकर वोट डाल गए थे क्या? यहां के ही तो लोगों थे जिन्होंने आपको वोट डाले। दुकानों के मुआवजे आज के बाजार मूल्य के हिसाब से दिए जाए या फिर नई दुकानों के लिए जगह दी जाए।




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