High Court Raps Administration Orders Reinstatement of Cop in IAS Farmhouse Raid Case IAS के फार्महाउस से जुआरियों को पकड़ने वाले जांबाज की बहाली, HC ने लगाई फटकार, Indore Hindi News - Hindustan
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IAS के फार्महाउस से जुआरियों को पकड़ने वाले जांबाज की बहाली, HC ने लगाई फटकार

उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में टिप्पणी की है कि किसी पुलिस अधिकारी को उसके वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन के लिए दंडित करना अदालत की अंतरात्मा को झकझोरता है।

Fri, 8 May 2026 03:01 PMMohit इंदौर, भाषा
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IAS के फार्महाउस से जुआरियों को पकड़ने वाले जांबाज की बहाली, HC ने लगाई फटकार

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौर जिले में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) की एक महिला अधिकारी के निजी फार्महाउस पर करीब दो महीने पहले छापा मारकर 18 लोगों को जुआ खेलने के आरोप में पकड़ने वाले पुलिस अफसर का निलंबन रद्द कर दिया है। उच्च न्यायालय ने अपने फैसले में टिप्पणी की है कि किसी पुलिस अधिकारी को उसके वैधानिक कर्तव्यों के निर्वहन के लिए दंडित करना अदालत की अंतरात्मा को झकझोरता है और यदि इस प्रकार के 'घिसे-पिटे' निलंबन आदेश जारी रहने दिए गए, तो कोई भी अधिकारी निलंबन के भय से किसी परिसर पर छापा मारने का साहस नहीं करेगा।

इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति जय कुमार पिल्लई के बृहस्पतिवार को पारित आदेश में कहा गया कि 2007 बैच के उप निरीक्षक लोकेन्द्र सिंह हिहोरे की अगुवाई में मानपुर थाना क्षेत्र में जिस निजी फार्महाउस पर छापा मारा गया था, वह एक कार्यरत आईएएस अधिकारी का है। एकल पीठ ने दोनों पक्षों के तर्कों पर गौर करने के बाद तत्कालीन थाना प्रभारी हिहोरे की याचिका स्वीकार करते हुए उन्हें पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) द्वारा 11 मार्च को निलंबित किए जाने का आदेश निरस्त कर दिया।

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कोर्ट ने क्या कहा?

उच्च न्यायालय ने कहा, ''प्रथमदृष्टया प्रतीत होता है कि विवादित आदेश मनमाने, दिखावटी और प्रतिशोधात्मक तरीके से पारित किया गया जिससे अदालत के पास न्याय के घोर उल्लंघन को रोकने के लिए हस्तक्षेप करने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है। यदि इस प्रकार के घिसे-पिटे आदेशों को जारी रहने दिया जाता है, तो निलंबन के भय से कोई भी अधिकारी किसी भी परिसर पर छापा मारने की हिम्मत नहीं करेगा।''

अधिकारियों ने बताया कि हिहोरे की अगुवाई में पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर जिला मुख्यालय से करीब 50 किलोमीटर दूर आवलीपुरा गांव में 10 और 11 मार्च की दरम्यानी रात एक फार्म हाउस पर छापा मारा था और वहां से 18 व्यक्तियों को कथित तौर पर जुआ खेलते वक्त हिरासत में लिया गया था, जबकि छह अन्य लोग मौके से फरार हो गए थे।

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'घटनास्थल बदलने का भारी दबाव डाला गया'

हिहोरे की ओर से अदालत में कहा गया कि छापे के बाद उन पर प्राथमिकी दर्ज नहीं करने या घटनास्थल बदलने का भारी दबाव डाला गया ताकि फार्महाउस की पहचान छिपाई जा सके। तत्कालीन थाना प्रभारी की ओर से कहा गया कि उन्होंने दबाव के बावजूद वास्तविक घटनास्थल का उल्लेख करते हुए प्राथमिकी दर्ज की जिसके अगले ही दिन उन्हें निलंबित कर दिया गया।

राज्य सरकार ने हिहोरे की याचिका पर अदालत में आपत्ति जताई और बहस के दौरान कहा कि याचिकाकर्ता को अपराध समीक्षा बैठकों में दिए गए निर्देशों का पालन नहीं करने और अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए प्रभावी खुफिया सूचना जमा नहीं करने के कारण निलंबित किया गया था। राज्य सरकार ने यह भी कहा कि विभागीय जांच प्रस्तावित होने के कारण यह कार्रवाई की गई।

हालांकि, उच्च न्यायालय ने कहा कि राज्य सरकार याचिकाकर्ता द्वारा कथित रूप से उल्लंघन किए गए किसी विशिष्ट परिचालन निर्देश या वैधानिक आदेश को रिकॉर्ड पर प्रस्तुत करने में 'आश्चर्यजनक रूप से विफल' रही है।

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पीठ ने कहा कि किसी कानून प्रवर्तन अधिकारी को उसके वैधानिक कर्तव्यों के त्वरित, प्रभावी और सफल निर्वहन के लिए दंडित करना 'गंभीर कदाचार' की अवधारणा के प्रतिकूल है और यह अदालत की अंतरात्मा को झकझोरता है। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता ने स्पष्ट, श्रेणीबद्ध और गंभीर आरोप लगाया था कि उसका निलंबन उच्च अधिकारियों के दबाव में घटनास्थल बदलने से इनकार का परिणाम था, लेकिन राज्य सरकार ने अपने जवाब में इस आरोप का विशिष्ट और स्पष्ट खंडन नहीं किया। अदालत ने कहा कि यह 'टालमटोल भरी चुप्पी' याचिकाकर्ता के इस दावे को मजबूत करती है कि उसका निलंबन अनुचित दबाव और अवैध निर्देशों का पालन नहीं करने के कारण हुआ।

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