इंदौर दूषित पानी कांड: 5,000 घरों को खंगाला गया, 149 मरीज अब भी भर्ती
शहर के भागीरथपुरा में नर्मदा नदी की पाइपलाइन में ड्रेनेज लाइन का पानी मिल जाने से सप्लाई का पानी गंदा हो गया था। नतीजन सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए, जिससे डायरिया और उल्टी का गंभीर प्रकोप फैल गया।

इंदौर दूषित पानी कांड के बाद मध्य प्रदेश सरकार सवालों के कटघरे में है। मामले की गंभीरता को देखते हुए कलेक्टर शिवम वर्मा खुद प्रभावित इलाकों में हैं। वे लगातार स्वास्थ्य विभाग के कामकाज, नागरिकों से चर्चा और उन्हें स्वास्थ्य के प्रति सजग कर रहे हैं। फॉलोअप सर्वे के जरिए घर-घर पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया जा रहा है और जो बीमार दिख रहे हैं उनका इलाज किया जा रहा है।
शिवम ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि 'कल 5,000 घरों का सर्वे किया गया, जिसमें लगभग 65 लोगों में लक्षण पाए गए और उनमें से 17 को अस्पताल में भर्ती कराया गया। हमारी आईईसी टीम लगातार मैसेज फैला रही है और लोगों से अपील कर रही है कि वे सिर्फ टैंकर का पानी इस्तेमाल करें, पीने से पहले उसे उबाल लें।'
कलेक्टर ने आगे कहा ‘हम लोगों को साथ ही हेल्थ प्रैक्टिस फॉलो करने के लिए कह रहे हैं। फिलहाल, 149 लोगों का इलाज चल रहा है। इस पूरी घटना में, मेडिकल पुष्टि के आधार पर अब तक छह मौतें हुई हैं। मुख्यमंत्री के निर्देशानुसार, पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद भी दी गई है।’
कलेक्टर शिवम वर्मा ने इससे पहले शनिवार को भी जनता से अपील की थी कि वे टैंकर का पानी ही पीएं। उन्होंने कहा था कि पानी को उबाल कर ही पीना है। उन्होंने बताया था कि सभी का मुफ्त इलाज किया जा रहा है और जिन्होंने पैसा जमा किया है उन्हें रिफंड कर दिया जाएगा।

लापरवाही का नतीजा
मालूम हो कि शहर के भागीरथपुरा में नर्मदा नदी की पाइपलाइन में ड्रेनेज लाइन का पानी मिल जाने से सप्लाई का पानी गंदा हो गया था। नतीजन सैकड़ों लोग बीमार पड़ गए, जिससे डायरिया और उल्टी का गंभीर प्रकोप फैल गया।
विपक्ष बना रहा दबाव
विपक्ष इस मामले पर लगातार सरकार पर दबाव बना रहा है। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जितेंद्र (जीतू) पटवारी ने इसे सिस्टम की नाकामी और भ्रष्टाचार का नतीजा बताते हुए दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।




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