टैंकरों का पानी छूने से तक डर रहे... इंदौर में भागीरथपुरा में दहशत, हर घर की यही कहानी
इंदौर के भागीरथपुरा में नर्मदा पाइपलाइन में सीवेज का गंदा पानी मिलने से कई लोगों की मौत हो गई और दर्जनों बीमार हैं। स्थानीय लोग अब सरकारी सप्लाई के बजाय बोतलबंद पानी खरीदने को मजबूर हैं।

देश का सबसे स्वच्छ शहर इंदौर आज एक ऐसी त्रासदी से जूझ रहा है जो दिल दहला देने वाली है। भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा की पेयजल लाइन में सीवेज का गंदा पानी मिल जाने से दर्जनों लोग बीमार पड़ गए और कई जानें चली गईं। निगम की तरफ से टैंकरों से पानी भेजा जा रहा है, लेकिन लोग इतने डर गए हैं कि उसे छूने से भी कतराते हैं।
अब बोतलबंद पानी पर निर्भर हैं लोग
स्थानीय निवासी गब्बर लश्करी की आंखों में आंसू हैं। वे बताते हैं, 'कई दिनों से हम गंदे पानी की शिकायत कर रहे थे, लेकिन किसी ने नहीं सुनी। मेरी 15 साल की बेटी कनक अभी अरविंदो अस्पताल में भर्ती है और 93 साल की दादी भी बीमार पड़ गईं थीं। अब हम पीने का पानी खरीदकर लाते हैं, बाकी कामों के लिए बोरिंग का पानी इस्तेमाल करते हैं। निगम के टैंकर आ रहे हैं, लेकिन भरोसा कहां बचा है? विकास के नाम पर तो जैसे विनाश हो रहा है।'
ये सिर्फ एक घर की कहानी नहीं है। पूरा इलाका दहशत में है। लोग उल्टी-दस्त से परेशान, अस्पताल भरे पड़े हैं।
पुरानी गलती सुधारने में देरी
वार्ड 11 के भाजपा पार्षद कमल वाघेला मानते हैं कि लोगों का विश्वास वापस लाना आसान नहीं। वे कहते हैं, 'बीमारी शुरू होने के बाद से हम 50 टैंकरों से नर्मदा का पानी सप्लाई कर रहे हैं और उबालकर पीने की सलाह दे रहे हैं। अच्छी बात यह है कि नए मरीज कम हो रहे हैं और मौतों की खबर नहीं आ रही। स्वास्थ्य टीम घर-घर सर्वे कर रही है।'

पार्षद बताते हैं कि नर्मदा की पाइपलाइन नीचे थी और ड्रेनेज ऊपर, जिससे लाइन खराब हो गई। तीन साल पहले उन्होंने बदलाव की मांग की थी। अब कुछ जगहों पर सुधार हो रहा है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी संजीव श्रीवास्तव पर आरोप कि टेंडर जारी होने के बावजूद काम छह महीने से रुका पड़ा है। पार्षद ने कहा कि अधिकारी जल्दी काम नहीं करते हैं। वजह अभी तक पूरी तरह पता नहीं चली कि गंदा पानी कैसे मिला।
निगम की कोशिशें और मंत्री का आश्वासन
दूसरी तरफ, निवासी दुर्गादास मौर्या कहते हैं कि अब टैंकरों से साफ पानी मिल रहा है, बाकी काम बोरिंग से हो रहा है। शहरी विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि पूरे कॉलोनी में माइक्रो-चेकिंग चल रही है, जो 8-10 दिनों में पूरी हो जाएगी। सीवेज मिलने की आशंका थी, इसलिए पहले से इलाज शुरू था और अब भी जारी है।




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