MP में ट्रैक्टर से कुचलकर वन रक्षक की हत्या पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, अगले हफ्ते करेगा सुनवाई
एक वकील ने गुरुवार को इस मामले का जिक्र जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की उस बेंच के सामने किया गया, जो कि चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और लुप्तप्राय जलीय वन्यजीवों को खतरे से जुड़े एक स्वतः संज्ञान वाले मामले की सुनवाई कर रही है।

सुप्रीम कोर्ट को अगले सप्ताह उस अर्जी पर सुनवाई करने के लिए तैयार हो गया है, जिसमें मध्य प्रदेश में रेत माफिया द्वारा एक दिन पहले की गई एक वन रक्षक (फॉरेस्ट गार्ड) की हत्या का मुद्दा उठाया गया है। प्राप्त जानकारी के अनुसार यह घटना प्रदेश के मुरैना जिले में उस वक्त हुई थी, जब गश्ती दल का हिस्सा रहे वन रक्षक ने अवैध रूप से रेत खनन कर ले जा रहे एक ट्रैक्टर-ट्रॉली को रोकने की कोशिश की, लेकिन ड्राइवर, गार्ड को कुचलकर वहां से भाग निकला। इस घटना में 35 वर्षीय फॉरेस्ट गार्ड हरकेश गुर्जर की मौत हो गई थी। यह घटना जिला मुख्यालय से लगभग 20 किलोमीटर दूर रनपुर गांव के पास नेशनल हाईवे-552 पर हुई।
एक वकील ने गुरुवार को इस मामले का जिक्र जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की उस बेंच के सामने किया गया, जो कि चंबल अभयारण्य में अवैध रेत खनन और लुप्तप्राय जलीय वन्यजीवों को खतरे से जुड़े एक स्वतः संज्ञान वाले मामले की सुनवाई कर रही है। वकील ने बताया कि यह अर्जी सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त 'एमिकस क्यूरी' (न्याय मित्र) ने दायर की गई है।
अदालत में दायर की गई नई अंतरिम अर्जी
वकील ने आगे कहा कि 'कल एक बेहद गंभीर घटना घटी है जिसमें एक वन रक्षक की हत्या कर दी गई, क्योंकि उन्होंने एक रेत से भरे ट्रैक्टर को रोकने की कोशिश की थी, जिसके बाद उन्हें कुचल दिया गया। हमने इस 'सुओ मोटो' (स्वतः संज्ञान) मामले में एक नई अंतरिम अर्जी (IA) दायर की है ताकि अदालत को इस स्थिति से अवगत कराया जा सके।'
सुप्रीम कोर्ट आने वाले सोमवार को सुनवाई के लिए तैयार
वकील ने आग्रह किया कि स्वतः संज्ञान वाला यह मामला 11 मई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध है, और इस IA पर उससे पहले ही सुनवाई की जाए। पूरी बात सुनने के बाद अदालत ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए इसे 13 अप्रैल को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर सहमति जताई। पीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि, 'कुछ और भी घटनाएं हुई हैं। आपको कुछ बहुत ही गंभीर घटनाएं देखने को मिलेंगी।'
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- ये खनन माफिया नहीं, डाकू हैं
इससे पहले की सुनवाइयों में सुप्रीम कोर्ट ने अवैध खनन में शामिल लोगों के खिलाफ बेहद सख्त टिप्पणी की थी। कोर्ट ने इन्हें डाकू करार देते हुए कहा था कि राजस्थान और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों में खनन माफिया इतने बेखौफ हो चुके हैं कि वे पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों तक की हत्या कर रहे हैं।
अभयारण्य में सक्रिय है रेत माफिया
बता दें कि राष्ट्रीय चम्बल अभयारण्य, जिसे राष्ट्रीय चंबल घड़ियाल वन्यजीव अभयारण्य भी कहा जाता है, 5,400 वर्ग किलोमीटर में फैला तीन राज्यों का एक संरक्षित क्षेत्र है। यहां लुप्तप्राय घड़ियाल (लंबे थूथन वाला मगरमच्छ) के अलावा, लाल-मुकुट वाला कछुआ और लुप्तप्राय गंगा नदी डॉल्फिन भी पाई जाती हैं।
1978 में घोषित किया गया था संरक्षित क्षेत्र
राजस्थान, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के मिलन बिंदु के पास चंबल नदी पर स्थित, इस अभयारण्य को सबसे पहले 1978 में मध्य प्रदेश में एक संरक्षित क्षेत्र घोषित किया गया था। अब यह एक लंबे और संकरे 'इको-रिजर्व' (पारिस्थितिकीय आरक्षित क्षेत्र) के रूप में मौजूद है, जिसका संयुक्त प्रशासन तीनों राज्य मिलकर करते हैं।




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