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भोजशाला केस में मोड़; ASI को सर्वे की वीडियोग्राफी मस्जिद पक्ष को देने के आदेश

एमपी के धार भोजशाला मामले में हाई कोर्ट ने एएसआई को 98 दिनों के सर्वे की वीडियोग्राफी 27 अप्रैल तक गूगल ड्राइव पर अपलोड कर पासवर्ड दोनों पक्षों को देने का आदेश दिया है। अदालत ने यह कदम मस्जिद पक्ष की आपत्तियों को सुनने के लिए उठाया है।

Tue, 21 April 2026 09:35 PMKrishna Bihari Singh लाइव हिन्दुस्तान, इंदौर
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भोजशाला केस में मोड़; ASI को सर्वे की वीडियोग्राफी मस्जिद पक्ष को देने के आदेश

धार भोजशाला मामले में एक अपडेट सामने आया है। मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को निर्देश दिया है कि वह 98 दिनों तक चले सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी 27 अप्रैल तक गूगल ड्राइव पर अपलोड करे और इसका पासवर्ड कोर्ट के साथ मस्जिद पक्ष को सौंपे। मस्जिद पक्ष के वकील सलमान खुर्शीद ने दलील दी कि बिना वीडियोग्राफी देखे वह सर्वे पर अपनी आपत्ति दर्ज नहीं करा पा रहे हैं। उन्होंने हिंदू पक्ष की याचिका की वैधता पर सवाल उठाए और कहा कि मामला सीधे हाई कोर्ट के बजाय जिला अदालत में सुना जाना चाहिए।

हाई कोर्ट ने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को आदेश दिया कि 98 दिन चले भोजशाला सर्वे की पूरी वीडियोग्राफी 27 अप्रैल से पहले गूगल ड्राइव पर अपलोड कर मस्जिद पक्ष यानी मौलाना कलामुद्दीन वेलफेयर सोसायटी और कोर्ट को पासवर्ड उपलब्ध कराया जाए। कोर्ट के इस आदेश के बाद बहुचर्चित भोजशाला विवाद में कानूनी हलचल और तेज हो गई है।

सर्वे पर आपत्ति दर्ज कराने की अनुमति दी

मस्जिद पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सलमान खुर्शीद ने कोर्ट में दलील दी कि सुप्रीम कोर्ट ने सर्वे पर आपत्ति दर्ज कराने की अनुमति दी है लेकिन वीडियोग्राफी उपलब्ध नहीं होने से आपत्ति दर्ज कराना संभव नहीं हो पा रहा है। इस पर हाई कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद एएसआई को वीडियोग्राफी उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। एएसआई की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन ने इस पर आपत्ति भी दर्ज कराई।

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याचिका की वैधता पर उठाए सवाल

सुनवाई के दौरान सलमान खुर्शीद ने हिंदू फ्रंट फॉर जस्टिस की याचिका की वैधता पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह मामला स्वामित्व विवाद से जुड़ा सिविल मामला है, जिसे रिट याचिका के जरिए नहीं सुना जा सकता है। उन्होंने कहा कि जिला कोर्ट में पहले से वाद लंबित है ऐसे में सीधे हाई कोर्ट में याचिका दायर करने का कोई औचित्य नहीं है।

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याचिका निरस्त करने की मांग

खुर्शीद ने यह भी तर्क दिया कि 2003 के एएसआई आदेश के 19 साल बाद दाखिल याचिका समयसीमा से बाहर है, इसलिए इसे निरस्त किया जाना चाहिए। सुनवाई के दौरान अयोध्या फैसले, वक्फ एक्ट और धार्मिक उपयोग को लेकर भी कई उदाहरण पेश किए गए। खुर्शीद बुधवार को अपनी दलीलें पूरा करेंगे। मामले की अगली सुनवाई पर सभी की नजरें टिकी हैं। भोजशाला विवाद में हाई कोर्ट का उक्त आदेश एक अहम मोड़ माना जा रहा है।

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रिपोर्ट- हेमंत

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