चलती कार में खूनी तांडव, इंदौर में दंपति पर पेचकस से हमला; लहूलुहान कर सड़क पर फेंका
मध्य प्रदेश के इंदौर में एक दंपति पर युवक ने हमला कर दिया। चलती कार में युवक ने हमला किया तो दंपति गंभीर रूप से घायल हो गए। दोनों को सड़क किनारे फेंककर आरोपी भाग गया।

इंदौर के एयरपोर्ट रोड पर मंगलवार शाम एक ऐसी सनसनीखेज वारदात सामने आई, जिसने शहर की कानून-व्यवस्था और पुलिस की सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए। सुपर कॉरिडोर पर एक सिरफिरे युवक ने लिफ्ट के बहाने टैक्सी रुकवाई और कुछ ही सेकंड में पूरी स्थिति को खौफनाक बंधक कांड में बदल दिया। आरोपी अमन पाल ने पहले ड्राइवर पर पेचकस से ताबड़तोड़ हमला किया, उसे लहूलुहान कर सड़क पर फेंक दिया और फिर खुद गाड़ी का स्टेयरिंग संभाल लिया।
बंधक बनाकर पेचकस से हमला
टैक्सी में सवार 66 वर्षीय रिटायर्ड बैंक अधिकारी अनिल शुक्ला और उनकी पत्नी अचानक इस भयावह घटना के बीच फंस गए। आरोपी ने कार को तेजी से गांधी नगर की ओर दौड़ाया और दोनों को बंधक बनाकर उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। करीब आधे घंटे तक चलती कार में दहशत का यह खेल चलता रहा, जिसमें आरोपी लगातार पेचकस से हमला करता रहा और दंपती को डराता-धमकाता रहा।
बेटी को फोन कर मांगी मदद
इस दौरान अनिल शुक्ला ने हिम्मत दिखाते हुए अपनी बेटी को फोन कर मदद मांगने की कोशिश की, लेकिन आरोपी ने उनका मोबाइल छीन लिया। जान बचाने के लिए दंपती ने पैसे और जेवर तक देने की पेशकश की, लेकिन हमलावर का इरादा सिर्फ लूट नहीं, बल्कि हिंसा फैलाना नजर आया। इसके बावजूद बुजुर्ग दंपती ने हिम्मत नहीं हारी और लगातार आरोपी का विरोध करते रहे।
दंपती के इसी साहस ने पूरे घटनाक्रम का रुख बदल दिया। संघर्ष के दौरान कार अचानक अनियंत्रित होकर एक पोल से जा टकराई। जोरदार आवाज सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और दंपती की चीखें सुनते ही आरोपी को घेर लिया। भीड़ ने आरोपी को पकड़कर काबू में किया और बाद में पुलिस के हवाले कर दिया। घायल अनिल शुक्ला को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
आरोपी गिरफ्तार
हालांकि पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने पुलिस की कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। आरोप है कि घटना गांधी नगर थाना क्षेत्र में होने के बावजूद थाना प्रभारी अनिल यादव ने क्षेत्राधिकार का हवाला देकर तत्काल कार्रवाई से बचने की कोशिश की। घटना के दौरान पुलिस की मौजूदगी और प्रतिक्रिया दोनों ही बेहद कमजोर नजर आईं।जब मामला वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचा, तब जाकर पुलिस हरकत में आई और कार्रवाई तेज हुई। इस देरी और ‘सीमा विवाद’ ने साफ कर दिया कि जमीनी स्तर पर पुलिसिंग में गंभीर खामियां हैं, जिनका फायदा अपराधी उठा रहे हैं।
रिपोर्ट: हेमंत




साइन इन