राजस्थान में बिना एक वोट पड़े चुने जाएंगे 3 राज्यसभा सांसद, जानिए कैसे
राजस्थान से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब लगभग निर्विरोध तय माना जा रहा है। सोमवार को नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने तक केवल तीन उम्मीदवारों ने ही अपने नामांकन दाखिल किए।
राजस्थान से राज्यसभा की तीन सीटों के लिए होने वाला चुनाव अब लगभग निर्विरोध तय माना जा रहा है। सोमवार को नामांकन प्रक्रिया समाप्त होने तक केवल तीन उम्मीदवारों ने ही अपने नामांकन दाखिल किए। ऐसे में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के दो और कांग्रेस के एक उम्मीदवार के निर्विरोध निर्वाचित होने का रास्ता साफ हो गया है। अब सभी की नजरें नामांकन पत्रों की जांच प्रक्रिया पर टिकी हैं, जिसके बाद 11 जून को आधिकारिक घोषणा की जा सकती है।
बीजेपी ने उतारे दो उम्मीदवार
राज्यसभा चुनाव में भाजपा ने अपने कोटे की दो सीटों के लिए पूर्व प्रदेशाध्यक्ष और पूर्व विधायक सतीश पूनिया तथा पार्टी की सक्रिय सदस्य अलका सिंह गुर्जर को उम्मीदवार बनाया है। दोनों नेताओं ने सोमवार को अपना नामांकन दाखिल किया। पार्टी नेतृत्व के इस फैसले को राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि भाजपा ने संगठनात्मक अनुभव और सामाजिक प्रतिनिधित्व के संतुलन को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवारों का चयन किया है।
कांग्रेस ने दोबारा जताया डांगी पर भरोसा
वहीं कांग्रेस ने अपने वर्तमान राज्यसभा सांसद नीरज डांगी को दूसरी बार उम्मीदवार बनाया है। डांगी ने 5 जून को ही अपना नामांकन दाखिल कर दिया था। पार्टी ने एक बार फिर उन पर भरोसा जताते हुए राज्यसभा भेजने का निर्णय लिया है। नामांकन की अंतिम तिथि तक किसी अन्य उम्मीदवार के मैदान में नहीं आने से डांगी का निर्विरोध निर्वाचन भी लगभग तय हो गया है।
18 जून को प्रस्तावित मतदान की जरूरत नहीं
चूंकि तीन सीटों के मुकाबले केवल तीन ही उम्मीदवार मैदान में हैं, इसलिए अब 18 जून को प्रस्तावित मतदान होने की संभावना नहीं है। निर्वाचन प्रक्रिया के तहत नामांकन पत्रों की जांच के बाद यदि सभी नामांकन वैध पाए जाते हैं तो 11 जून को तीनों उम्मीदवारों को निर्वाचित घोषित कर दिया जाएगा। इस तरह चुनावी मुकाबले की नौबत नहीं आएगी और राज्यसभा चुनाव बिना मतदान के संपन्न हो जाएगा।
तीन सांसदों का कार्यकाल हो रहा समाप्त
राजस्थान में यह द्विवार्षिक चुनाव उन सीटों के लिए कराया जा रहा है जो वर्तमान सांसदों के कार्यकाल समाप्त होने के कारण रिक्त हो रही हैं। इनमें केंद्रीय मंत्री रवनीत सिंह बिट्टू, भाजपा सांसद राजेंद्र सिंह गहलोत और कांग्रेस सांसद नीरज डांगी की सीटें शामिल हैं। इन तीनों का कार्यकाल 21 जून को समाप्त हो रहा है। नए निर्वाचित सदस्य इसके बाद राज्यसभा में अपना कार्यकाल शुरू करेंगे।
राजनीतिक हलकों में रही उम्मीदवारों की चर्चा
भाजपा द्वारा सतीश पूनिया और अलका गुर्जर को उम्मीदवार बनाए जाने के बाद राजनीतिक गलियारों में काफी चर्चा देखने को मिली। पूनिया लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहे हैं और प्रदेश भाजपा के प्रमुख चेहरों में गिने जाते हैं। वहीं अलका गुर्जर को राज्यसभा भेजकर पार्टी ने सामाजिक समीकरणों को साधने का प्रयास किया है। दूसरी ओर कांग्रेस ने नीरज डांगी को दोबारा मौका देकर उनके अनुभव और पार्टी के प्रति योगदान पर भरोसा जताया है।
राज्यसभा में नहीं बदलेगा दलों का गणित
इन चुनावों के बाद राजस्थान से राज्यसभा में दलों की मौजूदा ताकत में कोई बदलाव नहीं होगा। राज्य की 10 सदस्यीय राज्यसभा टीम में भाजपा और कांग्रेस के पास पांच-पांच सदस्य बने रहेंगे। भाजपा की ओर से सतीश पूनिया और अलका गुर्जर नए सदस्य के रूप में शामिल होंगे, जबकि घनश्याम तिवाड़ी, चुन्नीलाल गरासिया और मदन राठौड़ पहले से सदन में पार्टी का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। कांग्रेस की ओर से सोनिया गांधी, रणदीप सिंह सुरजेवाला, मुकुल वासनिक, प्रमोद कुमार और नीरज डांगी राज्यसभा में पार्टी का प्रतिनिधित्व करेंगे।
2028 में होगा अगला चुनाव
राजस्थान से राज्यसभा की अगली द्विवार्षिक चुनावी प्रक्रिया वर्ष 2028 के मध्य में प्रस्तावित है। फिलहाल तीनों सीटों पर निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति ने राज्य की राजनीति में चुनावी मुकाबले की संभावनाओं को समाप्त कर दिया है और अब केवल औपचारिक घोषणा का इंतजार है।
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