MP को दी केंद्र सरकार ने बड़ी सौगात, 3,839.42 करोड़ रुपए से यहां बनेगा 4-लेन कॉरिडोर
केंद्र सरकार की तरफ से दी जानकारी के अनुसार इस कॉरिडोर की लंबाई 80.45 किलोमीटर होगी और इसकी कुल लागत 3,839.42 करोड़ रुपए होगी।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडल समिति ने मध्य प्रदेश को एक बड़ी सौगात देते हुए उज्जैन को दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे से जोड़ने वाले 4-लेन कॉरिडोर को बनाने को मंजूरी दे दी। यह कॉरिडोर NH-752D के बदनावर-पेटलावद-थांदला-टिमरवानी सेक्शन पर बनाया जाएगा। सरकार की तरफ से दी जानकारी के अनुसार इस कॉरिडोर की लंबाई 80.45 किलोमीटर होगी और इसे बनाने में कुल 3,839.42 करोड़ रुपए की लागत आएगी।
यह कॉरिडोर उज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के टिमरवानी इंटरचेंज तक बिना रुकावट 4-लेन की सीधी कनेक्टिविटी देगा। सरकार ने बताया कि इस प्रोजेक्ट का मकसद यात्रा की कुशलता में सुधार करना है और इसके बनने के बाद इस रूट पर लगने वाला यात्रा का समय लगभग एक घंटा कम होने की उम्मीद है।

उज्जैन से DME पहुंचना होगा बहुत आसान
उज्जैन-बदनावर खंड (70.40 किमी) को पहले ही 2-लेन से 4-लेन में अपग्रेड किया जा चुका है। बदनावर-टिमरवानी खंड वर्तमान में एक मध्यवर्ती लेन (5.5 मीटर) है जिस पर वाहनों की अधिकतम गति 20 से 50 किमी प्रति घंटा है। इस सेक्शन को अपग्रेड करने से उज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे (DME) पर टिमरवानी इंटरचेंज तक सीधी 4-लेन कनेक्टिविटी पूरी हो जाएगी, जिससे कि यहां पर भी गति 80-100 किमी प्रति घंटा हो जाएगी। ऐसे में यहां से गुजरने में लगने वाला समय काफी कम हो जाएगा।
टिमरवानी-बदनावर सेक्शन के अपग्रेड होने से अंतरराज्यीय संपर्क मजबूत होगा और यातायात की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित होगी। साथ ही, अप्रैल 2028 में होने वाले सिंहस्थ कुंभ मेले के दौरान यातायात में होने वाली भारी वृद्धि को भी इसके जरिए संभाला जा सकेगा।
इस कॉरिडोर के बनने से होंगे ये फायदे
बदनावर-पेटलावाद-थांदला-टिमरवानी खंड धार और झाबुआ जिलों के आदिवासी क्षेत्रों से होकर गुजरता है और इसके बनने से धार और झाबुआ जिलों के समग्र आर्थिक विकास में तेजी आएगी। धार जिले के कुछ हिस्से नीति आयोग के आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम के अंतर्गत आते हैं। इस खंड के उन्नयन से उज्जैन-बदनावर-तिमारवानी कॉरिडोर से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे तक सीधा और त्वरित मार्ग उपलब्ध होगा। इस बेहतर संपर्क से रसद लागत कम होगी, कच्चे माल और तैयार माल की कुशल आवाजाही में सुविधा होगी और इंदौर, पीथमपुर, उज्जैन और देवास में स्थित औद्योगिक केंद्रों/एमएमएलपी तक पहुंच मजबूत होगी।




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