Baba Bageshwar lashed out at the workers लौंडियाबाजी के लिए बनते हैं चेले; बाबा बागेश्वर ने सेवादारों की ही खोल दी 'पर्ची', Madhya-pradesh Hindi News - Hindustan
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लौंडियाबाजी के लिए बनते हैं चेले; बाबा बागेश्वर ने सेवादारों की ही खोल दी 'पर्ची'

बाबा बागेश्वर ने सेवादारों और चेलों को जमकर फटकार भी लगाई। उन्होंने बताया धाम में चेलों के बात करने का तौर-तरीका बहुत खराब है, कई चेले यहां सिर्फ लौंडियाबाजी करने आते हैं। उन्हें बाबा के आसपास के भौकाल से मतलब है।

Mon, 9 March 2026 06:16 PMRatan Gupta लाइव हिन्दुस्तान, छतरपुर
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लौंडियाबाजी के लिए बनते हैं चेले; बाबा बागेश्वर ने सेवादारों की ही खोल दी 'पर्ची'

अपने भक्तों की पर्चियां निकालकर उनके जीवन से जुड़ी बातें बताने वाले पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने इस बार अपने सेवादारों की पर्चियां खोल दी हैं। इसका जिक्र करते हुए बाबा बागेश्वर ने सेवादारों और चेलों को जमकर फटकार भी लगाई। उन्होंने बताया धाम में चेलों के बात करने का तौर-तरीका बहुत खराब है, कई चेले यहां सिर्फ लौंडियाबाजी करने आते हैं। उन्हें बाबा के आसपास के भौकाल से मतलब है।

सेवादारों का बात करने का तरीका घटिया

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो में पंडित धीरेंद्र शास्त्री अपने चेलों पर बरसते हुए कहते हैं- हमारे यहां के सेवादारों की टोन बहुत खराब है। बात करने का तरीका बहुत घटिया है। ऐसे बात करते हैं, जैसे एहसान जता रहे हों। ऐसे धक्का देते हैं, जैसे ये आर्मी वाले हों। इनकी मानसिकता ऐसी हो गई है कि हमारे पीठ देते ही ये खुद गुरु बन जाते हैं। बात भी सही है कि चाय से ज्यादा केतली गरम होती है।

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कुछ लौंडे लौंडियाबाजी के चक्कर में चेले बन रहे

इन्हें गुरु दिख ही नहीं रहा है। इन्हें गुरु के आस-पास का भौकाल दिख रहा है। इनकी नजर गुरु पर थोड़े है। इनकी नजर इस पर है कि इनका गुरु सीधा पीएम से जुड़ा है। सीएम से सीधी बात होती है। आधे सेवादार तो इसलिए बन रहे हैं, क्योंकि यहां बढ़िया माल-पानी है। कुछ लौंडे लौंडियाबाजी के चक्कर में चेले बन रहे हैं। कुछ माताएं और बच्चियां भी विचित्र होती हैं, हमसे मिलने के बहाने उनसे मिलने आती हैं।

बाबा बागेश्वर बोले, मुझे सबकी सच्चाई पता है

इसके बाद पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपने चेलों और सेवादारों को कड़ी चेतावनी देते हुए कहा कि उन्हें सबकी सच्चाई पता है। उन्होंने कहा कि कई लोग बिना उनसे मिले ही उनके नाम का इस्तेमाल कर सेवादार बन गए हैं। शास्त्री ने कहा कि आधे से ज्यादा लोग उनके नाम का सहारा लेकर पहचान बना रहे हैं। उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि जैसे वे भक्तों की पर्ची निकालकर सच बताते हैं, वैसे ही जरूरत पड़ी तो सेवादारों की सच्चाई भी सबके सामने ला सकते हैं।

दरबार के अंत में उन्होंने सफलता को लेकर अपनी सोच भी साझा की। शास्त्री ने कहा कि धाम का नाम दुनिया भर में होना या बड़े नेताओं का यहां आना असली सफलता नहीं है। उनके अनुसार सच्ची सफलता वही है, जब व्यक्ति का जीवन ईमानदारी और बिना किसी दाग के बीते और वह अपनी छवि को साफ रख सके।

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