मध्य प्रदेश की 4 हस्तियों को मिलेगा पद्मश्री सम्मान, जानिए नाम और सामाजिक योगदान
Padma Awards 2026: भारत सरकार की तरफ से दिए जाने वाले सम्मान 'पद्मश्री' की घोषणा हो चुकी है। साल 2026 के पुरुस्कारों की लिस्ट में मध्य प्रदेश की 4 हस्तियों के नाम शामिल हैं।

Padma Awards 2026: भारत सरकार की तरफ से दिए जाने वाले सम्मान 'पद्मश्री' की घोषणा हो चुकी है। साल 2026 के पुरुस्कारों की लिस्ट में मध्य प्रदेश की 4 हस्तियों के नाम शामिल हैं। इनके नाम हैं- लेखक और पत्रकार कैलाश चंद्र पंत, मार्शल आर्ट कलाकार भगवानदास रैकवार, मप्र जन अभियान परिषद के उपाध्यक्ष मोहन नागर और नारायण व्यास आर्कियोलॉजी। इनके योगदान को डिटेल में जानिए।
हिंदी का बढ़ाया मान, अब मिला सम्मान
कैलाशचंद्र पंत एमपी के सीनियर जर्नलिस्ट हैं। उनका जन्म 26 अप्रैल को इंदौर के मऊ जिले में हुआ था। वह लेखक, पत्रकार और सांस्कृति चिंतक रहे हैं। उन्होंने हिंदी भाषा, साहित्य और पत्रकारिता के क्षेत्र में खास योगदान दिया है। बीते 2 दशकों तक पत्रकारिता के क्षेत्र में सराहनीय कार्य किया।
जनधर्म नामक साप्ताहिक मैग्जीन को निकालते रहे। विद्या भवन उदयपुर में प्रकाशन प्रमुख रहे। सोशलिस्ट कांग्रेसमैन, दिल्ली के सह-संपादक रहे। दैनिक नव भारत भोपाल में संपादक रहे। मासिक पत्रिका शिक्षा प्रदीप का भी संपादन किया।
जल संरक्षण वाले मोहन को सम्मान
मोहन नागर राजगढ़ जिले के रहने वाले हैं। बैतूल जिले में उन्होंने जल संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण को लेकर खास योगदान दिया है। उन्हें अनसंग हीरोज की श्रेणी में चुना गया है। अपने काम के चलते उन्हें बैतुल में जल पुरुष के नाम से जाना जाता है। फिलहाल नागर मप्र जन अभियान परिषद के अक्ष्यक्ष हैं।
बुंदेली मार्शल आर्ट को रखा जिंदा, अब सम्मान
भगवानदास रैकवार बुंदेलखंड की पारंपरिक मार्शल आर्ट परंपरा को आगे बढ़ाया है। वे लंबे समय से छत्रसाल बुंदेला अखाड़े के उस्ताद रहे हैं। उन्होंने बुंदेली संस्कृति और अखाड़ा कला को सहेजने और उस परंपरा को आगे बढ़ाने का योगदान दिया है। इसके चलते आज ये परंपरा न केवल जीवंत है, बल्कि नई पीढ़ी इसे सीख भी रही है।
प्रागैतिहासिक औजारों और शैलचित्रों की शोध
नारायण व्यास भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के सेवानिवृत्त सुपरिंटेंडिंग आर्कियोलॉजिस्ट हैं। वह मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में रहते हैं। उन्हें मध्य भारत में प्रागैतिहासिक औजारों और शैलचित्रों (Rock Art) पर दशकों तक किए गए शोध के लिए जाना जाता है।
उनके पास प्रारंभिक मानव द्वारा उपयोग किए गए 500 से अधिक प्रागैतिहासिक औजारों का संग्रह है, जिसे उन्होंने शोध और शिक्षा के उद्देश्य से संरक्षित किया है। पुरातत्व जगत में उन्हें “मध्य भारत का पुरातत्व पुरोधा” भी कहा जाता है।




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