दिल्ली के मालचा महल में 11 कुत्तों के साथ रहती थीं बेगम विलायत, जानें अब क्यों कहा जाता है इसे भूतिया! interesting story behind begum wilayat and her 11 dogs live in malcha mahal delhi and why it is called haunted, Travel news in Hindi - Hindustan
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दिल्ली के मालचा महल में 11 कुत्तों के साथ रहती थीं बेगम विलायत, जानें अब क्यों कहा जाता है इसे भूतिया!

दिल्ली के चाणक्यपुरी में मालचा महल काफी फेमस है। अब लोग इसे हॉन्टेड मान चुके हैं और रात में जाने से डरते हैं। चलिए आपको मालचा महल के पीछे की सच्चाई और कहानी बताते हैं।

Thu, 22 Jan 2026 09:58 AMDeepali Srivastava लाइव हिन्दुस्तान
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दिल्ली के मालचा महल में 11 कुत्तों के साथ रहती थीं बेगम विलायत, जानें अब क्यों कहा जाता है इसे भूतिया!

दिल्ली में कई खूबसूरत चीजें हैं, जो देखने के लिए लोग दूर-दूर से आते हैं। लेकिन एक महल भी है, जिसे भूतिया कहा जाता है और लोग रात में यहां नहीं जाते हैं। इस महल के बारे में कई सारी बातें फैलाई गई हैं, अब वो झूठ है या सच ये किसी को भी नहीं पता। दिल्ली के चाणक्यपुरी में खंडहर हो चुका महल है जिसका नाम है मालचा महल। दरअसल, ये महल नहीं बल्कि पहले एक शिकारगाह था, जहां राजा-महाराजा शिकार की तलाश में आते थे। लेकिन अब इसे लोग मालचा महल के नाम से ही जानते हैं और दूर से ही खंडहर जैसी इमारत दिखाई देती है। महल तक जाने का रास्ता भी सुनसान और झाड़ियों से भरा हुआ है कि लोग वहां जाने की हिम्मत न करें। मालचा महल को लेकर कहानी मशहूर है कि यहां बेगम विलायत अपने बेटे-बेटी और 11 विदेशी ब्रीड वाले कुत्तों के साथ रहती थीं। चलिए बताते हैं इस महल के बारे में कुछ खास बातें।

कब बना ये महल

दिल्ली के चाणक्यपुरी में स्थित मालचा महल का निर्माण 14वीं सदी में किया गया था। इस महल में बेगम विलायत बेटे प्रिंस साइरस और बेटी प्रिंसेज सकीना के साथ आखिरी में रहती थीं। ये बेगम खुद को अवध के शाही परिवार का वंशज बताकर यहां रहने के लिए आई थी। लेकिन बिना खाना, पानी, पैसों के ज्यादा दिनों तक रह नहीं पाई। ऐसे में उन्होंने हीरे पीसकर पी लिए और आत्महत्या कर ली। उनका शव बेटे-बेटी ने 10 दिनों तक मेज पर रखा हुआ था और उसके बाद वही दफना दिया। कुछ सालों बाद सकीना भी मर गई और प्रिंस ने बहन का शव भी वही दफन कर दिया। साल 2017 में प्रिंस अली रजा उर्फ साइरस का भी अज्ञात बीमारी की चपेट में आकर निधन हो गया। अली रजा ही थे, जो इस महल में आखिर में रहे थे और उसके बाद से ही इसे स्थानीय लोग हॉन्टेड मानने लगे।

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हॉन्टेड वॉक

दिल्ली टूरिज्म की ओर से इस महल में जाने के लिए हॉन्टेड वॉक शुरू की गई थी। इस महल में जाने के लिए 800 रुपये का टिकट लेना पड़ता था और ये वॉक शाम 5:30 से 7 बजे तक समय निर्धारित की गई थी। खास बात ये है कि महल जाने के लिए एंट्री ऐसी घुमावदार बनी हुई है कि थोड़ा अंदर जाने पर बाहर का कुछ भी नहीं दिखता। महल के आगे घनी झाड़ियां और जंगल है, जहां कई जानवर रहते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बेगम का शव यहां 10 दिनों तक पड़ा रहा था, उनकी आत्मा यही पर है और उसकी रात में आवाजें आती हैं। हालांकि, इन बातों पर विश्वास नहीं किया जा सकता क्योंकि किसे ने खुद नहीं सुना है। लोग डर के मारे रात में यहां नहीं जाते हैं।

लड़की ने किया एक्सप्लोर

दिल्ली की रहने वाली रुपल मलिक ने अपने इंस्टाग्राम पर मालचा महल जाने का ब्लॉग वीडियो शेयर किया है। उनका कहना है कि महल जाने का रास्ता ही इतना डरावना है कि रात में यहां जाने पर सांस अटक सकती है। अगर आपको घूमने आना है तो ग्रुप बनाकर दिन में आएं और शाम होने से पहले निकल जाएं। ये महल आज भी सुनसान और खाली पड़ा हुआ है।

नोट- इस लेख में दी गई जानकारी आम है, लाइव हिंदुस्तान इसकी पुष्टि नहीं करता है। मालचा महल हॉन्टेड है या नहीं और स्थानीय लोगों की बातें सच है या झूठ, इस बात की पुख्ता जानकारी नहीं है। फिलहाल ये जगह ASI (Archaeological Survey of India) प्रोटेक्टेड है।

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