FAFO पेरेंटिंग क्या है और क्या ये बच्चों को बनाती है आत्मनिर्भर? जानें इसके फायदे और नुकसान what is FAFO Parenting trend How It Helps Kids Become Independent know here its Pros and Cons, पेरेंटिंग टिप्स - Hindustan
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FAFO पेरेंटिंग क्या है और क्या ये बच्चों को बनाती है आत्मनिर्भर? जानें इसके फायदे और नुकसान

आजकल पेरेंटिंग के स्टाइल में कई तरह के बदलाव आ चुके हैं और आएदिन नए ट्रेंड्स आते रहते हैं। अब नया ट्रेंड आया है FAFO पेरेंटिंग, ऐसा कहा जा रहा है कि इससे बच्चे आत्मनिर्भर और मजबूत बन सकते हैं। चलिए जानते हैं क्या है ये ट्रेंड?

Tue, 14 April 2026 11:15 AMDeepali Srivastava लाइव हिन्दुस्तान
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FAFO पेरेंटिंग क्या है और क्या ये बच्चों को बनाती है आत्मनिर्भर? जानें इसके फायदे और नुकसान

बदलते वक्त के साथ पेरेंटिंग स्टाइल भी अब पूरी तरह से बदल चुका है। पहले बच्चों की परवरिश को लेकर साधारण तरीका अपनाया जाता था, जिससे बच्चे मजबूत और समझदार बनते थे। अब तेज दिमाग वाले बच्चों को डील करने के लिए परवरिश के तरीके भी अपडेट होते जा रहे हैं। इन्हीं नए तरीकों में से एक है FAFO पेरेंटिंग ट्रेंड, जो इन दिनों काफी चर्चा में है। कहा जा रहा है कि यह तरीका बच्चों को मजबूत, आत्मनिर्भर और बेहतर फैसले लेने वाला बनाता है। लेकिन सवाल यह है कि क्या वाकई यह पेरेंटिंग स्टाइल बच्चों को जल्दी आत्मनिर्भर बना सकता है? आइए जानते हैं आखिर FAFO पेरेंटिंग क्या है, इसमें पेरेंट्स क्या करते हैं, और इसके फायदे और नुकसान क्या हैं।

क्या है FAFO पेरेंटिंग?

FAFO पेरेंटिंग का मतलब है कि खुद गलती करो और फिर उसका नतीजा भी झेलो। ये पेरेंटिंग स्टाइल आज का नहीं है, पुराना है। बस इसे नए नाम के साथ पेश किया गया है, जिसे लोग नया ट्रेंड समझ रहे हैं। आजकल बच्चा खाना नहीं खाता है, तो पेरेंट्स पीछे लगे रहते हैं। जरा सा रोता है तो उसे चुप कराने के लिए हर जिद मान लेते हैं, ये चीजें FAFO पेरेंटिंग में नहीं आती हैं। FAFO पेरेंटिंग में बच्चे को बार-बार रोकने-टोकने के बजाय छोड़ दिया जाता है कि गलती करो और फिर सीखो। जैसे अगर बच्चे ने खाना नहीं खाया, तो अब खाना नहीं मिलेगा। जब भूख लगेगी तब ही मिलेगा। कोई चीज फेंककर तोड़ दी तो अब वह खिलौना दूसरा नहीं आएगा। इससे बच्चे को भूख, खाने और चीजों की वैल्यू पता चलती है। साथ ही बच्चा समझ लेता है कि उसकी जिद पूरी नहीं होगी।

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फायदे क्या होते हैं

FAFO पेरेंटिंग के कुछ फायदे हैं, जो बच्चे के बिहेवियर में देखने को मिलते हैं। अगर पेरेंट्स इसे फॉलो करते हैं, जो बच्चा जिम्मेदार, आत्मनिर्भर और मजबूत बन सकता है। इसके फायदे क्या हैं-

- जब आप बच्चे पर रोक-टोक नहीं करते हैं, तो वह खुद की सोच-समझ से चीजों को करने लगता है। ऐसे बच्चा खुद के लिए फैसले लेना सीख लेता है।

- बच्चा अपनी गलती से सीखता है, ऐसे में आपके ऊपर कोई ब्लेम-गेम नहीं होने वाला। बच्चा गलती करेगा, नुकसान होगा तो उसे आगे के लिए सीख मिलेगी।

- इसमें पेरेंट्स को बच्चों पर हर समय नजर गड़ाकर रखने की जरूरत नहीं पड़ती। वह समझ लेते हैं कि माता-पिता कुछ नहीं कहेंगे लेकिन नुकसान होने पर चीज दोबारा नहीं मिलेगी।

नुकसान भी हैं

FAFO पेरेंटिंग के कुछ फायदे हैं, तो नुकसान भी हैं। माता-पिता अगर इस ट्रेंड को फॉलो करते हैं, तो उन्हें कुछ बातों का ध्यान भी रखना चाहिए। चलिए बताते हैं इसके नुकसान-

- बच्चे को अगर आप बिल्कुल रोक-टोक नहीं करेंगे, ध्यान नहीं देंगे, तो उसे अकेलापन महसूस हो सकता है। उसे लगने लगेगा कि मम्मी-पापा प्यार नहीं करते हैं।

- आप बच्चे को हर चीज खुद करने के लिए छोड़ देंगे तो वह कुछ खतरा भी मोल ले सकता है। जैसे कोई दवाई खा ली, साइकिल चलाई तो गिर गया, बालकनी से गिरना, किचन में कोई जोखिम भरा काम।

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- ये पेरेंटिंग स्टाइल 5-6 साल के उम्र वाले बच्चों के लिए बेहतर हो सकता हैं। 3-4 साल के बच्चों को उतनी समझ नहीं होती है, वह हर चीज खेल-शैतानी में करते हैं, जिसका नुकसान बच्चे के साथ आपको भी भुगतना पड़ सकता है।

क्या करना चाहिए

अगर आप इस पेरेंटिंग स्टाइल को फॉलो कर रहे हैं, तो ध्यान रखें कि बच्चा कब क्या कर रहा है। उसे जरूरी चीजों के लिए जरूर समझाएं या फिर डांटें। जैसे होमवर्क सही समय पर करना, मोबाइल न देखना वगैरह। बच्चे को प्यार से समझाकर भी सही रास्ते पर लाया जा सकता है।

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