रात में सोने से पहले बच्चे से कराएं ये 4 लाइन की प्रार्थना, पॉजिटिविटी के साथ बढ़ेंगे आगे!
पेरेंटिंग कोच बताती हैं कि अगर बच्चे के दिन की शुरुआत प्यार से हो और रात उम्मीद के साथ खत्म हो, तो उसका मन मजबूत बनता है। एक छोटी-सी रात की प्रार्थना बच्चे को यह सिखा सकती है कि वह अकेला नहीं है, उसकी भावनाएँ सही हैं और गलतियाँ उसे छोटा नहीं बनातीं।

आज की जीवनशैली में पलने-बढ़ने वाले बच्चे कई तरह की इमोशनल भावनाओं से गुजरते हैं। कभी खुशी, कभी डर, कभी उलझन। ऐसे में उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत होती है भरोसे, अपनेपन और उम्मीद की। पेरेंटिंग कोच अंबिका अग्रवाल बताती हैं कि अगर बच्चे के दिन की शुरुआत प्यार से हो और रात उम्मीद के साथ खत्म हो, तो उसका मन मजबूत बनता है। एक छोटी-सी रात की प्रार्थना बच्चे को यह सिखा सकती है कि वह अकेला नहीं है, उसकी भावनाएँ सही हैं और गलतियाँ उसे छोटा नहीं बनातीं। उन्होनें एक ऐसी प्रेयर बताई है, जिससे बच्चा भीतर से मजबूत बनेगा और जीवन की राह में दृढ़ता से आगे बढ़ सकेगा।
1) "Hold my hand and help me choose courage over fear."
"हे भगवान, मेरा हाथ पकड़ो और मुझे डर की जगह हिम्मत चुनना सिखाओ।"
इसका अर्थ है कि बच्चा खुद को अकेला न महसूस करे। उसे आपसे यह भरोसा मिले कि कोई उसका हाथ थामे हुए है। जब बच्चा डर की जगह हिम्मत चुनना सीखता है, तो वह नई चीजें आजमाने लगता है और अपनी गलतियों से सीखना शुरू कर देता है।
2) "Open my heart to choose peace over anger"
"मेरे हृदय को खोलो ताकि मैं गुस्से की जगह शांति को अपना सकूँ।"
यह पंक्ति बच्चे को अपने गुस्से और चिड़चिड़ेपन को समझना सिखाती है। प्रेयर की इस लाइन से बच्चा यह सीखता है कि हर स्थिति में शांत रहना पॉसिबल है, अगर गुस्से को कंट्रोल किया जाए। इससे धीरे-धीरे बच्चा अपने दिमाग को शांत रखना और दूसरों की भावनाओं को समझना सीख जायेगा।
3) "Protect the people I love, near or far."
"जिन लोगों से मैं प्यार करता/करती हूँ, चाहे वे पास हों या दूर, सबकी रक्षा करना।"
इस पंक्ति के जरिए बच्चा अपने परिवार और प्रियजनों के लिए प्रेम और चिंता महसूस करता है। इस लाइन के जरिए आप बच्चे के अंदर अपनापन और अपना के प्रति जुड़ाव बढ़ा सकती है, चाहे फिर वो लोग पास हों या दूर।
4) "Every blessing big or small, let me notice and smile."
"मेरी जिंदगी की हर छोटी-बड़ी अच्छी चीज मुझे दिखे और मैं उसे देखकर मुस्कुरा सकूँ।"
यह पंक्ति बच्चे को छोटी-छोटी खुशियों की कद्र करना सिखाती है। अंबिका अग्रवाल कहती हैं कि जब बच्चा रोज अच्छी बातों को नोटिस करता है तो उसके अंदर पॉजिटिविटी आती है और उसके अंदर सेटिस्फेक्शन की भावना आती है।
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