Quotes of the day: जीवन में खुश रहना है तो जरूर पढ़ें प्रेमानंद जी महाराज के ये 7 विचार, आसान हो जाएगी लाइफ!
Quotes of the day: प्रेमानंद जी महाराज ने जीवन को बेहतर तरीके से समझने और जीने के कुछ सूत्र साझा किए हैं, जो यदि अपना लिए जाएं तो लाइफ बहुत हद तक आसान और सुलझी हुई हो सकती है।

प्रेमानंद जी महाराज अपने सत्संग में जीवन से जुड़ी कई बातें साझा करते हैं। आध्यात्म से जोड़ने के साथ-साथ उनके प्रवचन गृहस्थ जीवन, रिश्ते और रोजमर्रा से जुड़ी कई प्रश्नों को हल कर देते हैं, जो आमतौर पर लोगों को काफी परेशान करते हैं। प्रेमानंद जी महाराज के अनुसार कोई भी बदलाव सबसे पहले स्वयं से शुरू होता है। चीजों से बहुत अधिक जुड़ाव रखना, गुस्सा, घृणा, जलन कहीं ना कहीं ये सभी इमोशन ही सारे दुख की जड़ हैं। इन्हें खत्म करना एकदम से मुमकिन ना हो लेकिन आप इन्हें बेहतर ढंग से कंट्रोल जरूर कर सकते हैं। उन्होंने जीवन को बेहतर तरीके से समझने और जीने के कुछ सूत्र साझा किए हैं, जो यदि अपना लिए जाएं तो लाइफ बहुत हद तक आसान और सुलझी हुई हो सकती है।
1) भविष्य के बारे में सोचना है दुख की जड़
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि लोग ज्यादा दुखी इसलिए भी रहते हैं, क्योंकि उनका सारा ध्यान केवल अपने भविष्य पर होता है। क्या होगा, कैसे होगा, जैसी बातें सोचकर वो अक्सर खुद को परेशान करते हैं। जबकि जो होगा वो ईश्वर की इच्छा से होगा और वर्तमान में किए गए आपके कर्मों से होगा। इसलिए वर्तमान को सुधारें और भविष्य को ईश्वर के हाथों में छोड़ दें।
2) दूसरों के सुख में ढूंढे अपना सुख
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि अगर आप दूसरों के दुख में सुखी हो जाते हैं, तो याद रखिए स्थायी सफलता और आंतरिक खुशी आपको कभी नहीं मिलगी। खुद को वास्तव में सफल और सुखी बनाना है तो दूसरों के सुख में अपना सुख ढूंढने की कोशिश करें।
3) खुद पर ध्यान दें जगत पर नहीं
प्रेमानंद जी महाराज अक्सर अपने सत्संग में कहते हैं कि कौन क्या कर रहा है, इसपर ध्यान देने की जरूरत नहीं है। केवल आपको सुधरना है, ये ध्यान रखें। असली बदलाव खुद से शुरू होते हैं। जब आप बदलते हैं, तो बाकी लोग अपने आप ही आप से प्रेरित होते हैं।
4) सत्य की राह पर निंदा भी मिले तो स्वीकारें
महाराज जी के अनुसार मनुष्य जीवन का सबसे बड़ा उद्देश्य और कर्तव्य है, सत्य की राह पर चलना। ये मार्ग आसान नहीं है। कई बार निंदा का सामना भी करना पड़ सकता है, लेकिन आपको घबराना नहीं है। सत्य के मार्ग पर बने रहना है, बेशक यहां आपको फायदे या प्रशंसा से समझौता करना पड़ रहा हो।
5) लोगों से उम्मीदें कम रखें
दूसरों से उम्मीदें रखना ही मानसिक दुख और पीड़ा का कारण बनता है। प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं मनुष्य का प्रेम सीमित है, आज नहीं तो कल आपको महसूस होगा कि को उम्मीदें आपने दूसरों से रखी थीं, वो पूरी हो ही नहीं पाईं। इसलिए ईश्वर से प्रेम करें और दूसरों के लिए जो भी कर रहे हैं, उसमें कुछ पाने की उम्मीद ना करें।
6) चरित्र है सबसे अनमोल
प्रेमानंद जी महाराज कहते हैं कि जिस मनुष्य का चरित्र ठीक नहीं है, वह कभी भी सुखी नहीं हो सकता। इसलिए सबसे जरूरी है कि चरित्रवान बनें। रोजाना आपके व्यक्तित्व में कुछ ऐसा शामिल करें, जिससे आपका चरित्र और मजबूत, और बेहतर बने।
7) क्रोध और अहंकार को त्यागना है सच्ची साधना
अपने क्रोध और अहंकार को त्याग देना ही सच्ची साधना है। क्रोध आपके समस्त मंगल कर्मों का नाश कर देता है, वहीं अहंकार आपको केवल पीछे की तरफ ले जाता है।
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