प्रोस्टेट कैंसर के बाद यौन स्वास्थ्य और मूत्र संबंधी समस्याओं को ऐसे रखें कंट्रोल, जानें क्या है डॉक्टर की सलाह
डॉ. पुनीत अहलूवालिया कहते हैं कि इन परेशानियों में सबसे अहम चिंताएं यौन स्वास्थ्य और मूत्र नियंत्रण से जुड़ी हुई होती हैं। ये समस्याएं शारीरिक आराम, मानसिक संतुलन और रिश्तों पर असर डाल सकती हैं।

प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाले सबसे आम कैंसरों में से एक है। समय पर जांच और इलाज में हुई प्रगति से आज मरीजों की जीवन-अवधि काफी बेहतर हो गई है। लेकिन इलाज के बाद कई पुरुषों को लंबे समय तक कुछ दुष्प्रभावों का सामना करना पड़ता है, जो उनके रोजमर्रा के जीवन को प्रभावित करते हैं। मेदांता (गुरुग्राम) के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. पुनीत अहलूवालिया कहते हैं कि इन परेशानियों में सबसे अहम चिंताएं यौन स्वास्थ्य और मूत्र नियंत्रण से जुड़ी हुई होती हैं। ये समस्याएं शारीरिक आराम, मानसिक संतुलन और रिश्तों पर असर डाल सकती हैं। इन चुनौतियों को समझना और उनका सही प्रबंधन करना, प्रोस्टेट कैंसर के बाद अच्छे जीवन के लिए बहुत जरूरी है।
प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के बाद यौन स्वास्थ्य से जुड़ी आम समस्याएं
इरेक्टाइल डिसफंक्शन (ईडी)- सर्जरी, रेडिएशन या हार्मोन थेरेपी से उन नसों और रक्त वाहिकाओं को नुकसान पहुंच सकता है, जो इरेक्शन के लिए जरूरी होती हैं।
यौन इच्छा में कमी- हार्मोन थेरेपी से टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम हो सकता है, जिससे यौन इच्छा कम हो जाती है।
प्रबंधन के तरीके
रोबोटिक सर्जरी के दौरान आधुनिक नर्व-स्पेरिंग तकनीकें नसों और रक्त वाहिकाओं को बचाने में मदद करती हैं और सही मरीजों में काफी हद तक इरेक्टाइल फंक्शन बनाए रखने में सहायक होती हैं।
दवाएं- कई बार इलाज करने वाले डॉक्टर इरेक्शन और यौन गतिविधि सुधारने के लिए विशेष दवाएं लिखते हैं। कभी-कभी, जिन पुरुषों में दवाएं असर नहीं करतीं, उनके लिए वैक्यूम इरेक्शन डिवाइस या पेनाइल इम्प्लांट प्रभावी विकल्प हो सकते हैं।
काउंसलिंग- यौन स्वास्थ्य विशेषज्ञ और काउंसलर, मरीज और उनके साथी को बदलावों के साथ तालमेल बिठाने में मदद कर सकते हैं।
जीवनशैली- नियमित व्यायाम, संतुलित आहार और तनाव कम लेना, कुल मिलाकर यौन स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है।
प्रोस्टेट कैंसर के इलाज के बाद मूत्र संबंधी समस्याएं
इनकॉन्टिनेंस- खासकर सर्जरी के बाद, पेशाब का अपने-आप निकल जाना एक आम समस्या है।
बार-बार पेशाब आना- रेडिएशन थेरेपी से मूत्राशय में जलन हो सकती है, जिससे बार-बार पेशाब आने की इच्छा होती है।
नॉक्टूरिया- रात में कई बार पेशाब के लिए उठना, नींद और जीवन की गुणवत्ता को प्रभावित करता है।
प्रबंधन के तरीके
पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज : केगल एक्सरसाइज के जरिए पेल्विक मांसपेशियों को मजबूत बनाकर पेशाब पर नियंत्रण बेहतर होता है।
दवाएं : कुछ दवाएं मूत्राशय की मांसपेशियों को शांत करके तुरंत पेशाब लगने और बार-बार पेशाब आने की समस्या कम करती हैं।
सर्जरी के विकल्प: गंभीर मामलों में स्लिंग सर्जरी या आर्टिफिशियल यूरिनरी स्फिंक्टर जैसे ऑपरेशन की सलाह दी जा सकती है।
जीवनशैली में बदलाव: कैफीन और शराब कम करना, पर्याप्त पानी पीना और स्वस्थ वजन बनाए रखना लक्षणों को कम करने में मदद करता है।
डॉक्टर की सलाह- प्रोस्टेट कैंसर से बच जाना एक बड़ी जीत है, लेकिन इलाज के साथ ही सफर खत्म नहीं होता। सही मेडिकल इलाज, जीवनशैली में बदलाव और भावनात्मक सहयोग के जरिए पुरुष इन बदलावों के साथ तालमेल बिठा सकते हैं और एक संतोषजनक जीवन जी सकते हैं। जिसके लिए सबसे जरूरी है कि लक्षणों की जल्दी पहचान, समय पर प्रबंधन और डॉक्टरों से खुलकर बात करना।
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