गर्मियों के इन 2 महीने आप तो नहीं पीते गन्ने का जूस? योगाचार्य ने दी सीधी चेतावनी! Why you should avoid drinking Sugarcane juice During March April Yoga expert shares insight, हेल्थ टिप्स - Hindustan
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गर्मियों के इन 2 महीने आप तो नहीं पीते गन्ने का जूस? योगाचार्य ने दी सीधी चेतावनी!

Sugarcane juice: क्या आप जानते हैं कि गर्मियों के दो महीने ऐसी भी हैं, जिनमें गन्ने का जूस बिल्कुल भी नहीं पीना चाहिए? आयुर्वेद में इसके कई कारण बताए गए हैं और इन दो महीने बिल्कुल भी गन्ने के जूस का सेवन ना करने की सलाह दी गई है।

Wed, 18 March 2026 09:28 AMAnmol Chauhan लाइव हिन्दुस्तान
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गर्मियों के इन 2 महीने आप तो नहीं पीते गन्ने का जूस? योगाचार्य ने दी सीधी चेतावनी!

गर्मियां शुरू होते ही कुछ ठंडा-ठंडा पीने की क्रेविंग शुरू हो जाती है। ऐसे में सड़क किनारे मिलने वाला फ्रेश गन्ने का जूस लोगों का फेवरिट बन जाता है। इसका रिफ्रेशिंग टेस्ट तन और मन दोनों को ठंडा कर देता है। कुल मिलाकर कह सकते हैं कि ये कोल्ड ड्रिंक का एक हेल्दी और टेस्टी विकल्प है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि गर्मियों के दो महीने ऐसी भी हैं, जिनमें गन्ने का जूस बिल्कुल भी नहीं पीना चाहिए? जी हां, योगाचार्य उमंग त्यागी बताते हैं कि चैत्र मास यानी मार्च और अप्रैल के महीने में गन्ने का जूस भूलकर भी नहीं पीना चाहिए। आयुर्वेद में इसके कई कारण बताए गए हैं और इन दो महीने बिल्कुल भी गन्ने के जूस का सेवन ना करने की सलाह दी गई है। दरअसल इसके सेहत पर कई नकारात्मक प्रभाव पड़ सकते हैं। आइए विस्तार में जानते हैं।

चैत्र के महीने में गन्ने की गुणवत्ता होती है कमजोर

चैत्र के महीने में यानी मार्च और अप्रैल में गन्ने का जूस बिल्कुल भी नहीं पीना चाहिए। योगाचार्य कहते हैं कि इसके पीछे का एक कारण यह भी है कि मार्च और अप्रैल आते-आते गन्ना काफी पुराना हो जाता है। ऐसे में लंबे समय तक स्टोर रहने के कारण इसमें फर्मेंटेशन (खमीर उठने) की प्रक्रिया शुरू हो सकती है। ऐसे गन्ने से बना जूस सेहत के लिए काफी नुकसानदायक हो सकता है।

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शरीर में बढ़ता है कफ और पाचन पर असर पड़ता है

योग एक्सपर्ट बताते हैं कि मार्च-अप्रैल का समय मौसम बदलने का होता है, जब सर्दी से गर्मी की ओर ट्रांजिशन होता है। इस दौरान शरीर में कफ बढ़ने की समस्या ज्यादा रहती है। गन्ने का जूस स्वभाव से ठंडा और मीठा होता है, जो कफ की समस्या को और बढ़ा सकता है। इससे सर्दी-खांसी, आलस और गले में खराश जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इतना ही नहीं ये पाचन से जुड़ी समस्याएं जैसे एसिडिटी और स्किन इश्यूज को भी बढ़ावा दे सकता है।

मार्च-अप्रैल के महीने में ना खाएं ये चीजें

योगाचार्य बताते हैं कि गन्ने के जूस के अलावा आपको इन दो महीनों में ज्यादा फर्मेंटेड चीजें यानी खट्टी चीजें खाने से परहेज करना चाहिए। उदाहरण के लिए दही बहुत ज्यादा ना खाएं। इसके अलावा बहुत हेवी और तेलयुक्त भोजन खाने से भी परहेज करें। वरना ये पाचन से जुड़ी समस्याएं, आलस और स्किन इश्यूज का कारण बन सकता है।

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इन दो महीने कैसा रखें अपना भोजन?

आयुर्वेद के अनुसार आपको चैत्र माह यानी मार्च और अप्रैल में हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन खाना चाहिए। उदाहरण के लिए सत्तू, मूंग दाल और हरी सब्जियां। योगाचार्य इस दौरान खासतौर से नीम के पत्ते खाने की भी सलाह देते हैं। उनके मुताबिक ये समय बॉडी को डिटॉक्स करने का अच्छा समय होता है, ऐसे में नीम के पत्ते काफी फायदेमंद साबित हो सकते हैं।

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