दिमाग पर सुई की तरह चुभती हैं छोटी चीजें, जानें क्या है माइक्रो स्ट्रेस? न्यूरोलॉजिस्ट ने बताए निपटने के तरीके what is micro stress and how it affects your brain daily neurologist explains, हेल्थ टिप्स - Hindustan
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दिमाग पर सुई की तरह चुभती हैं छोटी चीजें, जानें क्या है माइक्रो स्ट्रेस? न्यूरोलॉजिस्ट ने बताए निपटने के तरीके

माइक्रो स्ट्रेस आजकल की डिजिटल दुनिया का नया जाल बन चुका है। सोशल मीडिया पर सभी को हंसते-घूमते देखने का स्ट्रेस, छोटी चीजों का तनाव दिमाग पर बुरा असर डालता है। चलिए इसके बारे में बताते हैं।

Tue, 3 Feb 2026 09:36 AMDeepali Srivastava लाइव हिन्दुस्तान
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दिमाग पर सुई की तरह चुभती हैं छोटी चीजें, जानें क्या है माइक्रो स्ट्रेस? न्यूरोलॉजिस्ट ने बताए निपटने के तरीके

कई बार ऐसा होता है कि हमें कोई समस्या नहीं होती, किसी भी बड़ी बात का दुख नहीं रहता, फिर भी मन दुखी हो जाता है। कुछ बातें सुई की तरह दिमाग में चुभती रहती है और इससे एक अजीब सा स्ट्रेस बना रहता है। इसके कारण थकान, चिड़चिड़ापन, बोझिल का महसूस होने लगता है। न किसी से लड़ाई-झगड़ा, न कोई प्रेशर फिर भी दिमाग पर तनाव की लंबी रेखाएं बनी हुई हैं, तो ये माइक्रो स्ट्रेस के लक्षण हो सकते हैं। दिल्ली के न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर अजय मित्तल ने इस बारे बताया। उनका कहना है कुछ लोग बड़ी चीजों की टेंशन लेते हैं, लेकिन कुछ लोगों के दिमाग में रोजमर्रा वाली टेंशन चलती रहती है और इसे माइक्रो स्ट्रेस कहते हैं।

क्या है माइक्रो स्ट्रेस?

माइक्रो स्ट्रेस का मतलब है छोटी चीजों से होने वाली टेंशन। जो देखने में काफी मामूली लगते हैं लेकिन इकट्ठा होकर हमारे दिमाग और शरीर को थका देते हैं। ये स्ट्रेस हमारी डेली लाइफ का हिस्सा बन जाते हैं और इससे दिमाग पर प्रेशर बना रहता है। ऐसा लगने लगता है कि ये चीजें नहीं की, तो काम बढ़ जाएगा।

किन छोटी चीजों का स्ट्रेस

- बार-बार मोबाइल पर नोटिफिकेशन आना।

- कई सारे मैसेज अनरीड होना।

- किसी को जरूरी कॉल या मैसेज करने का स्ट्रेस।

- रोजाना ऑफिस जाने के लिए क्या पहनें, कपड़े चुनने का स्ट्रेस।

- ऑफिस या घर में छोटी-मोटी होने वाली नोंक-झोंक।

- बिना ब्रेक के लगातार काम करना।

- ट्रैफिक में फंसने का तनाव।

- छोटी बातों को ज्यादा सोचते रहना।

मेंटल स्ट्रेस कैसे बढ़ता है

इन छोटी चीजों की वजह से दिमाग हमेशा अलर्ट और एक्टिव मोड में रहता है। इसकी वजह से दिमाग पर जोर पड़ता है और मेंटल स्ट्रेस हमेशा बना रहता है। इसके कारण कई चीजें और होने लगती हैं।

- नींद की कमी

- फोकस कम होना

- चिड़चिड़ापन और मूड स्विंग

- बिना वजह बेचैनी

- छोटी बातों से तनाव

स्वास्थ्य पर बुरा असर

दिमाग के साथ इन चीजों का असर आपके शरीर पर भी पड़ता है। ऐसे में शरीर में दर्द, मांसपेशियों में अकड़न, सिर, कंधे, गर्दन में दर्द, थकावट लगना, पेट से जुड़ी समस्या होने लगती है। कई बार लोग इसे शरीर में कमजोर समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन आप माइक्रो स्ट्रेस का शिकार हो सकते हैं।

निपटने के तरीके

माइक्रो स्ट्रेस से बचना चाहते हैं, तो कुछ टिप्स जरूर अपनाएं। इससे आपका दिमाग शांत रहेगा और तनाव कम हो जाएगा।

- जरूरी न हों तो नोटिफिकेशन बंद करें

- एक समय में एक ही काम करें

- हर काम के बीच 2–3 बार गहरी सांस लें

- काम और निजी जिंदगी की सीमा तय करें

- रोज 10 मिनट मोबाइल से दूर रहें

- कुछ चीजों के लिए ना कहना भी जरूरी

मेंटल हेल्थ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि आज के डिजिटल दौर में माइक्रो-स्ट्रेस मानसिक स्वास्थ्य के लिए एक साइलेंट खतरा बन चुका है। इससे निपटने के लिए आप किसी की मदद लें। यह खबर सामान्य जानकारियों पर आधारित है। किसी भी तरह की विशेष जानकारी के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ से उचित सलाह लें।

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