डॉक्टर बोलीं- मेरे घर में ‘बैन’ हैं ये 6 चीजें , लिस्ट में शामिल 1 चीज तो आप भी करते होंगे इस्तेमाल!
डॉ कोमल कुलकर्णी बताती हैं कि उन्होंने तो कुछ चीजों को अपने घर में लाने पर ही बैन लगा रखा है। ये आम से दिखने वाले प्रोडक्ट्स हैं जिनसे कोई खतरा महसूस नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल करने से सेहत पर नेगेटिव असर जरूर पड़ता है।

हेल्दी रहने के लिए सिर्फ अपने खानपान पर ही ध्यान देना काफी नहीं है। रोजमर्रा में आप किन चीजों का इस्तेमाल कर रहे हैं, ये भी काफी मायने रखता है। खासतौर से घर में उपयोग होने वाले प्रोडक्ट्स ही अगर टॉक्सिक हों, तो कितना भी सेहत का ध्यान रखो नुकसान तो होता ही है। इसी सिलसिले में जनरल फिजिशियन और डायबिटोलॉजिस्ट डॉ कोमल कुलकर्णी बताती हैं कि उन्होंने तो कुछ चीजों को अपने घर में लाने पर ही बैन लगा रखा है। ये आम से दिखने वाले प्रोडक्ट्स हैं जिनसे कोई खतरा महसूस नहीं होता, लेकिन लंबे समय तक इस्तेमाल करने से सेहत पर नेगेटिव असर जरूर पड़ता है। इनमें से कुछ चीजों को वो पूरी तरह अवॉइड करती हैं, वहीं कुछ चीजें समय के साथ जरूर बदल देती हैं। तो आइए जानते हैं वो प्रोडक्ट्स कौन-कौन से हैं, ताकि आप भी अपनी सेहत का ध्यान रख सकें।
पहला प्रोडक्ट है अगरबत्ती
कई घरों में रोज अगरबत्ती जलाना आम है। लेकिन डॉ कोमल बताती हैं कि उन्होंने अपने घर में अगरबत्ती लाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा रखा है। ऐसा इसलिए क्योंकि अगरबत्ती खुशबूदार होती हैं और इनसे निकलने वाला धुआं भी काफी टॉक्सिक होता है। इस धुएं की वजह से एलर्जी गंभीर हो सकती है और अस्थमा भी ट्रिगर हो सकता है।
घर में ओपन डस्टबिन अवॉइड करें
डॉक्टर कहती हैं कि घर में ओपन यानी खुला डस्टबिन रखना भी अवॉइड करना चाहिए। खुले कूड़ेदान से बैक्टीरिया और बदबू फैलने का खतरा होता है, जिससे घर का वातावरण प्रदूषित हो सकता है। ये अपनी तरफ जर्म्स भी अट्रैक्ट करता है। यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स हमेशा ढक्कन वाला डस्टबिन रखने की सलाह देते हैं।
किचन में इस्तेमाल होने वाला स्कॉच ब्राइट स्पंज
किचन में इस्तेमाल होने वाला स्कॉच ब्राइट स्पंज आपको साफ लग सकता है, लेकिन इसमें जर्म्स और बैक्टीरिया काफी जल्दी पनपते हैं। डॉ कोमल बताती हैं कि वो इसे अपने घर में अवॉइड ही करती हैं, क्योंकि ये हमेशा ही गीला रहता है जो कीटाणु पनपने के लिए बिल्कुल सही वातावरण है।
प्लास्टिक के कटिंग/चॉपिंग बोर्ड
डॉ कोमल बताती हैं कि वो प्लास्टिक का कटिंग (चॉपिंग) बोर्ड कभी भी इस्तेमाल नहीं करती हैं। इसकी वजह है कि बार-बार चाकू चलने से प्लास्टिक की सतह पर छोटे-छोटे कट बन जाते हैं। अगर इसे अच्छे से साफ ना किया जाए तो इसमें जर्म्स और बैक्टीरिया पनप सकते हैं। इसके अलावा खाने में माइक्रोप्लास्टिक जाने का खतरा भी रहता है।
घर से निकालें पुराना गंदा तकिया
कई घरों में तकिया सालों-सालों तक चेंज नहीं किया जाता है, जो कि सही नहीं है। समय के साथ तकिए में पसीना, धूल, डेड स्किन और बैक्टीरिया जमा हो सकते हैं, जो स्किन एलर्जी, पिंपल या साँस से जुड़ी समस्याओं की वजह बन सकते हैं। डॉक्टर सलाह देती हैं कि हर दो साल के बाद तकिया जरूर बदल देना चाहिए।
दो हफ्ते से ज्यादा एक ही पिलो कवर या बेडशीट इस्तेमाल करना
डॉ कोमल कहती हैं कि दो हफ्तों से ज्यादा एक ही पिलो कवर या बेडशीट का इस्तेमाल करना भी सही नहीं है। पसीने और धूल-मिट्टी के कारण इनमें जर्म्स और बैक्टीरिया पनपने लगते हैं, जिससे एलर्जी, फंगल इन्फेक्शन और अस्थमा ट्रिगर होने जैसी समस्याएं हो सकती हैं।
नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या मेडिकल कंडीशन से जुड़े सवालों के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।
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