डाइजेशन सुधारने के चक्कर में ना बिगाड़ लें सेहत, तांबे के बर्तन किसे नहीं पीना चाहिए पानी 6 types of people who should not drink copper infused water must know right way to drink in summer, हेल्थ टिप्स - Hindustan
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डाइजेशन सुधारने के चक्कर में ना बिगाड़ लें सेहत, तांबे के बर्तन किसे नहीं पीना चाहिए पानी

तांबे के बर्तन में रखा पानी डाइजेशन इंप्रूव करता है। शरीर में एंटीऑक्सीडेंट्स बढ़ाता है। लेकिन ध्यान रहे कुछ बीमारियों में और गर्मी के मौसम में तांबे के बर्तन में रखा पानी पीते समय सावधानी जरूरी है। इन 6 तरह के लोगों को भूलकर भी तांबे का पानी नहीं पीना चाहिए।

Fri, 10 April 2026 01:52 PMAparajita लाइव हिन्दुस्तान
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डाइजेशन सुधारने के चक्कर में ना बिगाड़ लें सेहत, तांबे के बर्तन किसे नहीं पीना चाहिए पानी

तांबे के बर्तन में रखा पानी पाचन के लिए फायदेमंद होता है। लेकिन डाइजेशन सुधारने के चक्कर में अपनी सेहत के साथ खिलवाड़ ना करें। भले ही आयुर्वेद में तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने की सलाह दी गई है। लेकिन कुछ खास तरह की बीमारियों से ग्रस्त लोगों को तांबे के बर्तन में पानी ना पीने की सलाह दी जाती है। नहीं ये पानी फायदा पहुंचाने की बजाय नुकसान कर सकता है।

तांबे के बर्तन में रखा पानी आयुर्वेद के अनुसार गर्म, कसैला और तिक्त गुण वाला बताया गया है। जो शरीर में पित्त और अग्नि को बढ़ाता है। इसलिए कुछ बीमारियों में तांबे के बर्तन में रखा पानी यानी ताम्रजल पीना हार्मफुल हो सकता है।

एक्सेस कॉपर करता है नुकसान

स्टडी के मुताबिक बॉडी में अगर कॉपर की मात्रा ज्यादा हो जाती है तो इससे ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस बढ़ता है, डाइजेशन असंतुलित होता है और शरीर में दूसरी बीमारियों को भी पैदा कर सकता है। इसलिए तांबे के बर्तन में रखा पानी कुछ बीमारियों में भूलकर भी नहीं पीना चाहिए।

डायबिटीज रोगी

डायबिटीज के पेशेंट को तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से बचना चाहिए। शरीर में हाई कॉपर लेवल ब्लड शुगर को इंबैलेंस कर देता है, ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को बढ़ाता है और ब्लड वेसल्स के डैमेज को बढ़ा सकता है।

किडनी के पेशेंट

जिन लोगों को किडनी से जुड़ी दिक्कतें रहती हो या पहले से किडनी से पेशेंट हैं तो उन्हें तांबे के बर्तन में रखा पानी नहीं पीना चाहिए। ज्यादा मात्रा में कॉपर किडनी पर लोड बढ़ा देता है जिससे कॉपर टॉक्सिसिटी का खतरा रहता है।

जिन लोगों को पित्त की समस्या है

आयुर्वेद में शरीर के तीन दोष बताए गए हैं। जिन लोगों के शरीर में पित्त ज्यादा होती है उन्हें एसिडिटी, अल्सर, त्वचा पर दाने जैसी समस्या होती है। तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से ऐसे लोगों को मुंह में छाले और शरीर में जलन की समस्या हो सकती है।

लिवर के पेशेंट को बचना चाहिए

जिन लोगों को लिवर से जुड़ी बीमारियां होती है उन्हें कॉपर इंफ्यूस्ड वाटर पीने से बचना चाहिए। लिवर की कऱाब स्थिति में मेटाबॉलिज्म तेजी से बिगड़ सकता है।

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छोटे बच्चों को

छोटे बच्चों का मेटाबॉलिज्म सेंसेटिव होता है। इसलिए बच्चों को तांबे के बर्तन में रखा पानी पिलाना ठीक नहीं। खासतौर पर डेली तो बिल्कुल भी नहीं पिलाना चाहिए।

कॉपर एलर्जी

वैसे तो ये काफी रेयर है लेकिन कुछ लोगों को तांबे से एलर्जी भी हो सकती है। जिसकी वजह से तांबे के बर्तन में पानी पीने से उन्हें उल्टी, मितली, पेट दर्द जैसी समस्या पैदा हो सकती है।

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तांबे के बर्तन में पानी पीने का सेफ तरीका

  • अगर आप तांबे के बर्तन में पी रहे तो इन बातों का जरूर ध्यान रखें
  • रोजाना ना लें, केवल सप्ताह में 2-3 बार ही पर्याप्त है।
  • 6-8 घंटे से ज्यादा तांबे के बर्तन में पानी ना रखें
  • आयुर्वेद के अनुसार तांबे के बर्तन में रखे पानी की तासीर गर्म होती है इसलिए गर्मियों में ज्यादा पीने से बचें। साथ ही पित्त बढ़ने पर बिल्कुल ना पिए।
  • किसी बीमारी से ग्रस्त हैं तो हमेशा डॉक्टर की सलाह पर ही तांबे के बर्तन में पानी पिएं।

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