मोटापा बढ़ा रही है रोजाना की 1 आदत, फिट एंड फाइन रहने के लिए आज ही करें बदलाव
हमारी आदतों का असर फिटनेस पर होता है। आपकी एक खराब आदत की वजह से हेल्थ को काफी नुकसान होता है। यहां हम मोटापा बढ़ाने वाली रोजाना की 1 आदत के बारे में बता रहे हैं, जिसे आपको आज ही बदलना चाहिए।

वजन या मोटापे का बढ़ना हमारी रोजाना की आदतों पर निर्भर करता है। कई बार कुछ आदतें सेहत को गंभीर नुकसान पहुंचा रही होती हैं लेकिन फिर भी लोग उन साइन्स को इग्नोर करते रहते हैं। हालांकि, सेहत से जुड़े कुछ साइन को कभी इग्नोर नहीं करना चाहिए क्योंकि ये धीरे-धीरे गंभीर रूप ले सकते हैं। इसके बढ़ने पर ये शरीर के लगभग हर अंग को प्रभावित करता है। जब शरीर में अतिरिक्त वसा जमा होती है, तो यह अंगों पर दबाव डालती है और शरीर में पुरानी सूजन पैदा करती है। इसका सबसे बड़ा खतरा दिल को होता है। इसके अलावा मोटापा शरीर की कोशिकाओं को इंसुलिन रेजिस्टेंट बना देता है। ऐसे में जब इंसुलिन सही से काम नहीं कर पाता, तो खून में ग्लूकोज का लेवल बढ़ जाता है, जो डायबिटीज का कारण बनता है। इस समस्या से बचने के लिए आपको अपनी आदतों पर गौर करना होगा। यहां प्रमाणित पोषण सलाहकार अनु भाटिया द्वारा बताई एक रोजाना की ऐसी आदत बता रहे हैं, जिसे तुरंत बदलना सही है।
पहले समझें कैसे बढ़ता है मोटापा
मोटापा बढ़ने की प्रक्रिया शरीर के एनर्जी बैलेंस से जुड़ी है। जब हमारे शरीर को मिलने वाली एनर्जी यानी कैलोरी उसके द्वारा खर्च की जाने वाली कैलोरी बर्न से ज्यादा हो जाती है, तो शरीर उस बची हुई एनर्जी को फैट के रूप में जमा करने लगता है और धीरे-धीरे चर्बी और वजन बढ़ जाता है।
रोजाना की किस आदत से बढ़ता है मोटापा
बहुत से लोग घर का खाना खाते हैं लेकिन फिर भी वह मोटे होते रहते हैं इसके पीछे की मुख्य वजह है टाइमिंग। अगर आप घर पर बनी दाल, सब्जी, रोटी को रात 10 बजे के बाद खाते हैं तो ये समस्या की वजह है। रोजाना देरी से डिनर करना न सिर्फ वजन बढ़ाता है बल्कि इससे शरीर में वजन जमा होने का तरीका भी बदल जाता है। जो महिलाएं रात में देरी से खाना खाती हैं उनमें बॉडी फैट ज्यादा होता है, खासतौर से पेट के आसपास।
क्यों होता है ऐसा
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि रात के समय मेटाबॉलिज्म कम हो जाता है, इंसुलिन सेंसटिविटी भी ड्रॉप हो जाती है और फैट बर्न करने की प्रक्रिया भी बंद हो जाती है। इसलिए जब आप रात में खाते हैं तो आपका शरीर फैट ज्यादा स्टोर करता है। दरअसल, सूरज ढलने के बाद कोर्टिसोल भी कम हो जाता है और मेलाटोनिन (स्लीप हार्मोन) बढ़ने लगता है। देरी से खाना खाने पर ये दोनों हार्मोन एक साथ फैट स्टोरेज का कारण बनते हैं।
क्या करें
बहुत से लोग टाइमिंग बदलने की जगह खाने की क्वांटिटी में बदलाव करते हैं। जबकि इससे कुछ नहीं होगा। रोजाना 7 से 7:30 के बीच में डिनर करने से फैट मेटाबॉलिज्म बेहतर होता है, स्लीप क्वालिटी में भी सुधार आता है और इंसुलिन प्रतिक्रिया भी बेहतर होती है।
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