सोना तो बाद में आया, पहले इस चीज से बनता था मंगलसूत्र! पढ़ें इसके पीछे का दिलचस्प इतिहास Mangal sutra The Beautiful History and Meaning Behind This Sacred Symbol, फैशन - Hindustan
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सोना तो बाद में आया, पहले इस चीज से बनता था मंगलसूत्र! पढ़ें इसके पीछे का दिलचस्प इतिहास

आज के समय में मंगलसूत्र के कई रूप देखने को मिलते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं, वैदिक काल में मंगलसूत्र का स्वरूप आज से बिल्कुल ही अलग था। आज जिसे लोग सोने और डिजाइन से जोड़कर देखते हैं, इसका असली महत्व इसकी कीमत में नहीं बल्कि इसके पीछे छिपे भाव में था।

Thu, 19 March 2026 05:34 PMAnmol Chauhan लाइव हिन्दुस्तान
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सोना तो बाद में आया, पहले इस चीज से बनता था मंगलसूत्र! पढ़ें इसके पीछे का दिलचस्प इतिहास

हिंदू धर्म में मंगलसूत्र सिर्फ एक गहना नहीं होता, बल्कि यह पति-पत्नी के रिश्ते का एक बहुत गहरा प्रतीक माना जाता है। शादी के समय जब दूल्हा दुल्हन के गले में मंगलसूत्र पहनाता है, तो वह पल केवल एक रस्म नहीं बल्कि एक नए जीवन की शुरुआत का संकेत होता है। आज के समय में मंगलसूत्र के कई रूप देखने को मिलते हैं। मार्केट में मंगलसूत्र के नए-नए डिजाइन अवेलेबल है। हर दुल्हन अपनी शादी में सुंदर से सुंदर मंगलसूत्र खरीदना पसंद करती है। लेकिन क्या आप जानते हैं, वैदिक काल में मंगलसूत्र का स्वरूप आज से बिल्कुल ही अलग था। आज जिसे लोग सोने और डिजाइन से जोड़कर देखते हैं, इसका असली महत्व इसकी कीमत में नहीं बल्कि इसके पीछे छिपे भाव में था। समय के साथ इसका रूप जरूर बदला है, लेकिन इसका मूल उद्देश्य रिश्ते की पवित्रता को दिखाना था। चलिए जानते हैं मंगलसूत्र का खूबसूरत इतिहास क्या है, और हिंदू धर्म में इसका क्या महत्व है।

वैदिक काल में मंगलसूत्र

पुराने समय में मंगलसूत्र आज की तरह सोने की भारी चेन नहीं होता था। वैदिक काल में यह एक साधारण सूती धागा हुआ करता था। इस धागे को हल्दी से रंगा जाता था क्योंकि हल्दी को शुद्ध और सुरक्षित माना जाता है। इस धागे को दुल्हन के गले में पहनाने का मतलब था कि अब दोनों एक दूसरे के जीवन से जुड़ गए हैं। इसका मकसद दिखावा नहीं बल्कि रिश्ते की सादगी और सच्चाई को दिखाना था। यह एक ऐसा प्रतीक था जो बताता था कि शादी का असली आधार विश्वास और साथ निभाने का वादा है।

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ब्लैक बीड्स और गोल्ड कैसे जुड़े

समय के साथ मंगलसूत्र का रूप बदलने लगा। बताया जाता है कि लगभग 6वीं सदी के बाद अरब ट्रेड के चलते इसमें काले मनकों (ब्लैक बीड्स) का प्रयोग शुरू हुआ। इन बीड्स को नजर से बचाने वाला प्रतीक माना जाने लगा। धीरे-धीरे इस साधारण धागे की जगह सोने की चेन ने ले ली। सोना समृद्धि का प्रतीक माना गया और काले मोती मंगलसूत्र का परमानेंट हिस्सा बन गए। इस बदलाव में परंपरा के साथ-साथ समाज की आर्थिक सोच भी जुड़ गई।

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अलग-अलग राज्यों में मंगलसूत्र के अलग रूप

भारत के अलग-अलग राज्यों में मंगलसूत्र के अलग रूप देखने को मिलते हैं। कहीं इसे थाली कहा जाता है, तो कहीं इसके डिजाइन अलग होते हैं। हर जगह इसका नाम और डिजाइन भले ही बदल गया है, लेकिन इसका अर्थ एक ही है- विवाह का अटूट बंधन।

मंगलसूत्र का असली महत्व क्या था

मंगलसूत्र को कभी भी किस्मत बदलने वाला ताबीज नहीं माना गया था। इसका असली मतलब दो लोगों के बीच के रिश्ते को मजबूत करना था। यह एक तरह से याद दिलाने वाला प्रतीक था कि शादी केवल एक रस्म नहीं बल्कि जिम्मेदारी है। इसका संदेश साफ था कि रिश्ते की मजबूती सोने से नहीं बल्कि आपसी सम्मान और साथ से आती है।

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आज के समय में लोग अक्सर मंगलसूत्र की कीमत और डिजाइन पर ज्यादा ध्यान देते हैं। लेकिन अगर इसके असली अर्थ को समझें तो यह हमें रिश्ते की अहमियत सिखाता है। जरूरी यह नहीं है कि मंगलसूत्र कितना महंगा है, बल्कि यह है कि क्या हम उस वचन को याद रखते हैं जिसके प्रतीक के रूप में इसे पहना जाता है। अगर हम इसके पीछे के भाव को समझ लें तो हम इस परंपरा को सही मायनों में सम्मान दे पाएंगे।

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