अनपढ़ आदिवासी महिला को मोहरा बनाकर बेची गई थी RIMS की जमीन, बड़ा खुलासा
एसीबी ने जांच में पाया है कि रिम्स की 60 डिसमिल जमीन को जमीन माफियाओं ने एक आदिवासी अनपढ़ महिला को मोहरा बना बेच दिया। साल 2015 में जमीन के दस्तावेज को ऑनलाइन किया जा रहा था।

रांची में रिम्स के द्वारा अधिग्रहित जमीन को बेचने में एसीबी की जांच में सनसनीखेज खुलासा हुआ है। एसीबी ने जांच में पाया है कि रिम्स की 60 डिसमिल जमीन को जमीन माफियाओं ने एक आदिवासी अनपढ़ महिला को मोहरा बना बेच दिया। साल 2015 में जमीन के दस्तावेज को ऑनलाइन किया जा रहा था, तब माफियाओं ने महिला का इस्तेमाल कर रजिस्टर 2 में नाम अंकित कराया। इसमें तब टाउन सीओ रहे अफसर ने भी अपने पद का दुरुपयोग कर जमीन माफियाओं को लाभ पहुंचाया।
दस्तावेज के मुताबिक, मौजा मोरहाबादी, खाता नंबर 107, प्लॉट नंबर 1963/1693 की कुल 93 डिसमिल जमीन थी, जिसे वर्ष 1947 में गजधर बड़ाइक से अब्दुल गफूर खान और फिर 1962 में बनारसी दास अरोड़ा ने खरीदा था। सरकार ने वर्ष 1968-69 (केस नंबर 01/68-69) में रिम्स के लिए बनारसी दास अरोड़ा को उचित मुआवजा देकर इसमें से 60 डिसमिल जमीन अधिग्रहित की थी।
फर्जी वंशावली और पावर ऑफ अटॉर्नी
साल 2015 में जब ऑनलाइन रिकॉर्ड चढ़ रहे थे, तब राजेश झा, मनोज बड़ाईक, चैतन कुमार, सोनू शरद और प्रमोद महतो जैसे भू-माफियाओं ने महिला को झांसा दिया कि उसे सिर्फ रजिस्ट्री ऑफिस आकर अंगूठा लगाना है। इसके बाद महिला से उसके कथित रिश्तेदार चैतन कुमार के नाम पर पावर ऑफ अटॉर्नी ले ली गई। एसएआर कोर्ट के केस में खुद को चिकबड़ाइक (आदिवासी) बताने वाली महिला को जमीन बेचने के लिए कागजों पर गैर-आदिवासी दिखा दिया गया, ताकि आसानी से बिना किसी कानूनी अड़चन के जमीन की खरीद-बिक्री हो सके।
माफिया डकार गए करोड़ों, मोहरे को मिले सिर्फ चंद रुपये
एसीबी की जांच और गवाहों के बयानों से साफ हुआ है कि इस करोड़ों रुपये के खेल के असली सूत्रधार राजेश झा और उसके साथी भू-माफिया ही थे। आरोपी राजेश झा की पत्नी मुन्नी कुमारी ने बीएनएसएस धारा 180 के तहत दर्ज बयान में कुबूल किया है कि वह जमीन के किसी लेनदेन के बारे में नहीं जानती थी, सारा खेल उसके पति राजेश झा ने रचा था। वहीं, जिस सोनमाईत देवी के नाम पर करोड़ों की सरकारी जमीन बेच दी गई, उसे जांच में पता चला कि माफियाओं ने उसे महज कुछ हजार देकर टरका दिया था। इस गहरी साजिश में अंचल कार्यालय से लेकर नगर निगम और रेरा तक के अधिकारियों की भूमिका की जांच अभी जारी है।
एसीबी ने भू-माफिया और अफसरों की मिलीभगत पकड़ी
एसीबी की जांच में यह बात सामने आई है कि किस तरह भू-माफियाओं और सरकारी अधिकारियों ने मिलकर एक गहरी आपराधिक साजिश रची। भू-माफिया ने सोनमाईत देवी नाम की एक अनपढ़ महिला को मोहरा बनाया। सोनमाईत ने खुद को खतियानी रैयत सहोदरी देवी का वंशज बताकर पहले कोर्ट (एसएआर कोर्ट) में जमीन बहाली का मुकदमा लड़ा था, जो 1992 में खारिज हो गया था, क्योंकि वह अपना संबंध सहोदरी देवी से साबित नहीं कर पाई थी। तब एसएआर कोर्ट ने आदेश दिया था कि असली वारिस मिलने तक जमीन अंचल अधिकारी (सीओ) के पास सरकारी संरक्षण में रहेगी। लेकिन माफियाओं ने अंचल कार्यालय के अधिकारियों के साथ साठगांठ कर रजिस्टर-2 में हेरफेर कराकर सोनमाईत देवी का नाम दर्ज करा दिया।
मल्टीस्टोरी बिल्डिंग और धार्मिक स्थल का सहारा
आरोपी राजेश झा ने पहले अपनी पत्नी मुन्नी कुमारी के नाम पर 11 डिसमिल जमीन लिखवाई और फिर डेवलपर मैसर्स लकी कन्वर्जेस के साथ मिलकर वहां एक बहुमंजिला इमारत खड़ी कर दी (जिसे बाद में ध्वस्त कर दिया गया)। इसके अलावा जनता के विरोध से बचने और जमीन पर अवैध कब्जे को सार्वजनिक स्वीकृति दिलाने के लिए वहां मंदिर और सरना स्थल भी चिन्हित कर दिए गए।
रिपोर्ट- अखिलेश सिंह




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