होर्मुज स्ट्रेट में फंसे मर्चेंट नेवी कैप्टन की मौत, पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार; शव लाने के लिए केंद्र सरकार से गुहार
परिवार का कहना है कि 28 फरवरी के बाद पश्चिम एशिया में बदलते हालात के चलते उनका जहाज होर्मुज स्ट्रेट में फंसा हुआ था। शव को सौंपने की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है, लेकिन ईद की तीन दिनों की छुट्टी की वजह से इसमें थोड़ी देरी हो रही है।

होर्मुज स्ट्रेट में फंसे भारतीय जहाज के कैप्टन राकेश रंजन का दिल का दौरा पड़ने से निधन हो गया है। परिजन केंद्र और राज्य सरकार से जल्द शव लाने की मांग कर रहे हैं। रांची के रहने वाले राकेश 2 फरवरी को प्राइवेट कंपनी के जहाज 'एएसपी अवाना- आरपीएसएल-एमयूएम-172' में सवार हुए थे। परिवार के मुताबिक दिल का दौरा पड़ने से राकेश रंजन का निधन 18 मार्च को हुआ।
परिवार का कहना है कि 28 फरवरी के बाद पश्चिम एशिया में बदलते हालात के चलते उनका जहाज होर्मुज स्ट्रेट में फंसा हुआ था। उनके बड़े भाई उमेश सिंह ने कहा, ‘मैं मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अनुरोध करता हूं कि वे मेरे भाई के शव को जल्द से जल्द वापस लाने में मदद करें। कंपनी को भी उनके बकाया पैसे और कंपनी की ओर से मिलने वाले अन्य लाभ को बिना किसी रुकावट के रिलीज कर देना चाहिए। मैं सरकार से आग्रह करता हूं कि वे इस मामले की निगरानी करें।’
बेहोश होने के बाद अपनी कुर्सी से गिर गए थे
उन्होंने आगे कहा कि ‘मैं केंद्र सरकार, दुबई स्थित भारतीय दूतावास और कंपनी से आग्रह करता हूं कि वे मेरे भाई का शव जल्द से जल्द हमें सौंप दें। मैंने इस संबंध में सीएम हेमंत सोरेन और रांची के सांसद संजय सेठ को पत्र भी लिखा है। मेरे छोटे भाई जहाज में बतौर कैप्टन अपनी सेवाएं दे रहे थे। 18 मार्च को कंपनी ने हमें सूचित किया कि वे बेहोश होने के बाद अपनी कुर्सी से गिर गए थे और इसके बाद उन्हें मेडिकल मदद दी गई। हालांकि एयरलिफ्ट करने की इजाजत नहीं थी तो ऐसे में उन्हें दुबई के पोर्ट राशिद लेकर जाया गया जहां उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। सिंह के मुताबिक बताया जा रहा है कि दिल का दौरा पड़ने से उनकी मौत हुई है।’
पोर्ट राशिद के मुर्दाघर में पुलिस की निगरानी में शव
मृतक कैप्टन के भाई ने बताया कि 'परिवार अब पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार कर रहा है, जिससे रंजन की मौत की सटीक वजह का पता लग सकेगा। फिलहाल शव को पोर्ट राशिद के मुर्दाघर में पुलिस की निगरानी में रखा गया है। सिंह ने आगे बताया कि उनका परिवार मूल रूप से बिहार के नालंदा जिले (बिहार शरीफ) का रहने वाला है, लेकिन रंजन पिछले करीब 20 सालों से अपनी पत्नी और दो बच्चों के साथ रांची में रह रहे थे।
ईद की तीन दिनों की छुट्टी की वजह से देरी
उन्होंने यह भी बताया कि बुधवार को कंपनी के कुछ लोग परिवार से मिलने आए थे। उन्होंने भरोसा दिलाया है कि शव को सौंपने की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है, लेकिन ईद की तीन दिनों की छुट्टी की वजह से इसमें थोड़ी देरी हो रही है।
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