शिक्षक पात्रता परीक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करने की मांग
रांची में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेताओं ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में अंगिका, मगही और भोजपुरी भाषाओं को शामिल करने की मांग की। उन्होंने कहा कि 2012 और 2016 में ये भाषाएं शामिल थीं, लेकिन 10 वर्षों बाद आयोजित परीक्षा से इन्हें हटाना अन्याय है। कांग्रेस नेता सरकार के मंत्रियों से इस मुद्दे पर मुलाकात करेंगे।

रांची, हिन्दुस्तान ब्यूरो। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के वरिष्ठ नेताओं आलोक दूबे, राजीव रंजन प्रसाद, लाल किशोर नाथ शाहदेव, डॉ. राजेश गुप्ता, शशिभूषण राय, निरंजन पासवान और आदित्य विक्रम जयसवाल ने शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) में क्षेत्रीय भाषाओं को शामिल करने को लेकर बैठक की। बैठक में राज्य सरकार से अंगिका, मगही और भोजपुरी भाषाओं को पुनः परीक्षा में शामिल करने की मांग की गई। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वर्ष 2012 और 2016 में आयोजित शिक्षक पात्रता परीक्षा में क्षेत्रीय भाषाओं की सूची में अंगिका, मगही और भोजपुरी शामिल थीं। ऐसे में 10 वर्षों बाद आयोजित हो रही परीक्षा से इन भाषाओं को हटाया जाना समझ से परे है।
नेताओं ने कहा कि पलामू प्रमंडल, संथाल परगना, बोकारो, धनबाद, कोडरमा, चतरा सहित अन्य जिलों में विभिन्न क्षेत्रीय भाषाएं बोली जाती हैं। इन भाषाओं की अनदेखी करना स्थानीय अभ्यर्थियों के साथ अन्याय है। कांग्रेस नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे इस मुद्दे को गंभीरता से उठाते हुए गठबंधन सरकार के मंत्रियों से मुलाकात करेंगे और क्षेत्रीय भाषाओं को पुनः शामिल करने की मांग को मजबूती से रखेंगे।
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