झारखंड के 68% बच्चों में खून की कमी, एनीमिया नियंत्रण सुस्त; सभी सिविल सर्जनों को सुधार का निर्देश
एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत क्वार्टरली अभियान चलाकर पांच समूहों को आईएफए (आयरन, फोलिक एसिड) की खुराक दी जाती है। इन समूहों में पांच साल तक के बच्चे, 05-09 साल तक के बच्चे, 10-19 साल के किशोर, गर्भवती महिलाएं एवं धात्रि महिलाएं शामिल हैं।

झारखंड में पांच वर्ष से कम ऊम्र के लगभग 68 प्रतिशत बच्चे एनीमिया के शिकार हैं। यानी इन बच्चों के शरीर में खून का स्तर 11 जी/डीएल से कम है। एनएफएचएस 5 के अनुसार इन बच्चों में 31.9 प्रतिशत बच्चे ऐसे हैं, जिनके शरीर में खून का स्तर 10 से 11, जबकि 34.3 प्रतिशत बच्चों में 7 से 10 एवं 1.2 प्रतिशत बच्चों में तो खून का स्तर 7 जी/डीएल से भी कम है। बावजूद इसके राज्य में एनीमिया नियंत्रण के लिए चलाया जाने वाला आईएफए संपूरण अभियान की स्थिति लचर है।
इसका खुलासा जिलों में संचालित एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के परफॉरमेंस इंडिकेटर्स पर आधारित स्कोर कार्ड से हुआ है। बता दें कि एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम के तहत क्वार्टरली अभियान चलाकर पांच समूहों को आईएफए (आयरन, फोलिक एसिड) की खुराक दी जाती है। इन समूहों में पांच साल तक के बच्चे, 05-09 साल तक के बच्चे, 10-19 साल के किशोर, गर्भवती महिलाएं एवं धात्रि महिलाएं शामिल हैं। सरकार की ओर से अभियान चलाकर सभी को आईएफए की खुराक हर क्वार्टर में दी जानी है।
बीते साल जून से दिसंबर तक के दो क्वार्टर
स्कोर कार्ड से पता चला है कि बीते साल जून से दिसंबर तक के दो क्वार्टर में छह माह से पांच साल तक के लगभग 63% बच्चों को, पांच से नौ साल तक के 67.5% बच्चों को, 10-19 साल के लगभग 83.5% किशोर, 98% गर्भवती महिलाएं एवं 65.2% धातृ महिलाओं को ही आईएफए की खुराक दी गई। अलग-अलग क्वार्टर की बात करें तो बीते वर्ष 2025 के दिसंबर तक में पांच साल तक के 66% बच्चों को, पांच से नौ साल तक के 70% बच्चों को, 10-19 साल के 86% किशोर, 99% गर्भवती महिलाएं एवं 69% धातृ महिलाओं को ही आईएफए की खुराक दी गयी।

लक्ष्य हासिल नहीं हो सका
ये कोई पहली बार नहीं है कि कार्यक्रम में लक्ष्य हासिल नहीं हो सका है। इससे पहले वित्तीय वर्ष 2025-26 के पहले क्वार्टर (मार्च-जून) में 05 वर्ष तक के महज 58% एवं 05-09 वर्ष तक के 59% बच्चों को, 10-19 साल के 74% किशोर, 98% गर्भवती एवं महज 53% धात्रि महिलाओं को ही आईएफए की खुराक दी गयी है। बीते वित्तीय वर्ष 2024-25 के लास्ट क्वार्टर में भी जिलों में लक्ष्य प्राप्त नहीं किया जा सका था। यह उपलब्धित तब है, जब कई सीएचसी ने आंकड़ों के हेरफेर से उपलब्धि का प्रतिशत 100 से भी ज्यादा दर्शाया है।
सभी सिविल सर्जनों को सुधार का निर्देश
एनीमिया मुक्त भारत कार्यक्रम में बरती जा रही शिथिलता को लेकर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के राज्य नोडल पदाधिकारी, शिशु स्वास्थ्य कोषांग ने राज्य के सभी सिविल सर्जन को पत्र जारी किया है। जिसमें उन्होंने स्कोर कार्ड एवं प्रदर्शन रैंकिंग की प्रति संलग्न करते हुए जिला स्तर एवं प्रखंड स्तर पर स्वास्थ्य विभाग, समाज कल्याण विभाग एवं स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के समन्वय से आईएफए संपूरण की स्थिति में सुधार करने का अनुरोध किया है।
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