महिला आरक्षण विधेयक पर विपक्ष घिरा
लातेहार में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी बनाने के लिए सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों पर महिला विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया गया है। यह विधेयक महिलाओं को 33% आरक्षण देने का प्रस्ताव है, लेकिन विपक्ष ने समर्थन नहीं किया। सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है।

लातेहार, संवाददाता। लोकसभा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम को प्रभावी बनाने के लिए संविधान संशोधन विधेयक पर सियासत तेज हो गई है। इस मुद्दे पर जारी प्रेस विज्ञप्ति में कांग्रेस और झारखंड मुक्ति मोर्चा सहित विपक्षी दलों पर महिला विरोधी रवैया अपनाने का आरोप लगाया गया है। कहा गया है कि यह विधेयक लोकसभा और विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल थी। इससे महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को मजबूती मिलती, लेकिन विपक्षी दलों ने इसका समर्थन नहीं कर इस प्रयास को झटका दिया। इसे देश की आधी आबादी की आकांक्षाओं के प्रति उदासीनता बताया गया है।
देवेश तिवारी, सदस्य, राज्य स्तरीय दिशा समिति (ग्रामीण विकास मंत्रालय) ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार ने सभी दलों से दलगत राजनीति से ऊपर उठकर इस विधेयक का समर्थन करने की अपील की थी। इसके बावजूद कांग्रेस, डीएमके, टीएमसी, समाजवादी पार्टी और झामुमो ने सहयोग नहीं किया। विज्ञप्ति में झामुमो पर निशाना साधते हुए कहा गया है कि राज्य में मईया योजना के माध्यम से महिला सम्मान की बात करने वाली पार्टी ने ही संसद में महिलाओं के प्रतिनिधित्व बढ़ाने वाले बिल का विरोध कर अपना दोहरा चरित्र उजागर किया है। ऐसे संवेदनशील मुद्दे पर सभी दलों को एकजुट होकर सकारात्मक भूमिका निभानी चाहिए थी। आगे बताया कि विपक्ष के इस रुख से उनकी कथनी और करनी में अंतर साफ नजर आता है। हालांकि, बिल पारित नहीं हो सका, लेकिन एनडीए सरकार महिला सशक्तिकरण के लिए अपनी प्रतिबद्धता पर कायम है और इस दिशा में आगे भी प्रयास जारी रहेंगे।
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