माओवादी ने लेवी के पैसे से बेटी का मेडिकल में कराया था दाखिला, झारखंड में टेरर फंडिंग का खुलासा
एनआईए ने देश विरोधी गतिविधियों और टेरर फंडिंग को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। एनआईए की जांच के मुताबिक, प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन भाकपा माओवादी द्वारा जबरन वसूली और लेवी के जरिए जुटाए गए काले धन का इस्तेमाल देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में ट्यूशन फीस के भुगतान के लिए किया गया था।

एनआईए ने देश विरोधी गतिविधियों और टेरर फंडिंग को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला खुलासा किया है। एनआईए की जांच के मुताबिक, प्रतिबंधित उग्रवादी संगठन भाकपा माओवादी द्वारा जबरन वसूली और लेवी के जरिए जुटाए गए काले धन का इस्तेमाल देश के प्रतिष्ठित मेडिकल कॉलेज में ट्यूशन फीस के भुगतान के लिए किया गया था।
जांच में यह बात सामने आयी है कि चेन्नई के मेडिकल कॉलेज में एडमिशन के लिए ₹1.22 करोड़ की फंडिंग बिहार-झारखंड के स्पेशल एरिया कमेटी सदस्य प्रद्युम्न शर्मा के द्वारा की गई थी। प्रद्युम्न शर्मा के दत्तक पुत्र तरुण कुमार ने अपनी बहन पूजा कुमारी का एडमिशन तमिलनाडु के प्रतिष्ठित चेट्टिनाद मेडिकल कॉलेज एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में कराया था। एमबीबीएस (सत्र 2017-22) की पढ़ाई और इंटर्नशिप के लिए कॉलेज को कुल ₹1.22 करोड़ रुपये की भारी-भरकम फीस का भुगतान किया गया था। हाईकोर्ट में दिए एक हलफनामे में एजेंसी ने बताया है कि कॉलेज को भुगतान की गई रकम में से ₹1,13,70,500 (करीब 1.13 करोड़ रुपये) को फ्रीज कर दिया है।
लेवी के नेटवर्क में तरुण अहम कड़ी
मगध क्षेत्र में भाकपा माओवादी संगठन को फिर से मजबूत करने के केस में प्रद्युम्न शर्मा का दत्तक पुत्र तरुण कुमार अहम कड़ी है। बिहार और झारखंड के मगध जोन में माओवादियों और अन्य हितधारकों के बीच एक मुख्य कड़ी के रूप में काम कर रहा था। वह ठेकेदारों और कंस्ट्रक्शन कंपनियों से लेवी वसूलने के लिए धमकी भरे पत्र लिखता था। एनआईए के प्रोटेक्टेड विटनेस के बयानों के मुताबिक, उन्हें वीओआईपी कॉल और व्हाट्सऐप पर धमकियां देकर बिहटा (पटना, बिहार) स्थित आईडीबीआई बैंक के एक खाते में पैसे ट्रांसफर करने को कहा गया था। यह खाता नीतू देवी नामक महिला का था, जो केस में आरोपी चंदन कुमार की पत्नी है। चंदन को भी बीते दिनों मुंबई से एनआईए ने गिरफ्तार किया था। ठेकेदार जो बाद में एनआईए के गवाह बने, उन्होंने बताया है कि डर के मारे इस खाते में लाखों रुपये ट्रांसफर किए। एक गवाह ने पकड़े जाने के डर से झारखंड के कोडरमा स्थित आईडीबीआई बैंक से यूपीआई और अन्य माध्यमों से छोटे-छोटे टुकड़ों में करीब ₹6.40 लाख ट्रांसफर किए थे।
हैंडराइटिंग और ऑडियो का हुआ मिलान
एनआईए ने आरोपियों के घर से रंगदारी से जुड़े पत्र और डायरी बरामद की थी। वहीं, ठेकेदारों के मोबाइल से वॉयस क्लिप्स भी मिले थे, जिसमें उन्हें रंगदारी के लिए ऑडियो मैसेज भेजे गए थे। दिल्ली और कोलकाता की सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की रिपोर्ट में यह साबित हो चुका है कि जबरन वसूली के लिए लिखे गए पत्रों में हैंडराइटिंग आरोपी तरुण कुमार की ही थी और वॉयस क्लिप्स में आवाज सह-आरोपी प्रद्युम्न शर्मा व अन्य की थी।




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