Jharkhand HC directs Centre and state to formulate SOP for accessing Aadhaar card details by police आधार कार्ड की जानकारी के लिए एसओपी तैयार करें, झारखंड HC का केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश, Jharkhand Hindi News - Hindustan
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आधार कार्ड की जानकारी के लिए एसओपी तैयार करें, झारखंड HC का केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश

झारखंड हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को पीड़ितों के आधार कार्ड की जानकारी प्राप्त करने के संबंध में एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट की पीठ एक नाबालिग लड़की से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

Thu, 12 Feb 2026 10:55 PMSubodh Kumar Mishra पीटीआई, रांची
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आधार कार्ड की जानकारी के लिए एसओपी तैयार करें, झारखंड HC का केंद्र और राज्य सरकारों को निर्देश

झारखंड हाई कोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकारों को पीड़ितों के आधार कार्ड की जानकारी प्राप्त करने के संबंध में एक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) तैयार करने का निर्देश दिया। हाई कोर्ट की पीठ एक नाबालिग लड़की से जुड़ी याचिका पर सुनवाई कर रही थी।

झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस अरुण कुमार राय की पीठ चंद्रमुनि उरैन द्वारा दायर याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिनकी नाबालिग बेटी 2019 से गुमला से लापता है। सुनवाई के दौरान कोर्ट को बताया गया कि पुलिस ने नाबालिग पीड़िता के आधार कार्ड की जानकारी प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था, जो काफी समय से लंबित है।

इस पर कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह एक लंबी प्रक्रिया है और इससे मामलों की जांच में बाधा आएगी। इसलिए, एक ऐसी व्यवस्था विकसित करने की जरूरत है जिससे पुलिस द्वारा आवश्यक आधार कार्ड का पता लगाने की प्रक्रिया तेज हो सके।

कोर्ट ने कहा कि मानव तस्करी के शिकार बच्चों के मामलों में सभी मामले पुलिस को सूचित नहीं किए जाते हैं। पीड़ितों का पता लगाने के लिए पुलिस द्वारा तत्काल हस्तक्षेप के लिए एक मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) की आवश्यकता होगी। कोर्ट ने बुधवार को याचिकाकर्ता को आदेश दिया कि वह भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (यूआईडीएआई) के निदेशक को मामले में पक्षकार बनाए।

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कोर्ट को यह भी बताया गया कि पुलिस ने 11 फरवरी को चंद्रमुनि उरैन पर ग्रामीणों द्वारा जादू-टोना करने के संदेह में किए गए कथित हमले के संबंध में एफआईआर दर्ज की थी। हाई कोर्ट के निर्देश पर झारखंड विधि सेवा प्राधिकरण की एक टीम ने चंद्रमुनि पर गांव में हुए हमले के बाद की गई कार्रवाई पर एक रिपोर्ट भी पेश की। मामले की सुनवाई फिर से 25 फरवरी को होगी।

हाई कोर्ट ने बुधवार को गुमला के पुलिस अधीक्षक को उरैन पर डायन होने का आरोप लगाकर हमला करने वालों के खिलाफ कार्रवाई न करने के लिए फटकार लगाई थी। उरेन ने अपनी लापता बेटी को ढूंढने के लिए अदालत का रुख किया था। 2019 में जब वह लापता हुई थी तब उसकी उम्र छह साल थी।

सुनवाई के दौरान उसने बताया कि उसी साल उसके गांव वालों ने उसे डायन बताकर उस पर हमला भी किया था, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। दूसरी ओर, पुलिस ने कहा कि महिला हमले के बारे में औपचारिक शिकायत दर्ज कराने को तैयार नहीं थी। उरेन ने 2019 में अपनी बेटी के गांव से लापता होने के बाद शिकायत दर्ज कराई थी।

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चूंकि पुलिस ने उसकी बेटी को ढूंढने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की इसलिए उरेन ने 4 सितंबर 2025 को हाई कोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की, जिसमें उसने अपनी बेटी के मानव तस्करी का शिकार होने का संदेह जताया।