हजारीबाग पारा 40 पार, बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे लोग
हजारीबाग में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस पार कर गया है, जिससे पानी का संकट गहरा गया है। कई इलाकों में जलापूर्ति ठप है, और लोग चापानलों पर लंबी कतारों में खड़े हैं। बोतलबंद पानी पर निर्भरता बढ़ रही है, जिससे गरीब परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ रहा है। नगर निगम अब जलापूर्ति के समाधान के लिए सक्रिय है।

हजारीबाग हमारे प्रतिनिधि हजारीबाग शहर में सूरज की तपिश और पारा 40 डिग्री सेल्सियस पार हो गया है। खतरनाक ढंग से गर्मी बढ़ी है। ऐसे में पानी के लिए हाहाकार मच गया है। शहर के एक बड़े हिस्से में जलापूर्ति ठप या अनियमित है। जिससे लाखों की आबादी बेहाल है। सरकारी जलापूर्ति पाइपलाइन में अनिश्चितता और गिरते भूजल स्तर ने स्थिति को विस्फोटक बना दिया है। शहर के कई प्रमुख वार्डों और मोहल्लों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। विशेष रूप से शिवपुरी, दीपूगढ़ा, विकास नगर, विष्णुपुरी, हुरहुरू, सुभाष नगर और आश्रम रोड कुम्हार टोली, मटवारी मलिन बस्ती जैसे इलाकों में पेयजल का भारी संकट है।
यहां लोग नगर निगम के चापानलों पर सुबह से ही कतारों में खड़े नजर आते हैं। कई चापानल जलस्तर नीचे जाने के कारण जवाब दे चुके हैं। पानी संकट से दैनिक जीवन प्रभावित होने लगा है। पानी की जद्दोजहद के कारण बच्चों का स्कूल जाना और नौकरीपेशा लोगों का ऑफिस पहुँचना दूभर हो गया है। घर की महिलाएं सुबह 4 बजे से ही पानी के स्रोतों पर कतार लगा रही हैं।बाज़ार के पानी का बढ़ता बोझसरकारी सप्लाई फेल होने के बाद मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों की निर्भरता अब बोतलबंद पानी और जार पर बढ़ गई है। लोगों को रोजाना 20 लीटर के एक जार के लिए 30 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं। पेयजल के लिए पानी खरीदना नया मासिक बजट बनता जा रहा है। गर्मी के महीनों में पानी अब एक नया अनिवार्य मासिक खर्च बन गया है, जो गरीब परिवारों की जेब पर भारी पड़ रहा है। शहर मे पानी के मुख्य स्रोत छड़वा डैम सूखता जा रहा है। जर्जर व्यवस्था के कारण शहर की प्यास बुझाने वाला मुख्य स्रोत छड़वा डैम खुद संकट में है। तापमान बढ़ने से छड़वा डैम का जलस्तर तेजी से घट रहा है, जिससे लगभग 2.5 लाख लोगों की जलापूर्ति प्रभावित हो रही है। महापौर अरविंद कुमार राणा ने निरीक्षण के दौरान डैम के टूटे फाटकों और जर्जर स्थिति पर चिंता व्यक्त की है। वाटर ट्रीटमेंट प्लांट में फिटकरी और ब्लीचिंग पाउडर की अनियमित मात्रा पर भी महापौर ने नाराजगी जताई है, जिससे पानी की शुद्धता पर सवाल उठ रहे हैं ।नगर निगम और अधिकारी हुए रेसजलापूर्ति की समस्या पर नगर निगम प्रशासन अब हरकत में आता दिख रहा है। एलएंडटी कंपनी के माध्यम से वॉटर ट्रीटमेंट प्लांट के काम में तेजी लाने और इंटेक वेल में अतिरिक्त मोटर लगाने की प्रक्रिया शुरू की गई है। पहले के बोर्ड निर्णयों के तहत वार्ड स्तर पर दो-दो बोरिंग कराने की योजना है ताकि स्थानीय स्तर पर राहत मिल सके । हजारीबाग के लोग शुद्ध पेयजल के लिए फिलहाल वादों और भविष्य की योजनाओं के भरोसे हैं, जबकि वर्तमान में भीषण गर्मी में प्यास बुझाने के लिए उन्हें बाजार और सूखते चापानलों के बीच भागदौड़ करनी पड़ रही है।
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