जलमीनार बना शोभा की वस्तु, प्यास से जूझ रहे लोग
महागामा के खुर्द डुमरिया गांव में लाखों की लागत से बनी सोलर जलमीनार पूरी तरह खराब हो गई है। ग्रामीणों को पानी के लिए भटकना पड़ रहा है। कई बार अधिकारियों को सूचना देने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। यह केवल एक गांव की समस्या नहीं, बल्कि पूरे प्रखंड की स्थिति है। ग्रामीणों ने जलमीनार को तुरंत चालू करने की मांग की है।

महागामा एक प्रतिनिधि। महागामा प्रखंड के रामकोल पंचायत स्थित खुर्द डुमरिया गांव में लाखो की लागत से लगी सोलर जलमीनार व्यवस्था पूरी तरह शोभा की वस्तु बनकर रह गई है वर्षों से खराब पड़े इस जलमीनार ने सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत उजागर कर दी है। भीषण गर्मी में जहां पानी जीवन का आधार है, वहीं ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए भटकने को मजबूर हैं। ग्रामीणों प्रमिला देवी कविता देवी आरती देवी चंदन सिंह सोनू पासवान धर्मेंद्र सिंह सुमित पासवान ने कहा की यह सिर्फ एक मशीन की खराबी नहीं, बल्कि सिस्टम की लापरवाही का नतीजा है। कई बार जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों को खराब होने की सूचना देने के बावजूद मरम्मत की दिशा में कोई का पहल नहीं हुई।
नतीजतन, लाखो रुपये खर्च कर बनाई गई योजना महज एक शोभा की वस्तु बनकर रह गई है। खुर्द डुमरिया के अधिकांश लोग गरीब और मजदूर वर्ग से हैं। उनके लिए निजी पानी का व्यवस्था करना संभव नहीं है। ऐसे में सरकारी जलमीनार ही एकमात्र सहारा था, जो अब पूरी तरह ठप है। हालात इतने बदतर हैं कि महिलाएं और बच्चे दूर-दराज के स्रोतों से पानी ढोने को मजबूर हैं। स्थिति की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि जलमीनार के चारों ओर झाड़-झंखाड़ उग आए हैं, जो इसकी वर्षों से उपेक्षा की कहानी बयां करते हैं। यह सिर्फ एक गांव की समस्या नहीं, लगभग प्रखंड के सभी पंचायतों का यही हाल है।अब सवाल उठता है कि आखिर जवाबदेही किसकी है लाखो की योजनाएं कागजों पर चलती रहेंगी या जमीनी स्तर पर भी लोगों को राहत मिलेगी ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से अविलंब जलमीनार को चालू कराने की मांग की है, ताकि इस भीषण गर्मी में उन्हें राहत मिल सके।
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