टंडवा में डीजल को लेकर कोयलांचल में मचा हाहाकार
टंडवा में मिडिल ईस्ट के युद्ध के कारण डीजल की आपूर्ति प्रभावित हो रही है। अधिकांश पेट्रोल पंपों पर डीजल की कमी से वाहन चालकों को मुश्किल का सामना करना पड़ रहा है। कुछ पंपों पर डीजल की आपूर्ति केवल 4 से 5 हजार लीटर हो रही है, जबकि औसत खपत इससे कहीं अधिक है।

टंडवा, निज प्रतिनिधि। मिडिल ईस्ट में युद्ध के कारण डीजल की आपूर्ति पर असर अब टंडवा में दिखने लगा है। औद्योगिक नगरी टंडवा में इसका व्यापक असर दिख रहा है। देखा जा रहा है कि कुछ पंपों के शटर गिर चुके हैं, तो कुछ पर भारी वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। मां तारा पंप के कर्मियों का कहना है कि दो दिन में एक टैंकर डीजल मिल रहा है। एक अनुमान के अनुसार, मगध और आम्रपाली में कोयला उत्पादन में हर रोज एक लाख लीटर डीजल की खपत है, जबकि कोयला और ऐश पौंड की ढुलाई समेत आम लोगों के आवागमन में 25 से 30 हजार लीटर डीजल की खपत होती है।
बताया गया कि पिछले आठ दिनों से टंडवा प्रखंड के अधिकांश पेट्रोल पंपों पर लोगों को डीजल नहीं मिल रहा है। जानकारों की मानें तो डीजल की किल्लत के कारण कुछ कारोबारी बरही से डीजल मंगाकर अपना काम चला रहे हैं। जानकारी के अनुसार, सीसीएल के मगध में हर रोज 75 हजार लीटर डीजल की खपत है, जबकि आम्रपाली में कोयला उत्पादन के लिए 25 से 30 हजार लीटर की खपत है। बताया गया कि आम्रपाली में उत्पादन कर रही एनसीसी कंपनी ने उत्पादन से जुड़ी कुछ मशीनों को बंद कर रखा है। पंप के एक मालिक का कहना है कि एक पंप को हर रोज मात्र 4 से 5 हजार लीटर डीजल आपूर्ति हो रही है, जो खपत की तुलना में बहुत कम है। टंडवा-केरेडारी में एनटीपीसी और सीसीएल की कोयला ढुलाई के लिए एक दर्जन ट्रांसपोर्टिंग कंपनियां कार्यरत हैं, जिनके अंतर्गत तीन हजार से अधिक हाइवा चल रहे हैं। डीजल की कमी से ट्रांसपोर्टिंग कंपनियां भी परेशान हैं। मुखिया अरविंद सिंह का कहना है कि डीजल की कमी से लोग परेशान हैं। इससे अधिक परेशानी बढ़ी तो कोयलांचल में उत्पादन से लेकर डिस्पैच तक बुरी तरह प्रभावित होगा।
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