नाबार्ड के ऑडिट में खुलासा, झारखंड सहकारी बैंक में 6.24 करोड़ रुपए की अनियमितता
बिष्टुपुर शाखा की जांच में यह बात सामने आई है कि जुलाई 2025 में किए गए बड़े पैमाने पर नवीनीकरण कार्य में बैंक शाखा या प्रधान कार्यालय से कोई मंजूरी नहीं ली गई या कोई कार्य आदेश, प्रगति रिपोर्टिंग या निगरानी संबंधी दस्तावेज नहीं दिए गए हैं।

झारखंड राज्य सहकारी बैंक लिमिटेड (जेएससीबी) की बिष्टुपुर सहित विभिन्न शाखाओं के नवीनीकरण और उन्नयन कार्यों में भारी वित्तीय अनियमितता सामने आयी है। बिष्टुपुर शाखा की जांच में यह बात सामने आई है कि जुलाई 2025 में किए गए बड़े पैमाने पर नवीनीकरण कार्य में बैंक शाखा या प्रधान कार्यालय से कोई मंजूरी नहीं ली गई या कोई कार्य आदेश, प्रगति रिपोर्टिंग या निगरानी संबंधी दस्तावेज नहीं दिए गए।
बैंक की स्वीकृति के बिना ही 10 जनवरी 2025 को बिष्टुपुर शाखा के लिए 624 लाख का कार्य आवंटित कर दिया। यह कार्यशैली बिना अनुमोदन, ऑडिट या निगरानी के बड़े पूंजीगत व्यय के निष्पादन की ओर इशारा करता है। राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) द्वारा 31 मार्च 2025 तक किए गए ऑडिट की रिपोर्ट के आधार पर 29 दिसंबर से 17 जनवरी तक बैंक की कार्यशैली पर वैधानिक जांच की गई थी। जांच में बैंक के कामकाज में कई गंभीर अनियमितताएं सामने आईं। इसमें बैंक की बोर्ड बैठकों के एजेंडे में गड़बड़ी, बैठकों के कैलेंडर का पालन नहीं करना, अनुमति बिना ही टीए और सिटिंग फीस का भुगतान करना प्रमुख था। इन कमियों को देखते हुए, सहकारिता विभाग ने संबंधित अधिकारियों को आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने और जिम्मेदार पक्षों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए हैं।
शाखाओं के नवीनीकरण को मंजूरी देने में भारी अनियमितता
वैधानिक जांच रिपोर्ट के मुताबिक, बोर्ड ने 3 जून 2024 को कुछ शाखाओं के नवीनीकरण को मंजूरी दी थी। इसमें निर्णय लिया गया कि सहकारी समितियों के रजिस्ट्रार (आरसीएस) के अंतर्गत एकीकृत सहकारी विकास परियोजना (आईसीडीपी) के माध्यम से इसका क्रियान्वयन किया जाए। इसके बाद, सीईओ ने जुलाई-अगस्त 2024 में आरसीएस और आईसीडीपी के साथ पत्राचार शुरू किया। हालांकि, इसके लिए कोई आंतरिक फाइल नोटिंग, अनुमोदन या दस्तावेज संलग्न नहीं किए गए, जो मुख्यालय के कमजोर रिकॉर्ड-कीपिंग को साबित करता है।
आईसीडीपी ने 27 सितंबर 2024 को बिष्टुपुर और गढ़वा शाखाओं के लिए 624.17 लाख की लागत का अनुमान दिया। हालांकि इसका कोई प्रमाण नहीं था कि बैंक ने उक्त लागत अनुमानों की जांच की या उन्हें अनुमोदित या स्वीकृत किया। आईसीडीपी ने बैंक की स्वीकृति के बिना ही 10 जनवरी 2025 को बिष्टुपुर शाखा के लिए स्वतंत्र रूप से कार्य आवंटित कर दिया। बैंक ने इस संचार की प्रति मिलने से इनकार किया जो समन्वय में कमी को दर्शाता है।




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