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ईरान के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करना इतना आसान क्यों? US-इजरायल के सामने बड़ा सिरदर्द

ईरान के लिए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद करना अब पहले जितना अंतिम उपाय नहीं रहा। पहले वर्षों में ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने कई बार धमकी दी थी, लेकिन इसे अंतिम विकल्प माना जाता था क्योंकि इससे ईरान के दुश्मनों में बदलाव आ सकते थे। 

Fri, 13 March 2026 10:28 PMNiteesh Kumar लाइव हिन्दुस्तान
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ईरान के लिए स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बंद करना इतना आसान क्यों? US-इजरायल के सामने बड़ा सिरदर्द

अमेरिका-इजरायल की ओर से ईरान पर 28 फरवरी से शुरू हुए हमलों के जवाब में ईरान ने स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज को प्रभावी रूप से बंद कर दिया है। सामान्यतः दुनिया का लगभग 5वां हिस्सा तेल और तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) इसी संकरे मार्ग से गुजरता है। संयुक्त राष्ट्र के आंकड़ों के अनुसार, युद्ध शुरू होने के बाद से ट्रैफिक में 97% की कमी आई है। ईरान ने इसे अमेरिका-इजरायल हमलों के प्रतिशोध के रूप में किया है, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता की हत्या भी शामिल है। इससे तेल की कीमतें 2022 के बाद सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गई हैं और वैश्विक ऊर्जा संकट की आशंका बढ़ गई है।

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ईरान के लिए स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज बंद करना अब पहले जितना अंतिम उपाय नहीं रहा। पहले वर्षों में ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने कई बार धमकी दी थी, लेकिन इसे अंतिम विकल्प माना जाता था क्योंकि इससे ईरान के दुश्मनों में रणनीतिक बदलाव आ सकते थे और ईरान के खुद के ऊर्जा क्षेत्र पर प्रतिशोध हो सकता था। लेकिन फरवरी 2025 के अंत में शुरू हुए युद्ध को ईरानी अधिकारी अस्तित्व का संकट बता रहे हैं। गार्ड्स अब रणनीति पर अधिक नियंत्रण रखते हैं।

किन देशों के लिए एकमात्र रास्ता

स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज ईरान और ओमान के बीच स्थित है, जो खाड़ी देशों (कुवैत, इराक, कतर, यूएई और ईरान) के लिए समुद्री निकास का एकमात्र रास्ता है। बंद होने से वैश्विक तेल कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे जीवन-यापन संकट और खाद्यान्न सुरक्षा पर असर पड़ सकता है। केप्लर एनालिटिक्स के अनुसार, दुनिया के 33% उर्वरक (सल्फर और अमोनिया सहित) भी इसी मार्ग से गुजरते हैं। जलडमरूमध्य को सुरक्षित करना बेहद कठिन है क्योंकि यह संकरा है। शिपिंग लेन सिर्फ 2 नॉटिकल माइल चौड़ी हैं।

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आखिर क्या है चुनौती

जहाजों को ईरानी द्वीपों और पहाड़ी तट के सामने मुड़ना पड़ता है, जो ईरानी बलों को छिपने की जगह देता है। ईरान की पारंपरिक नौसेना काफी हद तक नष्ट हो चुकी है, लेकिन रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स के पास तेज हमलावर नावें, मिनी सबमरीन, माइंस, विस्फोटक जेटस्की और ड्रोन हैं। ईरान महीने में 10,000 ड्रोन बना सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, प्रतिदिन 3-4 जहाजों को एस्कॉर्ट करना संभव है, लेकिन लंबे समय तक यह संसाधनों की मांग करेगा। सुसाइड हमलों का खतरा बना रहता है। यमन के हूती विद्रोहियों ने लाल सागर में इसी तरह अमेरिका-यूरोपीय सुरक्षा के बावजूद जहाजों को बाधित किया था।

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अमेरिका, फ्रांस, ब्रिटेन और अन्य देश जहाजों की सुरक्षा के लिए योजना बना रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तेल टैंकरों की सुरक्षा का वादा किया है और शिपिंग कंपनियों के लिए बीमा की व्यवस्था की है। फ्रांस अपना एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप भेज रहा है, जबकि यूरोपीय देश संयुक्त मिशन पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, लंबे युद्ध में वैकल्पिक पाइपलाइन जैसे सऊदी-अरब और यूएई के विकल्प सीमित हैं और वे भी हमलों से असुरक्षित हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि दुनिया को तेल प्रवाह बनाए रखने के लिए सुरक्षा उपाय जरूर लागू होंगे, लेकिन ईरान की क्षमता के कारण यह चुनौतीपूर्ण रहेगा।

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